देहरादून। उत्तराखंड के दूरस्थ और दुर्गम पहाड़ी इलाकों में इंटरनेट की सुस्त रफ्तार और मोबाइल नेटवर्क की लुकाछिपी अब जल्द ही बीते दौर की बात होगी। मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने सचिवालय में राज्य ब्रॉडबैंड समिति की 9वीं बैठक के दौरान कनेक्टिविटी से जुड़ी बाधाओं को दूर करने के लिए निर्णायक निर्देश जारी किए हैं।
मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि जिन क्षेत्रों में भौगोलिक चुनौतियों के कारण सड़क मार्ग उपलब्ध नहीं है, वहां 4जी उपकरणों को ले जाने का इंतजार करने के बजाय सीधे फाइबर केबल और वाई-फाई के माध्यम से कनेक्टिविटी पहुंचाई जाए। उन्होंने अधिकारियों को लीक से हटकर नए तकनीकी विकल्पों पर काम करने को कहा है ताकि डिजिटल इंडिया का लाभ अंतिम छोर तक पहुंचे।
भारतनेट परियोजना की समीक्षा करते हुए मुख्य सचिव ने सभी पंचायत भवनों को तत्काल इंटरनेट सेवा से संतृप्त करने का लक्ष्य रखा। जिन गांवों में पंचायत भवन अभी निर्माणाधीन हैं या मरम्मत के दौर में हैं, वहां कनेक्टिविटी रोकने के बजाय पास के सरकारी स्कूलों या आंगनबाड़ी केंद्रों में अस्थाई तौर पर इंटरनेट सुविधा शुरू की जाएगी।
नेटवर्क की गुणवत्ता सुधारने के लिए आईटीडीए (ITDA) अब राज्य सरकार के राइट ऑफ वे (RoW) पोर्टल को हैंडल करेगा। पेयजल, बिजली और गैस जैसी भूमिगत लाइनें बिछाने वाले सभी विभागों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने सिस्टम को इस पोर्टल के साथ एकीकृत करें। इससे बार-बार होने वाली सड़क खुदाई और केबल कटने की समस्या से निजात मिलेगी।
शहरी इलाकों में बढ़ती कॉल ड्रॉप की समस्या पर मुख्य सचिव ने टेलीकॉम कंपनियों को कड़ी फटकार लगाई है। उन्होंने कंपनियों को पूरे प्रदेश में ऐसे ‘ब्लैक स्पॉट’ चिह्नित करने का आदेश दिया है जहां सिग्नल कमजोर रहता है। आगामी यात्रा सीजन को देखते हुए सभी प्रमुख मार्गों पर स्थायी टावर लगने तक अस्थाई मोबाइल टावर (COW – Cell on Wheels) तैनात करने के निर्देश दिए गए हैं।
बैठक में सचिव नितेश कुमार झा, सी. रविशंकर और बीएसएनएल सहित निजी नेटवर्क प्रदाताओं के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे। कनेक्टिविटी सैचुरेशन की प्रगति की निगरानी के लिए अब हर महीने सचिव सूचना प्रौद्योगिकी को रिपोर्ट सौंपी जाएगी। जिला स्तरीय समितियों को भी नियमित बैठकें कर स्थानीय समस्याओं को तत्काल सुलझाने का जिम्मा दिया गया है।










