देवप्रयाग। उत्तराखंड के पहाड़ों में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली एक बार फिर एक मासूम जान पर भारी पड़ गई। देवप्रयाग विधानसभा के सीएचसी हिंडोलाखाल में विशेषज्ञ डॉक्टरों की अनुपस्थिति के कारण 21 वर्षीय गर्भवती महिला आरती देवी को समय पर इलाज नहीं मिल सका। श्रीनगर बेस अस्पताल ले जाते समय रास्ते में ही महिला और उसके गर्भ में पल रहे शिशु ने दम तोड़ दिया।
नंदोली पौड़ीखाल निवासी सुनील कुमार की पत्नी आरती को शनिवार सुबह रक्तचाप बढ़ने और बेहोशी की हालत में अस्पताल लाया गया था। अस्पताल में कोई विशेषज्ञ डॉक्टर मौजूद नहीं था, जिसके चलते उसे तुरंत श्रीनगर रेफर कर दिया गया। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था; अस्पताल पहुंचने से पहले ही उसकी सांसे थम गईं।
हालिया आर्थिक सर्वेक्षण के आंकड़ों के अनुसार, उत्तराखंड में मातृ मृत्यु दर (MMR) में सुधार के दावे किए जा रहे हैं और यह आंकड़ा प्रति लाख 103 से घटकर 91 पर आने की बात कही गई है। हालांकि, देवप्रयाग की यह घटना जमीनी हकीकत को बयां करती है, जहां आज भी सीएचसी केंद्रों पर सृजित पदों के सापेक्ष विशेषज्ञ चिकित्सक तैनात नहीं हैं। हिंडोलाखाल सीएचसी में ही विशेषज्ञ डॉक्टरों के 5 पद स्वीकृत हैं, लेकिन वर्तमान में एक भी विशेषज्ञ वहां तैनात नहीं है।
इस घटना ने स्थानीय लोगों के सब्र का बांध तोड़ दिया है। पिछले एक महीने में यह तीसरी बार है जब क्षेत्र में एंबुलेंस या समय पर इलाज न मिलने से किसी की जान गई है। बीते माह भी एक गर्भवती महिला ने एंबुलेंस के अभाव में दम तोड़ा था, जबकि गुरुवार को एक घायल महिला की मृत्यु भी रेफरल के फेर में पड़कर हो गई थी।
शनिवार को जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष उत्तम सिंह असवाल के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने सीएचसी हिंडोलाखाल पर जोरदार प्रदर्शन किया। प्रभारी चिकित्सक के साथ तीखी नोकझोंक के बाद कांग्रेस ने सरकार को तीन सप्ताह का अल्टीमेटम दिया है। यदि तय समय में विशेषज्ञ डॉक्टरों की तैनाती नहीं हुई, तो क्षेत्र में बड़े स्तर पर जनांदोलन शुरू किया जाएगा।









