गैरसैंण। देवभूमि के युवाओं को खेलों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चमकाने के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक बड़ा मास्टरप्लान पेश किया है। प्रदेश में उत्तराखंड खेल इंफ्रास्ट्रक्चर को जमीनी स्तर पर मजबूत करने के उद्देश्य से अब राज्य के प्रत्येक ब्लॉक में मिनी स्टेडियम बनाए जाएंगे।
बुधवार को विधानसभा के बजट सत्र (Uttarakhand Budget 2026) के दौरान मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि वर्ष 2026-27 के बजट में इस योजना के लिए विशेष वित्तीय प्रावधान कर दिए गए हैं, जिससे ग्रामीण प्रतिभाओं को अपने घर के पास ही आधुनिक सुविधाएं मिल सकेंगी।
पहाड़ी क्षेत्रों के लिए विशेष मानक और बजट
खेल मंत्री रेखा आर्या ने सदन में जानकारी दी कि पर्वतीय क्षेत्रों की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए मिनी स्टेडियम के लिए मानक तय किए गए हैं। एक मिनी स्टेडियम के निर्माण के लिए कम से कम 1.18 एकड़ भूमि की आवश्यकता होगी। सरकार ने प्रत्येक स्टेडियम के निर्माण के लिए ₹1.70 करोड़ की राशि निर्धारित की है। यह कदम सीधे तौर पर उन प्रतिभावान खिलाड़ियों के लिए वरदान साबित होगा जिन्हें सुविधाओं के अभाव में शहरों का रुख करना पड़ता था।
नेशनल गेम्स की सफलता और लेगेसी पॉलिसी
उत्तराखंड ने वर्ष 2025 में आयोजित 38वें राष्ट्रीय खेलों में शानदार प्रदर्शन करते हुए कुल 103 पदक जीतकर इतिहास रचा था। उस दौरान तैयार किए गए विश्वस्तरीय खेल ढांचों को भविष्य में भी उपयोग में लाने के लिए सरकार ‘लेगेसी पॉलिसी’ पर काम कर रही है। इस नीति के तहत राज्य भर में 23 नई खेल अकादमियां स्थापित की जा रही हैं, जहाँ 900 से अधिक एथलीटों को हर साल उच्च स्तरीय प्रशिक्षण दिया जाएगा।
पलायन रोकने और रोजगार की नई उम्मीद
सरकार का मानना है कि हर ब्लॉक में स्टेडियम होने से न केवल खेल संस्कृति को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे। हल्द्वानी में खेल विश्वविद्यालय और लोहाघाट में महिला स्पोर्ट्स कॉलेज की स्थापना का काम भी तेज कर दिया गया है। धामी सरकार की यह रणनीति उत्तराखंड को राष्ट्रीय खेल मानचित्र पर ‘पावरहाउस’ के रूप में स्थापित करने की दिशा में निर्णायक मानी जा रही है।










