दून हॉराइज़न, चंडीगढ़ (1 अक्टूबर) : पंजाब की राजनीति में विधानसभा चुनाव से महज छह महीने पहले कांग्रेस खेमे में भारी उथल-पुथल मच गई है। अंदरूनी गुटबाजी और लगातार उठ रहे विरोध के बीच पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी (Punjab Congress Chief) के अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग की कुर्सी जाना अब तय माना जा रहा है। पार्टी के शीर्ष गलियारों से आ रही खबरों के मुताबिक, अगले 24 से 48 घंटों के भीतर नए प्रदेश अध्यक्ष के नाम पर अंतिम मुहर लग जाएगी।
बघेल की विदाई और पायलट का वीटो: कैसे पलटी बाजी?
लुधियाना से लोकसभा सांसद राजा वडिंग को जब 2022 में आम आदमी पार्टी की प्रचंड जीत के बाद प्रदेश की कमान सौंपी गई थी, तब पार्टी बिखराव के दौर में थी। लेकिन वडिंग के कार्यकाल में यह खाई पटने के बजाय और चौड़ी होती चली गई।
राज्य में दो समानांतर पावर सेंटर बन गए थे। एक तरफ वडिंग का खेमा था, जिसे तत्कालीन प्रभारी भूपेश बघेल का खुला संरक्षण हासिल था। दूसरी तरफ पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी, नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा और सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा की तिकड़ी लगातार नेतृत्व परिवर्तन की मांग पर अड़ी थी।
जुलाई में जब हाईकमान ने वडिंग को अभयदान दिया, तो नाराजगी खुलकर बगावत में बदलने लगी थी। हालात भांपते हुए आलाकमान ने सितंबर में बघेल को हटाकर राजस्थान के पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट को पंजाब का नया प्रभारी नियुक्त किया। पायलट की ताजपोशी दरअसल वडिंग की विदाई की पहली औपचारिक पटकथा थी—और हुआ भी यही।
सिंगला सबसे आगे, लेकिन जाट सिख दावेदार भी कतार में
नए मुखिया के तौर पर सबसे मजबूत नाम पूर्व कैबिनेट मंत्री विजय इंदर सिंगला (Vijay Inder Singla) का उभरा है। व्यापारी वर्ग से आने वाले सिंगला हिंदू चेहरा हैं और हाल ही में उन्हें पार्टी की चुनाव प्रबंधन समिति की जिम्मेदारी भी सौंपी गई थी। पंजाब के शहरी और हिंदू बहुल विधानसभा क्षेत्रों में पकड़ मजबूत करने के लिए आलाकमान इस बार गैर-सिख चेहरे पर बड़ा दांव खेलने के मूड में दिख रहा है।
हालांकि, क्षेत्रीय सियासत का गणित इतना सीधा नहीं है। अध्यक्ष पद की दौड़ में जालंधर कैंट से विधायक और भारतीय हॉकी टीम के पूर्व कप्तान परगट सिंह के अलावा गुरदासपुर सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा भी ताल ठोक रहे हैं। दोनों नेता मजबूत जाट सिख पृष्ठभूमि से आते हैं।
नया सोशल इंजीनियरिंग फॉर्मूला: चन्नी, बाजवा और सिंगला की तिकड़ी?
कांग्रेस इस फेरबदल के जरिए पंजाब के जटिल जातीय समीकरणों को नए सिरे से साधने की जुगत में है।
अगर अध्यक्ष पद पर हिंदू चेहरे के रूप में सिंगला बैठते हैं, तो दलित वोट बैंक को साधे रखने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को चुनाव अभियान समिति (Campaign Committee) का प्रमुख बनाया जाना तय है। वहीं, मालवा और माझा के जाट सिख मतदाताओं का प्रतिनिधित्व विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा के जरिए संतुलित रखा जाएगा। पायलट की निगरानी में तैयार हो रहा यह त्रिस्तरीय फॉर्मूला चुनाव से पहले गुटबाजी पर पूर्ण विराम लगा पाता है या नहीं, फैसला आने वाले चंद घंटे तय करेंगे।










