दून हॉराइज़न, चंडीगढ़ (1 अक्टूबर) : पंजाब विधानसभा चुनाव (Punjab Assembly Election) की तैयारियों में जुटी कांग्रेस को उस समय तगड़ा झटका लगा, जब प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। राज्य में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी और मुख्यमंत्री भगवंत मान की घेराबंदी करने के बजाय कांग्रेस अब अपने ही अंतर्कलह को सुलझाने में उलझ गई है। सूत्रों के मुताबिक, पार्टी नेतृत्व अगले 24 से 48 घंटे के भीतर नए प्रदेश अध्यक्ष के नाम पर मुहर लगा सकता है।
वडिंग का सफर और गुटबाजी की दीवार
अमरिंदर सिंह राजा वडिंग ने अप्रैल 2022 में पंजाब कांग्रेस की कमान संभाली थी। यह वह दौर था जब पार्टी विधानसभा चुनावों में आम आदमी पार्टी के हाथों करारी शिकस्त झेल चुकी थी और संगठन पूरी तरह बिखरा हुआ था। वडिंग ने 2024 के लोकसभा चुनाव में लुधियाना सीट से जीत दर्ज कर अपनी राजनीतिक ताकत जरूर दिखाई, मगर राज्य इकाई के भीतर पनप रहे मतभेद कभी शांत नहीं हुए।
पार्टी भीतर ही भीतर दो स्पष्ट धड़ों में बंटी नजर आ रही थी। एक खेमा जहां राजा वडिंग के साथ था, वहीं दूसरा गुट पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा का माना जाता रहा। गुरदासपुर सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा भी चन्नी के समर्थन में खड़े दिखाई दिए। जब 1 जुलाई को हाईकमान ने वडिंग को अध्यक्ष बनाए रखने और चन्नी को सिर्फ प्रचार समिति का प्रमुख बनाने का ऐलान किया, तो असंतोष खुलकर सड़कों और बयानों में आने लगा।
बघेल की विदाई और पायलट का दखल
जब शक्ति प्रदर्शन का यह टकराव दिल्ली दरबार तक पहुंचा, तो पार्टी आलाकमान को कड़े कदम उठाने पड़े। सितंबर के पहले हफ्ते में ही तत्कालीन पंजाब प्रभारी भूपेश बघेल की छुट्टी कर दी गई। उनकी जगह पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव सचिन पायलट को कमान सौंपी गई।
पायलट के सामने सबसे बड़ी चुनौती सभी गुटों को एक मंच पर लाकर संयुक्त प्रदर्शन रैली निकालने की थी। जमीनी हकीकत यही रही कि जाट सिख और दलित समीकरणों के बीच संतुलन साधना आसान साबित नहीं हुआ। इसी तनातनी के चलते वडिंग को आखिरकार अपनी कुर्सी छोड़नी पड़ी।
क्या हिंदू चेहरे पर दांव खेलेगी कांग्रेस?
नए अध्यक्ष की दौड़ में पूर्व कैबिनेट मंत्री विजय इंदर सिंगला का नाम सबसे आगे चल रहा है। सिंगला पंजाब के प्रभावशाली बनिया और व्यापारी समुदाय से आते हैं। कांग्रेस लंबे समय से राज्य के शहरी हिंदू मतदाताओं को साधने की रणनीति पर विचार कर रही है। अब तक सिंगला चुनाव प्रबंधन समिति का जिम्मा संभाल रहे थे, लेकिन ताजा हालात में वह सर्वसम्मत चेहरे के तौर पर उभरे हैं।
दौड़ में सिर्फ सिंगला ही अकेले नहीं हैं। पूर्व भारतीय हॉकी कप्तान और जालंधर कैंट से विधायक परगट सिंह को एक निष्पक्ष और साफ-सुथरी छवि वाले नेता के रूप में देखा जा रहा है। वहीं, आक्रामक जाट सिख चेहरे के तौर पर सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा का नाम भी चर्चा में बना हुआ है। अब देखना होगा कि सचिन पायलट और केंद्रीय नेतृत्व किस नेता पर दांव लगाकर इस अंतर्कलह पर विराम लगाते हैं।










