दून हॉराइज़न, चंडीगढ़ (1 अक्टूबर 2026) : सीमांत जिले तरनतारन के ऐतिहासिक कस्बे गोइंदवाल साहिब में गुरुवार को सियासी हलचल के बीच पंजाब की महिलाओं के लिए बड़ा वित्तीय कदम उठाया गया। स्थानीय अनाज मंडी में आयोजित राज्य स्तरीय सम्मेलन में मुख्यमंत्री भगवंत मान ने सिंगल क्लिक के जरिए 37 लाख पंजीकृत महिला लाभार्थियों के बैंक खातों में माता-पुत्री सम्मान योजना (Mata Putri Samman Yojana) की दूसरी किस्त डीबीटी (Direct Benefit Transfer) से ट्रांसफर कर दी। यह एकमुश्त रकम अक्टूबर से दिसंबर तक के तीन महीनों के लिए सीधे बैंक खातों में भेजी गई है।
श्रेणीवार भुगतान का गणित: किसे कितना पैसा मिला?
प्रशासनिक रूपरेखा के तहत सामान्य वर्ग की पात्र महिलाओं को 1,000 रुपये प्रति माह के हिसाब से तीन महीने की कुल 3,000 रुपये की एकमुश्त राशि दी गई। वहीं अनुसूचित जाति (SC) वर्ग से आने वाली लाभार्थियों को 1,500 रुपये मासिक की दर से 4,500 रुपये ट्रांसफर किए गए हैं। जुलाई 2026 में जब पहली किस्त भेजी गई थी, तब भी इसी तिमाही आधार पर रकम जारी हुई थी। पंजाब के वित्त विभाग की तकनीकी निगरानी में सीधे बैंक खातों में यह पैसा भेजा गया ताकि बिचौलियों की कोई गुंजाइश न बचे।
600 यूनिट बिजली से जीवीके पावर प्लांट तक: उपलब्धियों की फेहरिस्त
समारोह के मंच से मुख्यमंत्री ने अपनी सरकार के चार साल के रिपोर्ट कार्ड का ब्योरा रखा। उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2022 में आम आदमी पार्टी की सरकार बनने के बाद से घरेलू उपभोक्ताओं को 600 यूनिट तक मुफ्त बिजली लगातार मिल रही है। अपनी ऊर्जा नीति का बचाव करते हुए मान ने कहा कि पिछली सरकारों ने राज्य की परिसंपत्तियां बेचीं, जबकि उनकी सरकार ने गोइंदवाल साहिब स्थित 540 मेगावाट के निजी जीवीके थर्मल प्लांट को 1,080 करोड़ रुपये में खरीदकर सरकारी स्वामित्व में लिया।
शिक्षा के मोर्चे पर मान ने दावा किया कि पंजाब नीति आयोग के स्कूली शिक्षा सूचकांकों में शीर्ष पर पहुंचा है। उन्होंने कहा, “2021 में राज्य से केवल 80 छात्र मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट में सफल हुए थे, जो इस साल बढ़कर 882 हो चुके हैं।”
कांग्रेस की खींचतान और अकाली दल के सिमटते सियासी रसूख पर वार
विपक्ष पर सियासी हमला बोलते हुए सीएम मान ने पंजाब कांग्रेस में चल रही अंदरूनी गुटबाजी को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के इस्तीफे के बाद पार्टी अब सिर्फ नए मुखिया की कुर्सी को लेकर कलह में उलझी हुई है। मंच से बादल, मजीठिया और कैप्टन परिवारों के सियासी प्रभाव के खात्मे की बात दोहराते हुए मान ने तंज कसा कि पच्चीस बरस राज करने का दावा करने वाले शिरोमणि अकाली दल के शीर्ष परिवार में आज सदन के भीतर पांच सदस्य भी एकजुट नहीं दिखते।
आने वाले महीनों में इस वित्तीय सहायता योजना का दायरा अन्य छूटी हुई पात्र ग्रामीण महिलाओं तक बढ़ाने के संकेत भी दिए गए हैं।




