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Iron Utensils Food Safety : लोहे की कढ़ाही में इन चीजों को पकाने से बचें, स्वाद के साथ बिगड़ सकती है सेहत

दून हॉराइज़न ब्यूरो,
Published by: Rama Pun Updated Sat, 15 Aug 2026 10:54 AM IST

लोहे की कड़ाही में खाना पकाना सेहत के लिए अच्छा माना जाता है, लेकिन कुछ चीजें इसमें पकाने से केमिकल रिएक्शन हो सकता है। एसिडिक और डेयरी प्रोडक्ट्स को लोहे के बर्तन में बनाने से खाने का स्वाद और पाचन दोनों खराब हो सकते हैं।

Iron Utensils Food Safety

Iron Utensils Food Safety : भारतीय घरों में लोहे के बर्तनों का इस्तेमाल बहुत आम है। दाल में तड़का लगाना हो या सूखी सब्जियां बनानी हों, लोहे की कड़ाही खाने का स्वाद बढ़ाने के साथ-साथ शरीर को जरूरी आयरन भी देती है।

लेकिन हर तरह का खाना लोहे के बर्तन में नहीं पकाया जा सकता। कुछ खास सामग्रियां ऐसी होती हैं, जो लोहे (Iron) के संपर्क में आते ही रसायनिक प्रतिक्रिया (Chemical Reaction) करने लगती हैं।

इससे न केवल खाने का रंग काला पड़ जाता है, बल्कि उसका स्वाद कड़वा हो सकता है और पेट से जुड़ी परेशानियां भी हो सकती हैं।

अगर आप नियमित रूप से लोहे के बर्तनों का उपयोग करते हैं, तो जान लीजिए कि किन चीजों को इसमें पकाने से बचना चाहिए।

1. टमाटर, इमली और नींबू वाली चीजें (एसिडिक फूड्स)

टमाटर की गाढ़ी ग्रेवी, इमली की चटनी या नींबू के रस वाली डिशेज को लोहे की कड़ाही में कभी नहीं पकाना चाहिए।

वजह: इन चीजों में एसिड की मात्रा अधिक होती है। जब एसिड लोहे से मिलता है, तो तेजी से रिएक्शन होता है।

असर: इससे खाने में मेटैलिक (लोहे जैसा) स्वाद आ जाता है और यह पेट में दर्द, एसिडिटी या उल्टी का कारण बन सकता है।

2. कढ़ी और दही वाली ग्रेवी

दही का इस्तेमाल करके बनाई जाने वाली कढ़ी या अन्य ग्रेवी वाली सब्जियों को लोहे की कड़ाही में पकाने से बचना चाहिए।

वजह: दही में लैक्टिक एसिड होता है। तेज आंच और लोहे के संपर्क में आने से दही असामान्य तरीके से फट सकता है।

असर: ऐसा खाना पचने में भारी हो जाता है और पेट फूलने या अपच की शिकायत हो सकती है।

3. दूध से बनी मिठाइयां और खीर

खीर, सेवई, कस्टर्ड या रबड़ी जैसी दूध से तैयार होने वाली चीजों को बनाने के लिए हमेशा स्टील या मोटे तले के पीतल/एल्युमिनियम के बर्तनों का उपयोग करें।

वजह: दूध लोहे के संपर्क में आकर बहुत जल्दी रिएक्ट करता है।

असर: दूध फट सकता है, डिश का रंग मटमैला या काला हो सकता है और उसका असली स्वाद पूरी तरह बदल जाता है।

4. राजमा, छोले और सख्त दालें

राजमा और काबुली चने जैसी चीजों को पकने में ज्यादा समय और एकसमान तापमान की जरूरत होती है।

वजह: लोहे की कड़ाही में हीट डिस्ट्रीब्यूशन (गर्मी का फैलाव) एक जैसा नहीं रहता। किनारे बहुत ज्यादा गर्म हो जाते हैं और बीच में आंच अलग रहती है।

असर: राजमा या छोले अंदर से कच्चे रह सकते हैं। अधपके दाने खाने से गैस, ब्लोटिंग और भारीपन की समस्या हो सकती है। इन्हें हमेशा प्रेशर कुकर में ही उबालें और पकाएं।

5. सिरके (Vinegar) वाला चाइनीज फूड

चाउमीन, मंचूरियन या चिली पनीर बनाते समय सिरके और सोया सॉस का इस्तेमाल खूब होता है।

वजह: सिरका बहुत स्ट्रॉन्ग एसिड होता है। जब इसे गर्म लोहे की कड़ाही में डाला जाता है, तो यह तुरंत लोहे की परत के साथ रिएक्ट करता है।

असर: यह रिएक्शन खाने को नुकसानदेह बना सकता है, जिससे पेट में जलन और संवेदनशील लोगों में स्किन एलर्जी की समस्या हो सकती है।

लोहे के बर्तन इस्तेमाल करने के सही नियम

क्या पकाएं: सूखी हरी सब्जियां (जैसे पालक, मेथी, भिंडी), भुजिया, और सादा दाल का तड़का लोहे में बनाना सबसे अच्छा है।

तुरंत खाली करें: लोहे की कड़ाही में खाना बनते ही उसे किसी कांच, स्टील या मिट्टी के बर्तन में निकाल लें। खाने को कड़ाही में ज्यादा देर तक पड़ा न रहने दें।

धोने का तरीका: कड़ाही को हमेशा हल्के साबुन से धोएं, सूखे कपड़े से पोंछें और उस पर हल्का सा कुकिंग ऑयल लगाकर रखें ताकि जंग न लगे।

Rama Pun

रमा पुन 'दून हॉराइज़न' में हेल्थ और लाइफस्टाइल संपादक के रूप में अपनी अहम जिम्मेदारी निभा रही हैं। स्वास्थ्य, फिटनेस, खानपान और मानसिक स्वास्थ्य (Mental Health) के विषयों पर उनकी पकड़ बेहद मजबूत है। रमा का फोकस हमेशा मेडिकल एक्सपर्ट्स की पुख्ता सलाह और वैज्ञानिक शोध पर आधारित (Evidence-based) खबरें लिखने पर रहता है। उनका स्पष्ट मानना है कि सेहत से जुड़ी कोई भी जानकारी शत-प्रतिशत प्रामाणिक होनी चाहिए। अपनी आकर्षक और तथ्यपरक लेखनी से वे पाठकों को एक स्वस्थ, तनावमुक्त और संतुलित जीवनशैली अपनाने के लिए निरंतर प्रेरित और जागरूक करती हैं।

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