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पहाड़ों में आसान होगा रेल सफर, ऋषिकेश-कर्णप्रयाग प्रोजेक्ट में देश की दूसरी सबसे लंबी सुरंग तैयार

दून हॉराइज़न ब्यूरो,
Published by: Harpreet Singh Updated Sun, 13 Sep 2026 04:34 PM IST

ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल प्रोजेक्ट में 10.847 किमी लंबी एस्केप टनल-1 का ब्रेकथ्रू पूरा हो गया है। यह उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला लाइन की टनल-49 के बाद देश की दूसरी सबसे लंबी रेलवे सुरंग बन गई है।

Rishikesh Karnaprayag Railway Project

मुख्य बातें

  • 10.847 किलोमीटर लंबी एस्केप टनल-1 का काम शुक्रवार को सफलतापूर्वक पूरा हुआ।
  • यह जम्मू-कश्मीर की सुरंग-49 (12.895 किमी) के बाद देश की दूसरी सबसे लंबी रेलवे सुरंग बनी।
  • ढालवाला से नीर गड्डू के बीच कठिन भूगर्भीय परिस्थितियों में यह ब्रेकथ्रू हासिल किया गया।
  • 125 किमी लंबे इस रेल प्रोजेक्ट में कुल 28 में से 22 मुख्य सुरंगें तैयार हो चुकी हैं।
  • लगभग एक हजार कर्मचारी 24 घंटे लगातार काम में जुटे हुए हैं।

दून हॉराइज़न, देहरादून (13 सितंबर): उत्तराखंड की महत्वाकांक्षी ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना (Rishikesh Karnaprayag Railway Project) ने एक बड़ा मील का पत्थर पार कर लिया है, जहां 10.847 किलोमीटर लंबी एस्केप टनल-1 का अंतिम ब्रेकथ्रू सफलतापूर्वक हासिल कर लिया गया। यह नई सुरंग अब जम्मू-कश्मीर की 12.895 किलोमीटर लंबी सुरंग-49 के बाद भारत की दूसरी सबसे लंबी रेलवे टनल बन गई है।

शुक्रवार को ढालवाला से नीर गड्डू के बीच दोनों सिरों को आपस में जोड़ दिया गया। इस कामयाबी के साथ 125 किलोमीटर लंबे इस रेल कॉरिडोर में अब तक 41 अलग-अलग सुरंगों (मुख्य और निकास मिलाकर) की खुदाई का काम पूरा हो चुका है।

हिमालय की कमजोर चट्टानों के बीच 10.8 किमी की खुदाई

यह ब्रेकथ्रू केवल एक निर्माण कार्य पूरा होना भर नहीं है, बल्कि सिविल इंजीनियरिंग का एक असाधारण नमूना भी है। जिस भूभाग से यह 10.847 किमी लंबी सुरंग निकाली गई है, वह भूगर्भीय रूप से बेहद संवेदनशील और अस्थिर माना जाता है। पूरी टनल अत्यधिक दबाव वाली, कई परतों में मुड़ी और भ्रंश (फॉल्ट) वाली चट्टानों से होकर गुजरती है।

विशेष रूप से मेन बाउंड्री थ्रस्ट (Main Boundary Thrust) के इलाके में भारी मात्रा में माइलोनाइट जोन मौजूद था, जहां चट्टानें बार-बार खिसकती और दरकती रहीं। परियोजना प्रबंधक निशीथ शर्मा के अनुसार, करीब एक हजार इंजीनियर और श्रमिक चौबीसों घंटे शिफ्टों में जुटे रहे, तब जाकर ढालवाला से नीर गड्डू का यह हिस्सा सुरक्षित रूप से आर-पार हो पाया।

देश की सबसे लंबी सुरंगों में दर्ज हुआ नाम

भारत में सबसे लंबी रेलवे सुरंग का रिकॉर्ड इस समय जम्मू-कश्मीर में उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेल लिंक (USBRL) के कटरा-बनिहाल खंड पर स्थित खारी और बनिहाल के बीच की सुरंग-49 के नाम है, जिसकी कुल लंबाई 12.895 किलोमीटर है। अब उत्तराखंड की यह 10.847 किमी लंबी एस्केप सुरंग-1 सीधे दूसरे पायदान पर आ गई है।

रेल विकास निगम लिमिटेड (RVNL) इस पूरी 125 किलोमीटर लंबी न्यू ब्रॉडगेज लाइन का निर्माण कर रहा है। उप महाप्रबंधक (सिविल) ओपी मालगुड़ी ने स्पष्ट किया कि 125 किमी की इस परियोजना में कुल 28 मुख्य सुरंगे हैं, जिनमें से 22 का निर्माण पूरा किया जा चुका है।

चारधाम कनेक्टिविटी और बाकी 5 ब्रेकथ्रू का लक्ष्य

ऋषिकेश-कर्णप्रयाग लाइन बनने के बाद गढ़वाल क्षेत्र में परिवहन का पूरा ढांचा बदल जाएगा। अभी ऋषिकेश से कर्णप्रयाग तक सड़क मार्ग से सफर तय करने में 6 से 7 घंटे का समय लगता है, जो रेल शुरू होने के बाद घटकर महज 2 से 2.5 घंटे रह जाएगा।

रेलवे अधिकारियों का कहना है कि परियोजना के बाकी बचे 5 ब्रेकथ्रू अगले एक वर्ष के भीतर पूरे करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके बाद ट्रैक बिछाने, इलेक्ट्रिफिकेशन और सिग्नलिंग का अंतिम चरण शुरू होगा।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

प्रश्न: ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल प्रोजेक्ट में बनी नई सुरंग की लंबाई कितनी है?

उत्तर: नई पूरी हुई एस्केप टनल-1 की लंबाई 10.847 किलोमीटर है, जो देश की दूसरी सबसे लंबी रेलवे सुरंग है।

प्रश्न: इस परियोजना से ऋषिकेश और कर्णप्रयाग के बीच यात्रा समय कितना घटेगा?

उत्तर: रेल मार्ग चालू होने के बाद सड़क के 6-7 घंटे का सफर घटकर लगभग 2 से 2.5 घंटे का रह जाएगा।

Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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