दून हॉराइज़न, चंडीगढ़ (1 अक्टूबर) : पंजाब पुलिस की कमान पिछले चार साल से तदर्थ व्यवस्था के सहारे चलने पर पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट ने राज्य प्रशासन की ढिलाई पर कड़ा ऐतराज जताया है। मुख्य न्यायाधीश की पीठ ने स्पष्ट निर्देश दिया कि राज्य सरकार संघ लोक सेवा आयोग यानी UPSC द्वारा भेजे गए वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों के पैनल में से जल्द से जल्द नियमित पुलिस महानिदेशक (Regular DGP) के नाम पर मुहर लगाए। अदालत ने पंजाब के मुख्य सचिव को इस बाबत की गई प्रशासनिक प्रगति पर जवाब दाखिल करने के लिए 13 अक्टूबर 2026 तक का समय दिया है।
चार साल से ‘एडहॉक’ व्यवस्था, याचिका में उठे सवाल
अधिवक्ता निखिल थमम्न द्वारा दायर जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करते हुए अदालत ने सीमावर्ती सूबे में पुलिस बल के नेतृत्व संकट को बेहद संवेदनशील माना। याचिकाकर्ता ने दलील दी कि चार वर्षों से अधिक समय से राज्य पुलिस को कोई नियमित प्रमुख नहीं मिला है और पूरा महकमा अतिरिक्त प्रभार (Additional Charge) के भरोसे धकेला जा रहा है।
आंतरिक सुरक्षा और सीमा पार से नशा-हथियार तस्करी जैसी गंभीर चुनौतियों से जूझ रहे राज्य के लिए यह स्थिति बेहद चिंताजनक है। याचिका में साफ कहा गया कि पुलिस बल के मुखिया को वैधानिक स्वायत्तता और सुरक्षित कार्यकाल मिलना अनिवार्य है, जो तदर्थ व्यवस्था में संभव नहीं।
प्रकाश सिंह फैसले की अनदेखी और UPSC पैनल का पेंच
राज्य सरकार के वकील ने अदालत को अवगत कराया कि यह मामला पहले से सुप्रीम कोर्ट के संज्ञान में है, जहां सरकार अपना अनुपालन हलफनामा प्रस्तुत कर चुकी है। इस दस्तावेज की प्रति हाई कोर्ट के रिकॉर्ड पर भी रखी गई। महाधिवक्ता कार्यालय ने पीठ को बताया कि यूपीएससी की इम्पैनलमेंट कमेटी द्वारा अनुशंसित तीन वरिष्ठतम आईपीएस अधिकारियों के पैनल पर सरकार सक्रियता से विचार कर रही है।
लेकिन, पीठ ने शीर्ष अदालत के वर्ष 2006 के ऐतिहासिक ‘प्रकाश सिंह बनाम भारत संघ’ मामले का हवाला देते हुए याद दिलाया कि किसी भी राज्य में कार्यवाहक (Acting DGP) का प्रावधान नियमों के बिल्कुल खिलाफ है।
सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट दिशा-निर्देशों के मुताबिक, राज्य सरकारों को डीजीपी पद रिक्त होने से कम से कम तीन महीने पहले यूपीएससी को वरिष्ठ अधिकारियों की सूची भेजनी होती है, जिसके बाद आयोग मेरिट और अनुभव के आधार पर तीन अफसरों का पैनल तैयार करता है। इनमें से किसी एक को कम से कम दो साल के निश्चित कार्यकाल के लिए चुना जाना कानूनी बाध्यता है।
अब सबकी निगाहें पंजाब सचिवालय के अगले कदम पर टिकी हैं, जहां गृह विभाग को 13 अक्टूबर की अगली तारीख से पहले फाइल पर अंतिम मुहर लगवानी होगी।










