गुवाहाटी/दिसपुर, 19 फरवरी 2026। (Assam Election 2026) असम में आगामी विधानसभा चुनाव 2026 को लेकर सियासी पारा चढ़ने लगा है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के लिए इस बार सत्ता बचाने के साथ-साथ रिकॉर्ड बनाने की भी चुनौती है। अगर भगवा खेमा इस बार सरकार बनाने में सफल होता है, तो असम के इतिहास में भाजपा की यह लगातार तीसरी जीत यानी हैट्रिक होगी।
भाजपा आलाकमान ने इसके लिए अभी से पूरी ताकत झोंक दी है। असम के प्रभारी और भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने पार्टी कार्यकर्ताओं को स्पष्ट संदेश देते हुए आगामी विधानसभा चुनाव में 50% वोट हासिल करने का बड़ा लक्ष्य दिया है। गौरतलब है कि 2021 के विधानसभा चुनाव में भाजपा का वोट शेयर 33.2% था, जिसे अब करीब 17% बढ़ाने की रणनीति तैयार की गई है।
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की लोकप्रियता और भाजपा का गणित
असम की राजनीति में मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा का दबदबा आज भी बरकरार है। उनकी सरकार की विकास योजनाओं और हिंदुत्व के एजेंडे ने भाजपा को जमीनी स्तर पर मजबूती दी है। भाजपा अध्यक्ष द्वारा दिए गए 50% वोट के टारगेट को यदि पार्टी हासिल कर लेती है, तो राज्य में विपक्षी दलों का पूरी तरह सूपड़ा साफ हो सकता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस आंकड़े के साथ विपक्ष महज 20 से 28 सीटों पर सिमट सकता है। भाजपा की रणनीति इस बार उन क्षेत्रों में भी सेंध लगाने की है, जहां पिछली बार पार्टी को कड़ी टक्कर मिली थी। विशेषकर गुवाहाटी और डिब्रूगढ़ जैसे शहरी क्षेत्रों के साथ-साथ ऊपरी असम के चाय बागान इलाकों में पार्टी अपना आधार और मजबूत कर रही है।
कांग्रेस को भूपेन बोरा के इस्तीफे से लगा बड़ा झटका

वहीं, सत्ता में वापसी का ख्वाब देख रही कांग्रेस को चुनाव से ठीक पहले जबरदस्त झटका लगा है। पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेन बोरा ने पार्टी छोड़ दी है। बोरा के इस्तीफे से कांग्रेस के भीतर आंतरिक कलह खुलकर सामने आ गई है। पार्टी आलाकमान के लिए अब असम में नेतृत्व का संकट खड़ा हो गया है। कांग्रेस को यह डर सता रहा है कि भूपेन बोरा के साथ उनके भरोसेमंद कई विधायक और स्थानीय नेता भी भाजपा का दामन थाम सकते हैं। अगर ऐसा होता है, तो चुनाव से पहले मतदाताओं के बीच कांग्रेस की छवि और भी कमजोर हो जाएगी, जिसका सीधा फायदा एनडीए को मिलना तय माना जा रहा है।
महाजोत का बिगड़ा समीकरण: गठबंधन में सीटों पर घमासान
असम में विपक्षी एकजुटता यानी ‘महाजोत’ की राह भी आसान नहीं दिख रही है। 2021 के मुकाबले 2026 में गठबंधन का स्वरूप पूरी तरह बदल चुका है। बदरुद्दीन अजमल की अगुआई वाली एआईयूडीएफ (AIUDF) और बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (BPF) पहले ही महाजोत से अलग हो चुके हैं। जहां बीपीएफ अब एनडीए का हिस्सा बन चुका है, वहीं एआईयूडीएफ ने अकेले चुनाव लड़ने का ऐलान किया है।
वर्तमान में कांग्रेस के साथ असम जातीय परिषद (AJP) और अखिल गोगोई का रायजोर दल गठबंधन में शामिल हैं। कांग्रेस ने इन दोनों दलों को 11-11 सीटें देने की पेशकश की है, लेकिन दोनों दल इससे कहीं अधिक सीटों की मांग पर अड़े हैं। सीटों के इस खींचतान ने कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
अप्रैल-मई में हो सकते हैं चुनाव, चुनाव आयोग सक्रिय
असम में मौजूदा विधानसभा का कार्यकाल मई 2026 में समाप्त हो रहा है, जिसे देखते हुए चुनाव आयोग ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त ने हाल ही में गुवाहाटी का दौरा कर सुरक्षा व्यवस्था और चुनावी तैयारियों की समीक्षा की है। कयास लगाए जा रहे हैं कि बिहू उत्सव को ध्यान में रखते हुए मतदान की तारीखें अप्रैल के पहले या दूसरे सप्ताह में रखी जा सकती हैं। बिना किसी मजबूत गठबंधन के भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए को शिकस्त देना कांग्रेस के लिए टेढ़ी खीर साबित हो रहा है। ऊपरी असम से लेकर बराक घाटी तक भाजपा ने अपनी संगठनात्मक शक्ति को दोगुना कर दिया है।













