आइजोल। मिजोरम के प्रतिबंधित क्षेत्रों में अवैध प्रवेश और संदिग्ध आतंकी गतिविधियों में संलिप्तता के आरोप में छह यूक्रेनी नागरिकों की हिरासत ने भारत और यूक्रेन के बीच कूटनीतिक हलचल तेज कर दी है। इन व्यक्तियों के साथ एक अमेरिकी नागरिक को भी पकड़ा गया है, जिन पर म्यांमार के उन उग्रवादी समूहों को सहायता प्रदान करने का संदेह है जिनके संबंध भारत विरोधी विद्रोहियों से हैं।
यूक्रेनी दूतावास ने इस मामले में दखल देते हुए अपने नागरिकों के खिलाफ लगे आतंकवाद के आरोपों को ‘पूरी तरह निराधार’ बताया है। कीव का आरोप है कि इस पूरी कार्रवाई के पीछे रूस का हाथ हो सकता है, जो भारत और यूक्रेन के बढ़ते द्विपक्षीय संबंधों में दरार पैदा करने की कोशिश कर रहा है।
भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने साफ किया है कि भारत के कुछ पूर्वोत्तर हिस्से ‘प्रतिबंधित और संरक्षित’ क्षेत्रों की श्रेणी में आते हैं। इन क्षेत्रों में विदेशी नागरिकों के लिए विशेष अनुमति अनिवार्य है और फिलहाल यह मामला अदालत के विचाराधीन है, जहां सभी तथ्य पेश किए जाएंगे।
भारत में यूक्रेन के राजदूत ओलेक्जेंडर पोलिशचुक ने हाल ही में विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात कर ‘कंसुलर एक्सेस’ (राजनयिक पहुंच) की मांग की है। दूतावास ने एक कड़े बयान में कहा कि यूक्रेन खुद रूसी आतंकवाद का शिकार है, इसलिए वह किसी भी रूप में आतंकवाद का समर्थन नहीं कर सकता।
यूक्रेन ने उन मीडिया रिपोर्टों पर भी चिंता जताई है जिनमें दावा किया गया था कि यह कार्रवाई रूसी खुफिया जानकारी के आधार पर की गई है। यूक्रेन इसे राजनीति से प्रेरित कदम मान रहा है। उन्होंने याद दिलाया कि अगस्त 2024 में पीएम मोदी की यूक्रेन यात्रा के दौरान दोनों देशों ने आतंकवाद के खिलाफ साझा संकल्प दोहराया था।
फिलहाल, यूक्रेन ने भारत के साथ कानूनी सहयोग संधि के तहत जांच में पूरी मदद करने की बात कही है। कीव ने चेतावनी दी है कि इस संवेदनशील मुद्दे का इस्तेमाल भारत-यूक्रेन के विकसित होते रिश्तों में अविश्वास पैदा करने के लिए नहीं किया जाना चाहिए।












