Dehradun News : शिक्षा माफियाओं की काली कमाई पर चला प्रशासन का हथौड़ा, कॉपी-किताबों की लूट का पर्दाफाश - एक साथ कई दुकानों पर छापेमारी

Dehradun News : शहर में शिक्षा माफियाओं के खिलाफ जिला प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। किताबों और स्टेशनरी की दुकानों पर अनाप-शनाप दाम वसूलने, बिना बिल के सामान बेचने और टैक्स चोरी की शिकायतों के बाद डीएम के निर्देश पर छापेमारी शुरू हो गई है। सिटी मजिस्ट्रेट और तीन एसडीएम की चार टीमों ने एक साथ कई नामी दुकानों पर धावा बोला। अभिभावकों की परेशानी को देखते हुए यह कार्रवाई मुख्यमंत्री के सख्त निर्देशों के बाद की गई है। आइए, जानते हैं इस कार्रवाई की पूरी कहानी।
दुकानों पर छापा, खुली पोल
शहर की मशहूर किताबों की दुकानों जैसे ब्रदर पुस्तक भंडार (सुभाष रोड), नेशनल बुक डिपो (डिस्पेंसरी रोड), और यूनिवर्सल बुक डिपो (राजपुर रोड) पर एक साथ छापेमारी हुई। जांच में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए। इन दुकानों पर किताबें ऊंचे दामों पर बेची जा रही थीं, बिना बिल के सामान दिया जा रहा था, और जीएसटी चोरी का खेल भी सामने आया। कुछ किताबों पर बारकोड तक नहीं था, जो नियमों का खुला उल्लंघन है। यूनिवर्सल बुक हाउस की बिल बुक सीज कर दी गई, और बिना बारकोड वाली किताबों को जब्त कर कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
अभिभावकों की परेशानी बनी वजह
पिछले कुछ समय से अभिभावक कॉपी-किताबों और स्टेशनरी के लिए परेशान थे। शिकायतें मिल रही थीं कि स्कूल और दुकानदार मिलकर ऊंचे दाम वसूल रहे हैं। कई बार तो बच्चों की पढ़ाई के लिए जरूरी सामान खरीदने का दबाव बनाया जाता था। यह शोषण शहर के प्रतिष्ठित स्कूलों और दुकानदारों की मिलीभगत से हो रहा था। अभिभावकों की जेब पर पड़ रहे इस बोझ को कम करने के लिए जिला प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया।
मुख्यमंत्री के निर्देश, माफियाओं पर नकेल
मुख्यमंत्री ने डीएम को साफ निर्देश दिए हैं कि शिक्षा माफियाओं का सफाया होना चाहिए। इसी के तहत यह कार्रवाई शुरू की गई। छापेमारी में अवैध लेनदेन, ओवररेटिंग, और टैक्स चोरी पकड़ी गई। ब्रदर पुस्तक भंडार की दुकान को तब तक बंद रखने का आदेश दिया गया है, जब तक SGST की जांच पूरी नहीं हो जाती। स्टॉक रजिस्टर और बिल बुक जब्त कर संगीन धाराओं में प्राथमिकी भी दर्ज की गई है।
आगे भी जारी रहेगा अभियान
जिला प्रशासन ने साफ कर दिया है कि यह कार्रवाई यहीं नहीं रुकेगी। शिक्षा माफियाओं पर शिकंजा कसने के लिए लगातार कदम उठाए जाएंगे। स्कूलों और दुकानदारों की मिलीभगत को तोड़ने और अभिभावकों को राहत देने के लिए प्रशासन प्रतिबद्ध है। यह कदम न सिर्फ नियमों का पालन सुनिश्चित करेगा, बल्कि बच्चों की पढ़ाई को सस्ता और सुलभ बनाने में भी मदद करेगा।