नई दिल्ली, 04 अप्रैल 2026 (दून हॉराइज़न)। देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी ने वित्तीय वर्ष 2026 का अंत एक ऐतिहासिक आंकड़े के साथ किया है, जिसमें कंपनी ने कुल 24 लाख से अधिक गाड़ियां बेचकर ऑटो सेक्टर में अपनी बादशाहत कायम रखी है।
हालांकि, भारी डिमांड ने कंपनी के लिए नई चुनौतियां भी पेश कर दी हैं। फिलहाल मारुति के पास करीब 1.90 लाख कारों के पेंडिंग ऑर्डर जमा हो चुके हैं, जिससे आने वाले दिनों में ग्राहकों को डिलीवरी के लिए ज्यादा लंबा इंतजार करना पड़ सकता है।
मारुति सुजुकी के मार्केटिंग और सेल्स विभाग के सीनियर एग्जीक्यूटिव ऑफिसर पार्थो बनर्जी ने बाजार की मौजूदा स्थिति पर मुहर लगाई है। बनर्जी के मुताबिक, बाजार में मांग काफी मजबूत है और कोई बड़ी बाधा नजर नहीं आ रही है, लेकिन उत्पादन और लागत के मोर्चे पर कुछ दबाव महसूस किया जा रहा है। मार्च 2026 तक छोटी कारों पर वेटिंग पीरियड लगभग एक महीना था, जो अब पेंडिंग ऑर्डर्स के बोझ तले और बढ़ सकता है।
गुजरात में 10,189 करोड़ का मेगा निवेश
डिमांड और सप्लाई के इस अंतर को पाटने के लिए मारुति सुजुकी ने एक बड़े विस्तार की योजना तैयार की है। कंपनी के बोर्ड ने 24 मार्च 2026 को हुई अहम बैठक में गुजरात के खोराज इंडस्ट्रियल एस्टेट में एक नया मैन्युफैक्चरिंग प्लांट लगाने की हरी झंडी दे दी है। इस प्रोजेक्ट के पहले चरण में कंपनी 10,189 करोड़ रुपये का भारी-भरकम निवेश करेगी।
इस नए प्लांट के जरिए मारुति अपनी सालाना उत्पादन क्षमता में 2.5 लाख यूनिट्स का इजाफा करेगी। गौरतलब है कि कंपनी ने इस फैसले की औपचारिक जानकारी नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) को दे दी है। इस प्लांट में न केवल असेंबली लाइन होगी, बल्कि भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए साझा बुनियादी ढांचा भी तैयार किया जाएगा।
मौजूदा क्षमता और प्रोडक्शन का गणित
फिलहाल मारुति सुजुकी गुरुग्राम, मानेसर, खरखौदा और हंसलपुर के प्लांटों के जरिए सालाना 24 लाख यूनिट्स बनाने की क्षमता रखती है। अधिकतम क्षमता को खींचकर 26 लाख यूनिट्स तक ले जाया जा सकता है। सुजुकी मोटर गुजरात प्राइवेट लिमिटेड के विलय के बाद कंपनी अब अपनी पूरी क्षमता का 100% इस्तेमाल कर रही है। यही वजह है कि खोराज में नया प्लांट लगाना कंपनी की ऑपरेशनल मजबूरी बन गया है।
| प्लांट लोकेशन | मौजूदा/प्रस्तावित क्षमता (सालाना) |
| गुरुग्राम/मानेसर/अन्य | 24 लाख यूनिट्स |
| खोराज (नया प्लांट) | 2.5 लाख यूनिट्स (Phase 1) |
| कुल संभावित क्षमता | 26.5 लाख यूनिट्स+ |
क्या जेब पर पड़ेगा असर?
बढ़ती मांग के बीच ग्राहकों के लिए एक बुरी खबर भी हो सकती है। कच्चे माल की बढ़ती लागत मारुति को कीमतें बढ़ाने पर मजबूर कर रही है। पार्थो बनर्जी ने संकेत दिया है कि कंपनी बहुत जल्द कीमतों की समीक्षा करेगी। अगर लागत का दबाव कम नहीं हुआ, तो इसका सीधा बोझ ग्राहकों की जेब पर डाला जा सकता है। इसमें सबसे ज्यादा असर ऑल्टो, वैगनआर, स्विफ्ट, बलेनो और डिजायर जैसे वॉल्यूम मॉडल्स पर देखने को मिल सकता है।
बाजार में मारुति का मुकाबला हुंडई और टाटा मोटर्स जैसी कंपनियों से लगातार तेज हो रहा है। जहां टाटा अपनी इलेक्ट्रिक रेंज और हुंडई अपनी एसयूवी लाइनअप (क्रेटा/अल्काजार) से दबाव बना रही है, वहीं मारुति अपने 17 मॉडल्स के विशाल पोर्टफोलियो (10 एरिना और 7 नेक्सा) के भरोसे नंबर वन की कुर्सी पर जमी हुई है।











