चमोली, 26 जुलाई 2026 (दून हॉराइज़न)।
Badrinath Donation Scam : उत्तराखंड के प्रसिद्ध बदरीनाथ धाम में चढ़ावा चोरी और हेराफेरी प्रकरण में जिला एवं सत्र न्यायालय चमोली ने सख्त रुख अपनाया है। शनिवार 25 जुलाई 2026 को अदालत ने मामले के मुख्य आरोपी प्रमोद नौटियाल की जमानत याचिका सीधे तौर पर खारिज कर दी। इस आदेश ने आरोपी के जेल से बाहर आने के रास्तों को फिलहाल पूरी तरह बंद कर दिया है।
न्यायालय के इस फैसले के बाद प्रमोद नौटियाल को चमोली जिले की पुरसारी जिला कारागार में ही रखा जाएगा। अगली जमानत याचिका के संबंध में बचाव पक्ष की तरफ से कोई नई तारीख या रणनीति कोर्ट में पेश नहीं की गई। यह स्थिति साफ करती है कि आरोपी को लंबी न्यायिक हिरासत काटनी होगी।
चमोली के पुलिस अधीक्षक सुरजीत सिंह पंवार ने जमानत खारिज होने के पूरे घटनाक्रम की आधिकारिक पुष्टि की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कोर्ट ने आरोपी की बेल अर्जी को नामंजूर कर दिया है। प्रमोद नौटियाल न्यायिक हिरासत की कड़ी शर्तों के तहत जेल प्रशासन की निगरानी में रहेंगे।
एसपी पंवार ने यह भी जोड़ा कि विशेष जांच दल (एसआईटी) चढ़ावा चोरी के अलग-अलग पहलुओं की जांच में जुटी है। एसआईटी हर रोज नए दस्तावेजों का मिलान कर रही है। पुलिस का पूरा फोकस इस बड़े गबन के मास्टरमाइंड और पूरे नेटवर्क की तह तक जाने पर है।
बदरीनाथ धाम के पवित्र चढ़ावे में हेराफेरी का मामला सामने आने के बाद एसआईटी ने सबसे पहली गिरफ्तारी तत्कालीन अध्यक्ष के निजी सचिव प्रमोद नौटियाल की ही की थी। जांच एजेंसी ने प्रारंभिक स्तर पर मिले सीसीटीवी फुटेज को अपना सबसे मजबूत हथियार बनाया। दस्तावेजों और अन्य भौतिक साक्ष्यों के विश्लेषण ने आरोपी को सलाखों के पीछे पहुंचाया।
एसआईटी के पास मौजूद वीडियो साक्ष्यों में आरोपी चढ़ावे की नकदी को सीधे अपनी जेब में खिसकाते हुए कैमरे में कैद हुआ था। इसी पुख्ता सबूत ने गिरफ्तारी का सीधा आधार तैयार किया। 8 जुलाई 2026 को दर्ज हुए इस मुकदमे में पूछताछ के तुरंत बाद नौटियाल को हिरासत में लिया गया था।
कोर्ट में पहली बार पेश किए जाने पर अदालत ने नौटियाल को सीधे 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया था। प्रमोद नौटियाल उस समय बदरी-केदार मंदिर समिति के तत्कालीन अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी के निजी सचिव का पद संभाल रहे थे। उनकी इस पद पर तैनाती ने घोटाले को एक संस्थागत रूप दे दिया था।
जांच की आंच सिर्फ नौटियाल तक सीमित नहीं रही। एसआईटी ने पूर्व मंदिर अधिकारी राजेंद्र चौहान को भी अपने रडार पर लिया। कई घंटों की लंबी और गहन पूछताछ के बाद चौहान को भी मामले में गिरफ्तार कर लिया गया।
राजेंद्र चौहान की गिरफ्तारी के बाद उन्हें भी अदालत में पेश किया गया। कोर्ट ने बिना किसी रियायत के उन्हें भी न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया। आज की तारीख में चढ़ावा चोरी के ये दोनों चेहरे पुरसारी जिला कारागार की सलाखों के पीछे हैं।
एसआईटी की कई टीमें बदरीनाथ धाम के स्टॉक रजिस्टर और चढ़ावा अभिलेखों की परतें खंगाल रही हैं। जब्त किए गए तमाम दस्तावेजों का बारीकी से ऑडिट किया जा रहा है। बदरी-केदार मंदिर समिति में तैनात अन्य कर्मचारियों को भी पूछताछ के लिए लगातार तलब किया जा रहा है।
जांच टीम यह नक्शा तैयार कर रही है कि इस पूरी हेराफेरी के सिंडिकेट में और कौन-कौन से अधिकारी या कर्मचारी शामिल थे। इस चोरी की पूरी कार्यप्रणाली को डिकोड किया जा रहा है। पुलिस द्वारा कोर्ट में पेश की जाने वाली आगे की रिपोर्ट इस मामले के कई अन्य चेहरों को बेनकाब कर सकती है।














