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उत्तराखंड के किसानों के लिए बड़ी खबर, 7 दिन के अंदर बैंक खाते में आएगा रुका हुआ पैसा

दून हॉराइज़न ब्यूरो,
Published by: Harpreet Singh Updated Thu, 13 Aug 2026 07:09 PM IST

उत्तराखंड के कृषि मंत्री गणेश जोशी ने अधिकारियों को किसानों के सभी लंबित भुगतान एक सप्ताह के भीतर चुकाने का सख्त अल्टीमेटम दिया है। देहरादून में हुई समीक्षा बैठक में एप्पल मिशन, पॉलीहाउस निर्माण और कीवी-ड्रैगन फ्रूट जैसी नई फसलों को बढ़ावा देकर किसानों की आय बढ़ाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया।

Agriculture Minister Ganesh Joshi orders release of pending farmer payments in one week

मुख्य बातें

  • कृषि मंत्री ने लंबित भुगतान पर अधिकारियों को 7 दिन दिए
  • वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट का 100% उपयोग जरूरी
  • नाबार्ड के तहत पॉलीहाउस निर्माण कार्यों में तेजी आएगी
  • कीवी और ड्रैगन फ्रूट की खेती से किसानों की आय बढ़ेगी

देहरादून, 13 अगस्त 2026 (दून हॉराइज़न)।

उत्तराखंड के कृषि एवं कृषक कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने विभागीय अधिकारियों को किसानों के रुके हुए पैसों का भुगतान हर हाल में सात दिन के भीतर करने का अल्टीमेटम दिया है। देहरादून में आयोजित एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में उन्होंने स्पष्ट किया कि योजनाओं का पैसा फाइलों में नहीं अटकना चाहिए। यह आदेश उन हजारों किसानों के लिए बड़ी राहत है, जो महीनों से अपने अनुदान और सब्सिडी की राशि का इंतजार कर रहे थे।

देहरादून में हुई इस बैठक में प्रदेश के सभी 13 जिलों के मुख्य उद्यान अधिकारी और कृषि विभाग के तमाम बड़े अफसर मौजूद रहे। मंत्री गणेश जोशी ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए तय किए गए बजट और योजनाओं की जमीनी हकीकत परखी। उन्होंने अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए जवाबदेही तय करने के निर्देश जारी किए हैं।

एप्पल मिशन की जनपदवार प्रगति रिपोर्ट की समीक्षा में कई जिलों का प्रदर्शन धीमा पाया गया। कृषि मंत्री ने अति सघन बागवानी मिशन के तहत सेब के बगीचों के विस्तार की जानकारी तलब की। उन्होंने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए आवंटित बजट का शत-प्रतिशत उपयोग सुनिश्चित करने का कड़ा निर्देश अधिकारियों को दिया है।

सरकारी योजनाओं का लाभ सिर्फ कागजों पर दिखने की पुरानी परंपरा पर मंत्री ने कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि विभाग की हर योजना का सीधा आर्थिक फायदा खेत में पसीना बहा रहे किसान की जेब तक पहुंचना चाहिए। बजट खर्च कर देना ही विभाग की उपलब्धि नहीं मानी जाएगी।

किसानों के लिए सबसे बड़ी परेशानी पॉलीहाउस, एप्पल मिशन और कीवी उत्पादन से जुड़े भुगतानों में आ रही तकनीकी विसंगतियां हैं। बैंक खातों और विभागीय कागजी कार्रवाई में मिसमैच के कारण कई किसानों का पैसा लंबे समय से अटका हुआ है। मंत्री ने इन सभी तकनीकी खामियों को सुधारने के लिए अधिकारियों की एक सप्ताह की समयसीमा तय की है।

भुगतान में हो रही देरी से किसानों का पूरा कृषि चक्र प्रभावित होता है। खाद, बीज और मजदूरी के लिए किसान कर्ज पर निर्भर हो जाते हैं। कृषि मंत्री ने दो टूक शब्दों में कहा है कि किसानों को उनका पैसा समय पर उपलब्ध कराना पूरे विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।

पहाड़ी और मैदानी क्षेत्रों में पारंपरिक खेती से इतर नई नकदी फसलों की तरफ किसानों को मोड़ने की रणनीति भी तैयार की गई है। राज्य में कीवी और ड्रैगन फ्रूट के उत्पादन की अपार व्यावसायिक संभावनाएं मौजूद हैं। इन फसलों की बाजार में भारी मांग और अच्छी कीमत किसानों की आर्थिक स्थिति को पूरी तरह बदल सकती है।

विभागीय अधिकारियों को आदेश दिए गए हैं कि वे अधिक से अधिक संख्या में किसानों को कीवी और ड्रैगन फ्रूट की खेती के प्रति जागरूक करें। शुरुआती दौर में पौधे उपलब्ध कराने से लेकर बाजार तक पहुंच बनाने में विभाग किसानों की सीधी मदद करेगा। फसल विविधीकरण से जंगली जानवरों द्वारा खेती को पहुंचाए जा रहे नुकसान का असर भी कम होगा।

बुआई के समय किसानों को बीज न मिलने की समस्या का मुद्दा भी बैठक में गूंजा। मंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि सब्जियों और अन्य फसलों के उन्नत किस्म के बीज बुआई का सीजन शुरू होने से काफी पहले किसानों के गांवों तक पहुंच जाने चाहिए। बीज के अभाव में किसी भी किसान का खेत खाली नहीं रहना चाहिए।

नाबार्ड योजना के तहत प्रदेश भर में बनाए जा रहे पॉलीहाउस निर्माण की धीमी गति पर भी मंत्री ने रिपोर्ट मांगी। संरक्षित खेती आधुनिक कृषि का सबसे अहम हिस्सा बन चुकी है। पॉलीहाउस में बेमौसमी सब्जियां उगाकर किसान अपनी आमदनी कई गुना बढ़ा सकते हैं, इसलिए निर्माण कार्यों में किसी भी तरह की लेटलतीफी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

मौन पालन (मधुमक्खी पालन) को राज्य में स्वरोजगार का एक बड़ा हथियार बनाने पर विस्तृत चर्चा हुई। पर्वतीय और मैदानी इलाकों की जलवायु मधुमक्खी पालन के लिए बेहद अनुकूल है। युवाओं को इस क्षेत्र से जोड़ने के लिए उन्हें आधुनिक प्रशिक्षण और सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ दिया जाएगा।

बैठक के अंत में मंत्री गणेश जोशी ने सभी योजनाओं की नियमित जमीनी निगरानी की व्यवस्था लागू करने के निर्देश दिए। विभागीय अधिकारी अब केवल ऑफिस में बैठकर वित्तीय आंकड़े तैयार नहीं करेंगे, बल्कि उन्हें गांव-गांव जाकर किसानों से सीधे फीडबैक लेना होगा। योजनाओं का समयबद्ध क्रियान्वयन ही अधिकारियों की परफॉर्मेंस का पैमाना होगा।

Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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