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Chardham Yatra 2026 : आज से शुरू हुए ग्रीन कार्ड, बिना इसके नहीं मिलेगी पहाड़ों पर एंट्री

उत्तराखंड परिवहन विभाग ने सोमवार से चारधाम यात्रा के लिए वाहनों के ग्रीन कार्ड बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। यात्रा के दौरान भारी भीड़ को देखते हुए राज्य में रसोई गैस की किल्लत गहराने की आशंका भी जताई गई है।

Chardham Yatra 2026 : आज से शुरू हुए ग्रीन कार्ड, बिना इसके नहीं मिलेगी पहाड़ों पर एंट्री

HIGHLIGHTS

  • परिवहन मंत्री प्रदीप बत्रा ने हरिद्वार के रोशनाबाद आरटीओ ऑफिस से किया ग्रीन कार्ड सुविधा का आगाज।
  • बिना वैलिड ग्रीन कार्ड के किसी भी कमर्शियल वाहन को यात्रा रूट पर जाने की अनुमति नहीं होगी।
  • यात्रा सीजन और पर्यटन के चलते उत्तराखंड में एलपीजी की मांग 30% तक बढ़ने का अनुमान है।

हरिद्वार। उत्तराखंड में विश्व प्रसिद्ध चारधाम यात्रा (Chardham Yatra 2026) के आगाज से पहले शासन-प्रशासन ने कमर कस ली है। परिवहन विभाग ने सोमवार से तीर्थयात्रियों को ले जाने वाले कमर्शियल वाहनों के लिए अनिवार्य ‘ग्रीन कार्ड’ बनाने की शुरुआत कर दी है। परिवहन मंत्री प्रदीप बत्रा ने हरिद्वार के रोशनाबाद स्थित आरटीओ कार्यालय पहुंचकर इस सुविधा का विधिवत शुभारंभ किया।

विभाग ने शुरुआती चरण में यात्रियों की सुविधा के लिए तीन प्रमुख केंद्रों पर यह व्यवस्था लागू की है। अब तीर्थयात्री हरिद्वार के रोशनाबाद, ऋषिकेश और नारसन बॉर्डर पर स्थित केंद्रों से अपने वाहनों का ग्रीन कार्ड बनवा सकेंगे। परिवहन अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि ग्रीन कार्ड जारी करने से पहले वाहन के फिटनेस सर्टिफिकेट, बीमा, वैध परमिट और चालक के ड्राइविंग लाइसेंस जैसे तमाम दस्तावेजों की बारीकी से पड़ताल की जाएगी।

नियमों के मुताबिक, बिना ग्रीन कार्ड के किसी भी व्यावसायिक वाहन को यात्रा मार्ग पर प्रवेश नहीं दिया जाएगा। इस सख्त चेकिंग का उद्देश्य यात्रा रूट पर होने वाली दुर्घटनाओं को रोकना और अनफिट वाहनों की छंटनी करना है। बता दें कि आगामी 19 अप्रैल से चारधाम यात्रा का औपचारिक आगाज होने जा रहा है, जिसमें इस वर्ष 50 लाख से अधिक श्रद्धालुओं के पहुंचने का बड़ा अनुमान लगाया गया है।

दूसरी ओर, बाबा केदारनाथ के दर्शनों के लिए 22 अप्रैल से शुरू होने वाली यात्रा को लेकर केदारघाटी में युद्धस्तर पर काम चल रहा है। जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और लोक निर्माण विभाग की टीमें पैदल मार्ग पर जमा भारी बर्फ को हटाने में जुटी हैं। श्रद्धालुओं की सुरक्षा को देखते हुए मार्ग को चौड़ा करने और रेलिंग ठीक करने का काम भी अंतिम चरण में है।

पहाड़ों में बढ़ती हलचल के बीच राजधानी देहरादून समेत पूरे प्रदेश में गैस संकट गहराने के संकेत मिल रहे हैं। गर्मी शुरू होते ही मसूरी, ऋषिकेश और चकराता जैसे पर्यटक स्थलों पर भारी भीड़ उमड़ रही है, जिससे होटलों और होम-स्टे में गैस की खपत अचानक बढ़ गई है। विभाग के मुताबिक, यात्रा सीजन के दौरान सिलेंडरों की मांग सामान्य से 20 से 30 प्रतिशत तक ज्यादा रह सकती है।

ऋषिकेश और देहरादून जैसे मुख्य पड़ावों पर स्थित ढाबों और लंगर व्यवस्थाओं के कारण सप्लाई चेन पर भारी दबाव है। यदि वर्तमान में जारी बैकलॉग को समय रहते खत्म नहीं किया गया, तो आम उपभोक्ताओं को घरेलू गैस सिलेंडर के लिए लंबा इंतजार करना पड़ सकता है। गैस एजेंसियों के लिए आने वाले दो महीने आपूर्ति और वितरण के लिहाज से अग्निपरीक्षा साबित होंगे।

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Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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