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Dehradun Rishikesh Highway : पर्यावरण प्रेमियों की हुई जीत, सात मोड़ पर पेड़ों के कटान पर लगी रोक

भानियावाला-ऋषिकेश सिक्स लेन प्रोजेक्ट में 3300 पेड़ों के कटान को सीएम पुष्कर सिंह धामी ने स्थगित कर दिया है। राहुल गांधी से स्थानीय लोगों की मुलाकात के अगले ही दिन सरकार ने यह फैसला लिया।

Dehradun Rishikesh Highway : पर्यावरण प्रेमियों की हुई जीत, सात मोड़ पर पेड़ों के कटान पर लगी रोक

HIGHLIGHTS

  • ऋषिकेश-भानियावाला प्रोजेक्ट में 3 हजार पेड़ों का कटान रुका।
  • सात मोड़ क्षेत्र में अब तक 700 पेड़ कटे हैं।
  • राहुल गांधी ने मामले को संसद में उठाने का आश्वासन दिया।
  • प्रदर्शनकारी इलाके में एलिवेटेड रोड बनाने की मांग कर रहे हैं।

देहरादून, 19 जुलाई 2026 (दून हॉराइज़न)।

Dehradun Rishikesh Highway : डोईवाला के समीप देहरादून-ऋषिकेश सिक्स लेन परियोजना में प्रस्तावित बड़े पैमाने के जंगल कटान को सरकार ने रोक दिया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सात मोड़ क्षेत्र में पेड़ों को काटने की प्रक्रिया को तत्काल प्रभाव से स्थगित करने के निर्देश जारी किए। इस फैसले से पर्यावरण प्रेमियों को बड़ी राहत मिली है। प्रदर्शनकारियों ने इसे अपनी 9 दिन की कठिन मेहनत और जमीनी संघर्ष की जीत करार दिया।

सात मोड़ पर मौजूद प्रदर्शनकारियों की भीड़ में उत्साह के साथ आगे की रणनीति पर चर्चा हो रही थी। आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया कि यह केवल एक अस्थायी स्थगन आदेश है। स्थायी समाधान अभी दूर है। सरकार कभी भी कटान का नया आदेश जारी कर सकती है। आने वाले दिनों में प्रशासन के हर कदम की निगरानी करने के लिए स्थानीय कमेटियां बनाई जा रही हैं।

आंदोलन में शामिल युवती मेघा ने इस सरकारी फैसले के पीछे के राजनीतिक घटनाक्रम को साझा किया। राहुल गांधी का काफिला हाल ही में इसी मार्ग से गुजर रहा था। प्रदर्शनकारियों ने उनके काफिले को रोककर सात मोड़ के जंगलों की बर्बादी का पूरा खाका उनके सामने रखा। राहुल गांधी ने इस पर्यावरणीय विनाश के मुद्दे को सीधे संसद में उठाने का ठोस आश्वासन दिया। मेघा ने दावा किया कि राहुल गांधी से इस मुलाकात के ठीक अगले दिन मुख्यमंत्री पुष्कर धामी को पेड़ कटान रोकने की घोषणा करनी पड़ी।

स्थानीय महिला शालू ने सरकार की मंशा पर गहरे सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि कटान पूरी तरह से रद्द नहीं हुआ है, प्रशासन ने सिर्फ वक्त खरीदा है। प्रदर्शनकारियों की मुख्य तकनीकी मांग एलिवेटेड सड़क के निर्माण की है। घने जंगल के बीच से सड़क चौड़ी करने के बजाय पिलर पर एलिवेटेड हाईवे बनाया जाना चाहिए। इससे वन्यजीवों की आवाजाही भी सुरक्षित रहेगी और पेड़ों की जड़ें भी सलामत रहेंगी।

कांग्रेस जिलाध्यक्ष मोहित उनियाल ने अब तक हुए नुकसान का कच्चा चिट्ठा खोला। ठेकेदारों ने सात मोड़ क्षेत्र में 700 से अधिक विशाल पेड़ों को पहले ही जमीन पर गिरा दिया है। करीब डेढ़ साल पहले 2025 की शुरुआत में ही स्थानीय लोगों को इस सिक्स लेन परियोजना के विनाशकारी स्वरूप की भनक लग गई थी। विरोध स्वरूप लोगों ने पेड़ों पर रक्षा सूत्र बांधे थे। एक विशाल पेड़ सिर्फ लकड़ी नहीं होता, वह अपने आप में एक पूरा इकोसिस्टम है। मॉनसून के इस समय पक्षियों का प्रजनन काल चरम पर होता है और प्रशासन ने घोसलों से लदे पेड़ों पर आरियां चला दीं।

उत्तराखंड की देवभूमि वाली पहचान और प्रकृति पूजा के महत्व को स्थानीय लोगों ने इस आंदोलन का आधार बनाया। पहाड़ों में प्रकृति और मानव जीवन का सीधा संबंध है। विकास के नाम पर हरियाली की सामूहिक हत्या यहां के निवासियों को स्वीकार नहीं है। नियमों और वन अधिनियमों को ताक पर रखकर बिना किसी उचित भरपाई योजना के यह कटान शुरू किया गया था। स्थानीय ग्रामीणों ने दिन-रात पहरा देकर ठेकेदारों की मशीनों को जंगल में घुसने से रोका।

सामाजिक संगठनों ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार स्थानीय विरोध को पूरी तरह नजरअंदाज कर रही थी। मामला राष्ट्रीय स्तर के विपक्षी नेताओं के संज्ञान में आने के बाद ही देहरादून में बैठे अधिकारियों ने दबाव महसूस किया। कई संगठनों के प्रतिनिधियों ने राहुल गांधी को उनके हस्तक्षेप के लिए धन्यवाद दिया। अब यह सभी संगठन कोर्ट का दरवाजा खटखटाने की कानूनी रणनीति तैयार कर रहे हैं।

ऋषिकेश से भानियावाला के बीच का यह पूरा हिस्सा हाथियों का एक अति संवेदनशील कॉरिडोर है। सरकारी दस्तावेजों में ही 3,300 से अधिक पेड़ों को काटने के लिए लाल निशान लगाए गए थे। हाथी और अन्य जंगली जानवरों का यह सदियों पुराना प्राकृतिक रास्ता है। सड़क के इस बेतरतीब चौड़ीकरण से जानवरों का रहन-सहन और उनकी दिनचर्या पूरी तरह तबाह हो जाएगी। मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं इस इलाके में तेजी से बढ़ेंगी।

Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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