दून हॉराइज़न, देहरादून (21 सितंबर) : राजधानी की सत्ता के गलियारों में रविवार को उस वक्त अजीब स्थिति पैदा हो गई, जब विपक्षी दल नहीं बल्कि खुद सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं ने अपनी ही सरकार के कैबिनेट मंत्री का घेराव कर दिया। यमुना कॉलोनी स्थित समाज कल्याण मंत्री खजानदास के आवास के बाहर अचानक शुरू हुए इस हंगामे ने संगठन से लेकर सरकार तक में हलचल मचा दी।
कार्यकर्ताओं ने आरोप जड़ा कि चकराता विधानसभा क्षेत्र में विकास कार्यों की बंदरबांट हुई है और कार्यकर्ताओं की अनदेखी कर कांग्रेस समर्थकों को तरजीह दी गई। तीखे आरोपों से आहत मंत्री ने यहां तक कह डाला कि यदि उन पर कमीशनखोरी का एक भी आरोप साबित हुआ, तो वे पद छोड़ देंगे और जान दे देंगे।
यमुना कॉलोनी में धरना और कमीशनखोरी के गंभीर आरोप
रविवार दोपहर करीब 12 बजे यमुना कॉलोनी में गहमागहमी बढ़ गई। पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष मधु चौहान के नेतृत्व में वरिष्ठ भाजपा नेता मूरत राम शर्मा, प्रताप राव, गीताराम गौड़ और कमलेश भट्ट समेत कई प्रमुख पदाधिकारी मंत्री आवास के गेट पर धरने पर बैठ गए।
प्रदर्शनकारियों का सीधा आरोप था कि क्षेत्र में 15 से 20 फीसदी कमीशन लेकर विपक्षी खेमे के प्रस्तावों को धड़ल्ले से स्वीकृति दी गई। मधु चौहान ने कहा कि 11 सितंबर को स्वीकृत स्पेशल कम्पोनेंट प्लान (SCP) और ट्राइबल सब प्लान (TSP) के तहत लगभग 80 प्रतिशत काम कांग्रेस समर्थकों की झोली में डाल दिए गए। कार्यकर्ताओं का कहना है कि जब तक यह विवादित सूची रद्द नहीं की जाती, उनका विरोध जारी रहेगा।
‘आरोप साबित हों तो फांसी लगा लूं’ – मंत्री का कड़ा रुख

अपने ही घर के मुख्य द्वार पर अपनी ही पार्टी के कार्यकर्ताओं के इस तेवर से मंत्री हतप्रभ रह गए। पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने बेहद आहत स्वर में कहा कि पूरे प्रदेश के 95 ब्लॉकों का संतुलित विकास उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि समाज कल्याण और अनुसूचित जनजाति बाहुल्य क्षेत्र होने के चलते चकराता को नियमानुसार सबसे अधिक वित्तीय बजट आवंटित किया गया है। कालसी ब्लॉक को भी चकराता से कम बजट मिला है, जबकि पौड़ी और चमोली जैसे पर्वतीय जिलों से समय पर प्रस्ताव न मिलने से वहां फंड नहीं गया। उन्होंने कहा कि कुछ लोग चाहते हैं कि सिर्फ उनकी निजी पसंद के प्रस्ताव मंजूर हों, जो प्रशासनिक नियमों के तहत मुमकिन नहीं।
चकराता का सियासी गणित और संगठन में असहजता

यह पूरा बवाल सिर्फ एक विकास सूची तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे जौनसार बावर की जटिल राजनीति भी है। चकराता सीट दशकों से कांग्रेस का अभेद्य किला रही है, जहां पूर्व नेता प्रतिपक्ष प्रीतम सिंह लगातार जीतते रहे हैं। यहां तक कि स्थानीय ब्लॉक प्रमुख और जिला पंचायत स्तर पर भी कांग्रेस का दबदबा रहा है।
भाजपा लंबे समय से इस आदिवासी आरक्षित सीट (ST Seat) पर सेंध लगाने की रणनीति बना रही थी। धरने का नेतृत्व कर रहीं मधु चौहान खुद यहां से चुनाव लड़ चुकी हैं और उनके पति मुन्ना सिंह चौहान पड़ोस की विकासनगर सीट से भाजपा विधायक हैं।
ऐसे में चुनाव से पहले अपनों के इस टकराव ने प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के लिए असहज स्थिति खड़ी कर दी है। मंत्री के साथ पहले दौर की बातचीत बेनतीजा रहने के बाद अब यह प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री से मिलकर पूरी बात रखने जा रहा है।










