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Haldwani News : हल्द्वानी के गौलापार में बड़ा हादसा, पानी की टंकी में उतरे मां और दो बेटों की जहरीली गैस से मौत

हल्द्वानी के गौलापार क्षेत्र के मानपुर गांव में एक बेहद दुखद घटना सामने आई है। यहां घर के पास बने पानी के टैंक की शटरिंग खोलते समय जहरीली गैस की चपेट में आने से मां और उनके दो बेटों की मौत हो गई।

Haldwani News : हल्द्वानी के गौलापार में बड़ा हादसा, पानी की टंकी में उतरे मां और दो बेटों की जहरीली गैस से मौत

HIGHLIGHTS

  • मानपुर गांव में पानी के टैंक में शटरिंग खोलते समय हादसा हुआ।
  • जहरीली गैस के कारण मां और दो बेटों की जान चली गई।
  • डॉ. सुशीला तिवारी अस्पताल में तीनों को मृत घोषित किया गया।
  • मृतकों में सरस्वती देवी, उनके बेटे धर्मेंद्र और खुशाल शामिल हैं।

हल्द्वानी, 22 जुलाई 2026 (दून हॉराइज़न)।

Haldwani News : हल्द्वानी के गौलापार क्षेत्र में मंगलवार शाम एक बेहद दर्दनाक हादसा हो गया। मानपुर गांव में घर के पास बने पानी के टैंक की शटरिंग खोलने के दौरान जहरीली गैस की चपेट में आने से मां और उनके दो बेटों की मौत हो गई। एक-दूसरे को बचाने के चक्कर में तीनों बारी-बारी से टैंक के भीतर उतरे और दम घुटने से बेहोश हो गए। अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने तीनों को मृत घोषित कर दिया।

मूल रूप से नैनीताल जिले के ओखलकांडा के रहने वाले बिष्ट परिवार का हालिया निवास चोरगलिया थाना क्षेत्र के मानपुर गौलापार में है। 59 वर्षीय सरस्वती देवी का परिवार मुख्य रूप से खेती-किसानी पर निर्भर था। उनके परिवार ने करीब एक महीने पहले घर के आंगन में पानी जमा करने के लिए एक टैंक बनवाया था।

मंगलवार शाम करीब छह बजे सरस्वती का बड़ा बेटा 38 वर्षीय धर्मेंद्र सिंह बिष्ट टैंक का ढक्कन खोलकर शटरिंग निकालने नीचे उतरा था। धर्मेंद्र मुख्य रूप से कृषि कार्य करता था और कभी-कभी प्लंबर का काम भी देखता था। शटरिंग की लकड़ी की बल्ली हिलाते समय ऊपर से अचानक मलबा उसके सिर पर गिर गया।

धर्मेंद्र के बाहर न आने पर उसका छोटा भाई 34 वर्षीय खुशाल सिंह बिष्ट नीचे उतरा। खुशाल सितारगंज के सिडकुल क्षेत्र की एक निजी कंपनी में बिजली से जुड़ा काम करता था। टैंक के भीतर बनी जहरीली गैस के कारण खुशाल भी तुरंत बेहोश हो गया।

दोनों भाइयों के काफी देर तक बाहर न आने पर उनकी 59 वर्षीय मां सरस्वती देवी परेशान होकर टैंक में उतर गईं। गैस का असर इतना तेज था कि वह भी भीतर उतरते ही बेहोश हो गईं।

आसपास के लोगों को घटना का पता तब चला जब नजदीक में सब्जी बेचने वाले एक व्यक्ति ने उन्हें काफी देर तक गायब देखा। इसके बाद आसपास के ग्रामीणों को सूचना दी गई। ग्रामीणों और परिजनों ने कड़ी मशक्कत के बाद तीनों को टैंक से बाहर निकाला।

घटना के तुरंत बाद तीनों को डॉ. सुशीला तिवारी अस्पताल ले जाया गया। अस्पताल के ईएमओ डॉ. मोहित ने बताया कि रात करीब 8.40 बजे तीनों को अस्पताल लाया गया था। जांच के बाद डॉक्टरों ने तीनों को मृत घोषित कर दिया।

हादसे की सूचना मिलते ही एसओ चोरगलिया तारा सिंह राणा पुलिस टीम के साथ अस्पताल पहुंचे। पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर आगे की कागजी कार्रवाई शुरू कर दी है।

इस हादसे ने बिष्ट परिवार को पूरी तरह तोड़कर रख दिया है। परिवार में अब कोई कमाने वाला सदस्य नहीं बचा है। धर्मेंद्र और खुशाल की मौत के बाद उनकी पत्नियों और छोटे बच्चों के सामने आजीविका का बड़ा संकट खड़ा हो गया है।

मृतक खुशाल बिष्ट का एक बच्चा है, जबकि उसकी पत्नी फिलहाल छह माह की गर्भवती है। इस भीषण दुखद खबर से बेखबर पत्नी को अभी तक पति की मौत की जानकारी नहीं दी गई है। वहीं बड़े भाई धर्मेंद्र के दो बच्चे हैं, जिनमें एक बेटा और एक बेटी शामिल हैं, जिनकी उम्र करीब सात से आठ साल है।

विशेषज्ञों के अनुसार, सेप्टिक टैंक, सीवर लाइन, मैनहोल या लंबे समय से बंद पड़े भूमिगत टैंकों में जैविक कचरा सड़ने से हाइड्रोजन सल्फाइड, मीथेन और कार्बन डाइऑक्साइड जैसी गैसें बन जाती हैं। इनमें हाइड्रोजन सल्फाइड बेहद खतरनाक होती है जो चंद पलों में इंसान को बेहोश कर देती है, जबकि कार्बन डाइऑक्साइड ऑक्सीजन के स्तर को खत्म कर दम घोंट देती है। सुरक्षा उपकरणों के बिना ऐसे टैंकों में उतरना जानलेवा साबित होता है।

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Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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