चंडीगढ़। चंडीगढ़ और पूरे हरियाणा राज्य में दोपहिया वाहनों पर लग रहे भारी प्रदूषण (पीयूसी) चालान ने आम जनता की परेशानी बढ़ा दी है। सिरसा की सांसद कुमारी सैलजा ने 10,000 रुपये तक के इस चालान को तर्कसंगत बनाने की जोरदार मांग उठाई है। उनका स्पष्ट मानना है कि छोटी स्कूटी और मोटरसाइकिल पर इतना बड़ा जुर्माना आम और मध्यम वर्ग के लोगों पर भारी आर्थिक बोझ डाल रहा है।
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से किया पत्राचार
इस गंभीर मुद्दे को लेकर सांसद कुमारी सैलजा ने सीधे केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी को पत्र लिखा। उन्होंने अपनी कड़ी आपत्ति दर्ज कराते हुए कहा कि मोटर वाहन अधिनियम के तहत निर्धारित 10,000 रुपये का चालान भारी वाहनों के लिए तो उचित हो सकता है। मगर दोपहिया वाहनों के लिए यह प्रावधान पूरी तरह से असंगत प्रतीत होता है।
गडकरी का जवाब और राज्य सरकार के अधिकार
कुमारी सैलजा के पत्र पर संज्ञान लेते हुए केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने अपने जवाब में अवगत कराया कि अधिनियम में 10,000 रुपये जुर्माने की केवल अधिकतम सीमा तय की गई है। मोटर वाहन अधिनियम की धारा 200 के तहत हरियाणा सरकार इस अपराध को कंपाउंड कर सकती है। राज्य सरकार अपनी अधिसूचना के अनुसार जुर्माने की राशि को कम या अपने स्तर पर तय करने का अधिकार रखती है।
हरियाणा सरकार से जुर्माने में कटौती की मांग
केंद्रीय मंत्री का जवाब मिलने के बाद अब कुमारी सैलजा ने हरियाणा के मुख्यमंत्री के सामने अपनी नई मांग रखी है। उन्होंने सुझाव दिया है कि राज्य सरकार वाहन की इंजन क्षमता (सीसी) के अनुसार चालान की राशि तय करे। 100 से 150 सीसी तक की स्कूटी और मोटरसाइकिल के लिए पीयूसी जुर्माना महज 500 से 1000 रुपये के बीच सीमित किया जाना चाहिए। पर्यावरण संरक्षण के नाम पर आम नागरिकों की जेब पर अनावश्यक बोझ डालना जनहित में नहीं है।











