चंडीगढ़, 05 अप्रैल 2026 (दून हॉराइज़न)। हरियाणा में गेहूं की सरकारी खरीद शुरू होते ही सियासत की तपिश बढ़ गई है। पूर्व उपमुख्यमंत्री और जेजेपी नेता दुष्यंत चौटाला ने प्रदेश की सैनी सरकार पर सीधा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि आज भाजपा की ‘डबल इंजन’ सरकार की गलत नीतियों के कारण किसान दोहरी मार झेल रहा है। चौटाला ने चेतावनी दी कि सरकार की मंशा मंडियों और किसानी व्यवस्था को खत्म करने की लग रही है।
हरियाणा की 416 मंडियों में इस बार व्यवस्था पूरी तरह पटरी से उतरी नजर आ रही है। दुष्यंत ने कहा कि पिछले चार दिनों से मंडियों में गेहूं की खरीद नामात्र हुई है। सरकार ने ‘मेरी फसल-मेरा ब्यौरा’ पोर्टल और नए बायोमेट्रिक नियमों के नाम पर किसानों को उलझा दिया है। खेतों में फसल पककर तैयार है और आसमान में बादल छाए हुए हैं, लेकिन मंडियों में गेट पास के लिए किसानों को घंटों इंतजार करना पड़ रहा है।
इस बार सरकार ने मंडियों को ‘जियो-फेंस्ड’ (Geo-fenced) कर दिया है, जिससे बिना तय लोकेशन के कोई भी प्रक्रिया पूरी नहीं हो पा रही है। दुष्यंत चौटाला ने इसी तकनीकी पेंच पर सवाल उठाते हुए कहा कि वेरिफिकेशन और अंगूठे की मैचिंग जैसे नियम किसानों के लिए जी का जंजाल बन गए हैं। उन्होंने कहा कि जो किसान ट्रैक्टर पर बिना नंबर प्लेट के आ रहे हैं या किराये के वाहन ला रहे हैं, उन्हें गेट पास देने में प्रशासन आनाकानी कर रहा है।
दुष्यंत ने आरोप लगाया कि सरकार नमी के नाम पर किसानों की जेब काट रही है। तय नियमों के मुताबिक 12% से कम नमी पर खरीद होनी चाहिए, लेकिन मंडियों में नमी मापने के बहाने समर्थन मूल्य में अवैध रूप से कटौती की जा रही है। उन्होंने कहा कि एक तरफ मौसम की मार से ओलावृष्टि और बरसात ने फसल को नुकसान पहुंचाया है, वहीं दूसरी तरफ सरकार मुआवजे की फाइलें दबाए बैठी है।
पूर्व डिप्टी सीएम ने भाजपा को उसका पुराना वादा याद दिलाते हुए कहा कि आय दोगुनी करने की बातें करने वाले अब लाचार किसान को देखना भी पसंद नहीं कर रहे। उन्होंने मांग की कि सरकार तुरंत बायोमेट्रिक की अनिवार्यता में ढील दे और बरसात से प्रभावित किसानों को बिना देरी के मुआवजा जारी करे। दुष्यंत के मुताबिक, अगर व्यवस्था नहीं सुधरी तो मंडियों में आक्रोश का विस्फोट होना तय है।








