श्रीनगर, 05 अप्रैल 2026 (दून हॉराइज़न)। चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान ने भविष्य की युद्ध चुनौतियों को लेकर भारतीय सेना को एक नया और कड़ा रणनीतिक मंत्र दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि युद्ध लड़ने के पारंपरिक तरीकों में अब क्रांतिकारी बदलाव आ चुका है और अब केवल अपनी-अपनी विशिष्ट सीमाओं (Domains) में रहकर जंग नहीं जीती जा सकती।
जनरल चौहान ने श्रीनगर स्थित चिनार कॉर्प्स के अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि सेना को अब ‘डोमेन-सेंट्रिक अप्रोच’ का मोह त्याग कर ‘मल्टी-डोमेन ऑपरेशन्स’ की ओर तेजी से कदम बढ़ाने होंगे। उनका इशारा साफ था कि जमीन, हवा और समुद्र के साथ-साथ अब साइबर, स्पेस और कॉग्निटिव डोमेन का एकीकरण ही जीत का आधार बनेगा।
सीडीएस ने उत्तरी कश्मीर में नियंत्रण रेखा (LOC) से सटे रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इलाकों का सघन दौरा किया। उन्होंने वहां तैनात फॉर्मेशन की ऑपरेशनल तैयारियों को खुद जांचा और सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की। बारामूला में उन्हें भविष्य की सैन्य शक्ति के अनुप्रयोग (Future Force Application) और सेना में नई तकनीकों के समावेश के बारे में विस्तृत ब्रीफिंग दी गई।

प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) के अनुसार, जनरल चौहान ने जोर देकर कहा कि हमें एक ऐसा मजबूत और एकीकृत आर्किटेक्चर विकसित करना होगा, जहां सभी विंग्स बिना किसी बाधा के एक-दूसरे के साथ तालमेल बिठा सकें। उन्होंने भविष्य की लड़ाइयों के लिए जॉइंट ट्रेनिंग को युद्ध स्तर पर तेज करने और सिद्धांतों में गहरा तालमेल बिठाने की वकालत की।
सीडीएस ने उभरती वैश्विक चुनौतियों का डटकर सामना करने के लिए एक दूरदर्शी रोडमैप पेश करने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि यह रोडमैप इनोवेशन, सामूहिक प्रयासों और पूरे देश की शक्ति (Whole of Nation Approach) पर आधारित होना चाहिए। जनरल चौहान ने सैनिकों से प्रोफेशनल एक्सीलेंस बनाए रखने और ‘जॉइंटमैनशिप’ को महज एक नीति नहीं बल्कि अपनी जीवनशैली का हिस्सा बनाने का आह्वान किया।
अपनी इस यात्रा के दौरान जनरल चौहान ने केवल सैन्य अधिकारियों से ही नहीं, बल्कि बारामूला में नागरिक प्रशासन के प्रतिनिधियों और स्थानीय गणमान्य व्यक्तियों से भी संवाद किया। उन्होंने राष्ट्र निर्माण के कार्यों और स्थानीय सुरक्षा परिदृश्य में उनके योगदान का भी फीडबैक लिया, ताकि सुरक्षा और विकास के बीच एक मजबूत संतुलन बना रहे।










