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श्रीनगर-जम्मू हाईवे पर सफर करने वाले हो जाएं अलर्ट, रामबन में भारी भूस्खलन के बाद थमे पहिए

रामबन के पास भूस्खलन और पत्थर गिरने के कारण श्रीनगर-जम्मू राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-44) पर यातायात पूरी तरह ठप हो गया है। प्रशासन ने यात्रियों को मार्ग साफ होने तक यात्रा न करने और केवल आधिकारिक सूचना पर भरोसा करने की सख्त हिदायत दी है।

श्रीनगर-जम्मू हाईवे पर सफर करने वाले हो जाएं अलर्ट, रामबन में भारी भूस्खलन के बाद थमे पहिए

HIGHLIGHTS

  • रामबन जिले में करोल ब्रिज और चंदरकोट के बीच भूस्खलन से दोनों तरफ का ट्रैफिक रुका।
  • घाटी में एलपीजी, मटन और पोल्ट्री जैसे जरूरी सामानों की सप्लाई पर संकट।
  • फल उत्पादकों को नुकसान से बचाने के लिए उत्तरी रेलवे जल्द शुरू कर सकता है मालगाड़ी सेवा।

श्रीनगर, 06 अप्रैल (दून हॉराइज़न)। जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-44) पर सोमवार को कुदरत का कहर टूटने से यातायात व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। रामबन जिले के पास अचानक हुए भारी भूस्खलन और पहाड़ों से गिरते पत्थरों ने घाटी को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ने वाली इस एकमात्र सड़क लाइफलाइन पर ब्रेक लगा दिया है।

यातायात विभाग के अधिकारियों ने पुष्टि की है कि करोल ब्रिज और चंदरकोट के बीच सड़क का एक बड़ा हिस्सा मलबे की चपेट में आ गया है। इसके चलते जम्मू से श्रीनगर और श्रीनगर से जम्मू, दोनों दिशाओं में वाहनों की आवाजाही को तत्काल प्रभाव से रोक दिया गया है।

प्रशासन ने एडवाइजरी जारी कर यात्रियों को सख्त हिदायत दी है कि जब तक NH-44 की मरम्मत का काम पूरा नहीं हो जाता, वे इस मार्ग पर सफर करने का जोखिम न उठाएं। विभाग ने लोगों से सोशल मीडिया पर फैलने वाली अफवाहों से बचने और घर से निकलने से पहले कंट्रोल रूम से ताजा स्थिति की जानकारी लेने की अपील की है।

घाटी के लिए यह मार्ग सामरिक और आर्थिक रूप से रीढ़ की हड्डी माना जाता है। हालांकि अब जम्मू और कश्मीर के बीच रेल संपर्क बहाल हो चुका है, लेकिन एलपीजी सिलेंडर, मटन, चिकन और अन्य जरूरी खाद्य सामग्री की आपूर्ति के लिए ट्रक आज भी इसी राजमार्ग का इस्तेमाल करते हैं।

सड़क मार्ग अवरुद्ध होने का सबसे बड़ा खतरा घाटी के बागवानी उद्योग पर मंडरा रहा है। साल 2025 में हाईवे के बार-बार बंद होने की वजह से कश्मीर के फल उत्पादकों को करोड़ों का नुकसान झेलना पड़ा था, क्योंकि सेब और अन्य फलों से लदे ट्रक हफ्तों तक रास्ते में फंसे रहे थे।

इस बार स्थिति से निपटने के लिए उत्तरी रेलवे के अधिकारियों ने फल विक्रेताओं और अन्य हितधारकों के साथ उच्च स्तरीय बैठक की है। योजना है कि इस साल घाटी से फलों के परिवहन के लिए विशेष मालगाड़ियां चलाई जाएं। अगर पार्सल सेवा सुचारू रूप से शुरू होती है, तो यह कश्मीरी बागवानी के लिए एक संजीवनी साबित होगी।

सुरंगों और नए फ्लाईओवर बनने से श्रीनगर-जम्मू के बीच की दूरी अब 10 घंटे से घटकर महज 5 घंटे रह गई है। इसके बावजूद, रामसू और रामबन के बीच का हिस्सा आज भी इस हाईवे का सबसे कमजोर लिंक बना हुआ है। जरा सी बारिश यहां कीचड़ और मलबे का सैलाब ले आती है, जो आधुनिक इंजीनियरिंग पर भारी पड़ता नजर आता है।


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Satpreet Singh

सतप्रीत सिंह 'दून हॉराइज़न' में जम्मू-कश्मीर मामलों के विशेषज्ञ और रिपोर्टर के तौर पर कार्यरत हैं। घाटी के सुरक्षा हालातों, सीमा पार की हलचल, आतंकवाद विरोधी अभियानों और स्थानीय राजनीति पर उनका गहरा अध्ययन है। संवेदनशील क्षेत्र होने के कारण, सतप्रीत हमेशा आधिकारिक बयानों और पुख्ता सबूतों पर ही भरोसा करते हैं। उनकी तथ्यपरक (Fact-based) और संतुलित रिपोर्टिंग अफवाहों को रोककर देशवासियों तक कश्मीर की बिल्कुल सही और ग्राउंड-ज़ीरो तस्वीर पेश करती है। पत्रकारिता के प्रति उनका यह जिम्मेदार रवैया उन्हें एक बेहद अथॉरिटेटिव आवाज़ बनाता है।

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