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Kishtwar Encounter : घायल होकर भी नहीं हारा टाइसन, जैश के आतंकियों का ऐसे मिटाया नामोनिशान

दून हॉराइज़न ब्यूरो,
Published by: Rajat Sharma Updated Mon, 23 Feb 2026 10:57 PM IST

जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ में सेना ने जैश-ए-मोहम्मद के 3 आतंकियों को ढेर कर दिया। इस सफल ऑपरेशन का असली हीरो सेना का बहादुर डॉग 'टाइसन' रहा, जिसने अपनी जान जोखिम में डालकर आतंकियों के ठिकाने का पता लगाया। मुठभेड़ के दौरान घायल होने के बावजूद टाइसन ने सटीक लोकेशन बताकर सैनिकों की जान बचाई।

Kishtwar Encounter : घायल होकर भी नहीं हारा टाइसन, जैश के आतंकियों का ऐसे मिटाया नामोनिशान

मुख्य बातें

  1. किश्तवाड़ के छात्रु इलाके में सेना और जैश आतंकियों के बीच भीषण मुठभेड़ हुई।
  2. सेना के K-9 योद्धा 'टाइसन' ने आतंकियों के छिपे होने के ठिकाने (ढोक) की पहचान की।
  3. ऑपरेशन के दौरान टाइसन के पैर में गोली लगी, जिसे एयरलिफ्ट कर उधमपुर अस्पताल भेजा गया।
  4. टाइसन ने हाल ही में जैश आतंकी आदिल को मार गिराने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

Kishtwar Encounter : जम्मू संभाग के किश्तवाड़ जिले के अंतर्गत आने वाले छात्रु इलाके में भारतीय सेना ने एक बड़े ऑपरेशन के दौरान जैश-ए-मोहम्मद के तीन खूंखार आतंकवादियों को मार गिराया है। इस सैन्य कार्रवाई में सुरक्षाबलों ने मौके से भारी मात्रा में घातक हथियार और गोला-बारूद भी बरामद किया है। किश्तवाड़ के दुर्गम और घने जंगलों में चलाए गए इस सफल अभियान का मुख्य आकर्षण ‘स्पेशल साइलेंट वॉरियर’ टाइसन रहा। टाइसन ने अपनी सूझबूझ से उन तीन आतंकियों के सटीक ठिकाने का पता लगाया जो पत्थरों और झाड़ियों के पीछे छिपकर सेना पर हमले की फिराक में थे।

टाइसन ने निभाया अपना फर्ज

ऑपरेशन के दौरान के-9 ट्रूपर टाइसन आतंकियों की गोलीबारी की चपेट में आकर घायल हो गया, लेकिन उसने अपना साहस नहीं खोया। सुबह लगभग 11 बजे सेना की 2 पैरा स्पेशल फोर्स का यह एलीट जर्मन शेफर्ड कुत्ता उस ढोक तक पहुंच गया था जहां आतंकी छिपे बैठे थे। टाइसन के ठीक पीछे उसके हैंडलर और पैरा कमांडो की टीम चल रही थी। जैसे ही आतंकियों ने हलचल देखी, उन्होंने अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी।

पैर में गोली लगने पर भी डिगा नहीं साहस

आतंकवादियों द्वारा चलाई गई गोलियों में से एक गोली टाइसन के अगले दाएं पैर में जा लगी। घायल होने के बाद भी टाइसन ने पीछे हटने के बजाय आतंकियों की लोकेशन अपने साथियों को स्पष्ट कर दी। घायल टाइसन को तुरंत वहां से सुरक्षित निकाला गया और इसके साथ ही घेराबंदी कर आतंकियों को खत्म करने की कार्रवाई तेज कर दी गई। यदि टाइसन समय रहते आतंकियों को न खोजता, तो वे छिपकर जवानों को बड़ा नुकसान पहुंचा सकते थे।

एयरलिफ्ट कर पहुंचाया गया अस्पताल

गंभीर रूप से घायल टाइसन की स्थिति को देखते हुए सेना ने उसे तुरंत हेलीकॉप्टर के जरिए उधमपुर स्थित आर्मी अस्पताल एयरलिफ्ट किया। सैन्य सूत्रों के अनुसार, अस्पताल में टाइसन की स्थिति अब सामान्य बनी हुई है और विशेषज्ञ डॉक्टर उसकी देखभाल कर रहे हैं। टाइसन इस पूरे क्षेत्र में आतंकवाद विरोधी अभियानों में एक महत्वपूर्ण स्तंभ की भूमिका निभा रहा है।

आतंकी आदिल के खात्मे में भी थी भूमिका

सर्च ऑपरेशन के दौरान आतंकियों के हाइडआउट और विस्फोटक सामग्री ढूंढने में माहिर टाइसन ने कुछ दिन पहले ही जैश के आतंकी आदिल को ठिकाने लगाने में मदद की थी। उसने सुरक्षाबलों के साथ सबसे आगे रहकर आदिल के गुप्त ठिकाने का पता लगाया था। जम्मू-कश्मीर में के-9 दस्ते के कुत्ते लगातार आतंकियों के आईईडी और घुसपैठ के मंसूबों को नाकाम कर रहे हैं।

फैंटम की शहादत का गौरवशाली इतिहास

भारतीय सेना के इन जांबाज कुत्तों को बेहद कठिन ट्रेनिंग दी जाती है ताकि वे कठिन परिस्थितियों में सैनिकों की जान बचा सकें। इससे पहले वर्ष 2024 में अखनूर सेक्टर में 4 साल का बेल्जियन मेलिनोइस डॉग ‘फैंटम’ आतंकवादियों से लोहा लेते हुए शहीद हो गया था। फैंटम के बलिदान की वजह से ही सेना तब भी तीन आतंकियों को मार गिराने में सफल रही थी। टाइसन की बहादुरी ने एक बार फिर डोगरा धरती पर सेना के इन मूक योद्धाओं के प्रति सम्मान बढ़ा दिया है।

Rajat Sharma

रजत शर्मा 'दून हॉराइज़न' में लीड बिज़नेस एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड्स, क्रिप्टोकरेंसी और सरकारी आर्थिक नीतियों को कवर करने में उनका लंबा और जमीनी अनुभव है। रजत की सबसे बड़ी खासियत जटिल आर्थिक आंकड़ों और मार्केट ट्रेंड्स को सरल, आम बोलचाल की हिंदी में डिकोड करना है। वे तथ्य-आधारित (Fact-based) और गहराई से रिसर्च की गई स्टोरीज लिखते हैं, ताकि आम निवेशक और व्यापारी सही वित्तीय फैसले ले सकें। रजत की पत्रकारिता हमेशा सत्य, निष्पक्षता और पाठकों के आर्थिक हितों को प्राथमिकता देते हुए आगे बढ़ती है।

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