कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से पहले राजनीतिक समीकरण तेजी से बदलते नजर आ रहे हैं। तृणमूल कांग्रेस (TMC) से निष्कासित विधायक हुमायूं कबीर ने अपनी नई पार्टी ‘आम जनता उन्नयन पार्टी’ (AJUP) के जरिए सत्ताधारी दल के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। कबीर ने साफ कर दिया है कि वह राज्य की 182 सीटों पर उम्मीदवार उतारेंगे और इसमें असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM भी उनकी साझीदार होगी।
हुमायूं कबीर ने मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद की तर्ज पर एक भव्य मस्जिद निर्माण के मुद्दे को हवा देकर ध्रुवीकरण की राजनीति को गरमा दिया है। उन्होंने दावा किया कि मुस्लिम समुदाय के भीतर राजनीतिक प्रतिनिधित्व को लेकर भारी असंतोष है।
कबीर के मुताबिक, राज्य में करीब 30% मुस्लिम मतदाता होने के बावजूद TMC ने इस बार केवल 47 मुस्लिम उम्मीदवारों को टिकट दिया है, जबकि यह संख्या कम से कम 90 होनी चाहिए थी।
रणनीतिक रूप से कबीर ने ममता बनर्जी को उनके ही घर में घेरने की तैयारी की है। उन्होंने भवानीपुर सीट से पूनम बेगम को उम्मीदवार घोषित किया है, जहां ममता बनर्जी का मुकाबला बीजेपी के शुभेंदु अधिकारी से होना तय माना जा रहा है। कबीर खुद मुर्शिदाबाद की दो सीटों, रेजिनगर और नाओदा से चुनाव लड़ेंगे।
उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि अगर उनकी पार्टी सरकार बनाने की स्थिति में आती है, तो राज्य को पहला मुस्लिम मुख्यमंत्री मिलेगा, अन्यथा वह खुद उपमुख्यमंत्री पद की मांग करेंगे।
ताजा आंकड़ों और जमीनी विश्लेषण से पता चलता है कि मालदा, मुर्शिदाबाद और उत्तर दिनाजपुर जैसे मुस्लिम बहुल जिलों में TMC की पकड़ को कमजोर करने के लिए AJUP और AIMIM का यह गठबंधन एक बड़ा खतरा बन सकता है। 2021 में TMC ने मुर्शिदाबाद की 22 में से 20 सीटें जीती थीं, लेकिन कबीर का दावा है कि इस बार मतदाता उनके ‘बाबरी मस्जिद’ वाले भावनात्मक मुद्दे के साथ जुड़ रहे हैं।










