Bengal Election 2026 : पश्चिम बंगाल की सत्ता से ममता बनर्जी को बेदखल करने के लिए भाजपा ने इस बार अपनी रणनीति में आमूलचूल बदलाव किया है। पार्टी ने राज्य की 294 सीटों पर कब्जा जमाने के लिए केंद्रीय मंत्रियों और मुख्यमंत्रियों सहित 50 कद्दावर नेताओं को मैदान में उतारने का फैसला किया है।
इस बार चुनाव आठ के बजाय महज दो चरणों (23 अप्रैल और 29 अप्रैल) में सिमट गया है। भाजपा नेतृत्व का मानना है कि छोटा चुनाव होने से तृणमूल कांग्रेस को अपनी मशीनरी का फायदा उठाने और अंतिम क्षणों में नैरेटिव बदलने का मौका नहीं मिलेगा।
पार्टी के रणनीतिकारों ने पिछले चुनाव की गलतियों से सबक लेते हुए ‘दीदी’ जैसे व्यक्तिगत प्रहारों से दूरी बना ली है। सूत्रों के मुताबिक, इस बार पीएम मोदी विकास और केंद्रीय योजनाओं के चेहरे होंगे, जबकि गृह मंत्री अमित शाह माइक्रो-मैनेजमेंट की कमान संभालेंगे।
शाह ने खुद तीन-चौथाई जिलों में सीधे प्रचार और संगठन की जिम्मेदारी ली है। उनके साथ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, असम के सीएम हिमंत बिस्वा सरमा और मध्य प्रदेश के सीएम मोहन यादव जैसे फायरब्रांड नेता उन सीटों पर पसीना बहाएंगे जहां ध्रुवीकरण और विकास बड़े मुद्दे हैं।
इस चुनाव में सबसे बड़ा ‘एक्स-फैक्टर’ मतदाता सूची का ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ (SIR) बनकर उभरा है। हालिया आंकड़ों के अनुसार, इस प्रक्रिया के बाद बंगाल में मतदाताओं की संख्या 7.66 करोड़ से घटकर 7.04 करोड़ रह गई है।
करीब 1.2 करोड़ नामों के हटने या सुधार होने से उन 85 मुस्लिम बहुल सीटों पर मुकाबला दिलचस्प हो गया है, जिन्हें टीएमसी का गढ़ माना जाता था। भाजपा इन सीटों पर ‘फर्जी मतदान’ रोकने के लिए बूथ स्तर पर ‘डेथ ऑडिट’ और कड़ा पहरा देने की तैयारी में है।

मतुआ समुदाय और जंगलमहल के आदिवासी इलाकों में पैठ बनाने के लिए सीएए (CAA) को बड़ा हथियार बनाया जा रहा है। हालांकि, ठाकुरनगर के ठाकुर परिवार में मचे आंतरिक कलह ने भाजपा की चिंता भी बढ़ाई है।
पार्टी को उम्मीद है कि मतुआ बहुल नदिया और उत्तर 24 परगना में नागरिकता का मुद्दा टीएमसी के वोट बैंक में बड़ी सेंध लगाएगा। 4 मई को आने वाले नतीजे तय करेंगे कि भाजपा का यह ‘साइलेंट और रणनीतिक’ प्रहार बंगाल में ‘परिवर्तन’ ला पाता है या नहीं।









