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तेल-गैस सप्लाई पर सरकार की पैनी नजर, प्राइवेट कंपनियों को भी देना होगा पल-पल का हिसाब

पश्चिम एशिया में युद्ध के चलते गहराते ऊर्जा संकट के बीच भारत सरकार ने तेल और गैस से जुड़े आंकड़ों को 'राष्ट्रीय सुरक्षा' का मामला घोषित कर दिया है। अब सभी निजी और सरकारी पेट्रोलियम कंपनियों के लिए अपने भंडार, आयात और खपत की वास्तविक जानकारी सरकार के साथ साझा करना अनिवार्य होगा।

तेल-गैस सप्लाई पर सरकार की पैनी नजर, प्राइवेट कंपनियों को भी देना होगा पल-पल का हिसाब

HIGHLIGHTS

  • पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस (सूचना प्रदान करना) आदेश, 2026 तत्काल प्रभाव से लागू।
  • होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के बंद होने से भारत की 88% कच्चा तेल निर्भरता पर खतरा।
  • आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत सरकार को मिला डेटा पर पूर्ण नियंत्रण।

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच जारी भीषण युद्ध ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा के सामने गंभीर चुनौती खड़ी कर दी है। इसके मद्देनजर केंद्र सरकार ने गुरुवार को एक कड़ा रुख अपनाते हुए देश की ऊर्जा संबंधी तमाम जानकारियों को ‘राष्ट्रीय सुरक्षा मामला’ (National Security Matter) घोषित कर दिया।

अब रिलायंस और नायरा जैसी निजी रिफाइनरियों सहित सभी एलएनजी आयातकों और गैस वितरकों को अपने डेटा की गोपनीयता छोड़कर सरकार को हर जानकारी देनी होगी।

पेट्रोलियम मंत्रालय द्वारा जारी 18 मार्च की अधिसूचना के अनुसार, ‘पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस (सूचना प्रदान करना) आदेश, 2026’ के तहत अब कंपनियों के लिए उत्पादन, आयात और स्टॉक लेवल का हिसाब देना अनिवार्य है।

यह आदेश पेट्रोलियम योजना और विश्लेषण प्रकोष्ठ (PPAC) को वास्तविक समय में आंकड़े उपलब्ध कराने का रास्ता साफ करता है। सरकार का यह फैसला उन पुराने नियमों को खत्म करता है जो अब तक कंपनियों को कुछ व्यावसायिक डेटा गुप्त रखने की अनुमति देते थे।

भारत की चिंता का सबसे बड़ा कारण सामरिक भौगोलिक चुनौतियां हैं। युद्ध की वजह से होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से होने वाली आपूर्ति लगभग ठप है, जबकि यहीं से भारत का 50% से अधिक कच्चा तेल और 95% एलपीजी आती थी।

हालांकि, भारत ने अपनी रणनीति बदलते हुए रूस, लैटिन अमेरिका और पश्चिम अफ्रीका से तेल की खरीद तेज कर दी है। ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, रूस अब भारत का सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता बना हुआ है, जो खाड़ी देशों से होने वाली कमी की भरपाई कर रहा है।

सरकारी अधिकारियों का कहना है कि डेटा का यह केंद्रीकरण केवल निगरानी के लिए नहीं, बल्कि आपात स्थिति में बिजली और उर्वरक जैसे प्राथमिकता वाले क्षेत्रों को निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए है। आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 की शक्तियों का उपयोग करते हुए सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि राष्ट्रहित में आपूर्ति श्रृंखला की पारदर्शिता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

कंपनियों को अब अपनी रिपोर्टिंग प्रणाली को अत्याधुनिक बनाना होगा ताकि वैश्विक झटकों का असर कम से कम हो।


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Shailendra Pokhriyal

शैलेन्द्र पोखरियाल 'दून हॉराइज़न' में वरिष्ठ राष्ट्रीय संवाददाता के तौर पर देश की सियासत और प्रमुख राष्ट्रीय घटनाओं को कवर करते हैं। केंद्र सरकार की नीतियों, संसद के सत्रों और बड़े राजनीतिक घटनाक्रमों पर उनकी गहरी पकड़ है। शैलेन्द्र का उद्देश्य राजनीतिक बयानों और सरकारी फैसलों के पीछे की असली सच्चाई को निष्पक्ष रूप से पाठकों के सामने रखना है। उनका लंबा पत्रकारीय अनुभव उन्हें जटिल राष्ट्रीय मुद्दों का आसान हिंदी में विश्लेषण करने में मदद करता है। वे पूरी तरह से शोध-आधारित (Fact-checked) और जनहित से जुड़ी बेबाक पत्रकारिता करने के लिए जाने जाते हैं।

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