कोलंबो। हिंद महासागर में श्रीलंका के तट के पास ईरानी युद्धपोत आईआरआईएस देना (IRIS Dena) के डूबने के बाद शुरू हुई भू-राजनीतिक हलचल अब एक बड़े ‘इंफॉर्मेशन वॉर’ में तब्दील हो गई है। हालिया जांच और ओपेन सोर्स इंटेलिजेंस (OSINT) रिपोर्टों ने खुलासा किया है कि इस घटना की आड़ में पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ एक सुनियोजित और जहरीला दुष्प्रचार अभियान चलाया।
4 मार्च को जब अमेरिकी पनडुब्बी ‘यूएसएस शार्लोट’ (USS Charlotte) ने गाले तट से 19 नॉटिकल मील दूर ईरानी फ्रिगेट को निशाना बनाया, तो उसके चंद घंटों के भीतर ही सोशल मीडिया पर भारत विरोधी हैशटैग की बाढ़ आ गई। पाकिस्तानी नेटवर्क ने यह झूठ फैलाया कि विशाखापत्तनम में नौसैनिक अभ्यास (MILAN 2026) से लौट रहे इस जहाज की सटीक लोकेशन भारत ने अमेरिका के साथ साझा की थी।
पाकिस्तान का ‘प्रोपेगैंडा मॉडल’ हुआ फेल
इंटेलिजेंस असेसमेंट के मुताबिक, इस अभियान की शुरुआत @TacticalTribun नामक एक हैंडल से हुई थी, जिसका इतिहास बार-बार यूजरनेम बदलकर भ्रम फैलाने का रहा है। जांच में पाया गया कि इस अफवाह को हवा देने वाले लगभग 100 मुख्य अकाउंट्स में से 40% पाकिस्तानी मूल के थे। इन्होंने महज कुछ घंटों में 500 से ज्यादा पोस्ट किए ताकि ईरान और अन्य मुस्लिम देशों की नजर में भारत की छवि को नुकसान पहुंचाया जा सके।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह हमला रणनीतिक रूप से भी ऐतिहासिक था। पेंटागन ने आधिकारिक तौर पर पुष्टि की है कि ‘मार्क 48’ हैवीवेट टॉरपीडो का इस्तेमाल कर इसे डुबोया गया। यह हमला इतना सटीक था कि आईआरआईएस देना पर मौजूद 180 लोगों में से 84 की मौत हो गई और जहाज महज 3 मिनट के भीतर समुद्र में समा गया।
श्रीलंका ने अमेरिका को दिखाया ‘नो एंट्री’ का बोर्ड

इस तनावपूर्ण माहौल के बीच श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमार दिसानायके ने संसद में बड़ा खुलासा किया। उन्होंने बताया कि कोलंबो ने अपनी तटस्थता (Neutrality) बनाए रखने के लिए जिबूती से आ रहे दो अमेरिकी लड़ाकू विमानों को ‘मत्ताला इंटरनेशनल एयरपोर्ट’ पर उतरने की अनुमति नहीं दी। अमेरिका चाहता था कि उसके विमान एंटी-शिप मिसाइलों के साथ वहां तैनात रहें, लेकिन श्रीलंका ने इसे ठुकरा दिया।
भारत ने इस पूरे संकट के दौरान मानवीय दृष्टिकोण अपनाया है। जहां पाकिस्तान झूठ फैलाने में व्यस्त था, वहीं भारत ने एक अन्य ईरानी जहाज ‘आईआरआईएस बुशहर’ और उसके चालक दल को सहायता प्रदान की। विशाखापत्तनम से लौटने के बाद भारत की कोई परिचालन जिम्मेदारी नहीं थी, फिर भी भारत ने तकनीकी खराबी झेल रहे ईरानी जहाजों के लिए अपनी सुविधाएं खुली रखीं, जो पाकिस्तान के दावों को पूरी तरह खारिज करता है।









