नई दिल्ली। ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच छिड़ी जंग ने अब दुनिया की डिजिटल धमनियों को निशाने पर ले लिया है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य और लाल सागर के नीचे बिछा फाइबर ऑप्टिक केबलों का विशाल जाल इस समय सबसे नाजुक स्थिति में है। सुरक्षा विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि समुद्र के नीचे होने वाली कोई भी छोटी सी तोड़फोड़ दुनिया को ‘डिजिटल पाषाण युग’ में धकेल सकती है।
ताजा खुफिया रिपोर्टों के मुताबिक, ईरान ने हॉर्मुज के संकरे रास्तों में समुद्री सुरंगें (Sea Mines) बिछा दी हैं। यह वही इलाका है जहां से भारत की महत्वपूर्ण Tata-TGN Gulf और AAE-1 जैसी केबलें गुजरती हैं। विशेष रूप से 2026 में लॉन्च होने वाले ‘2Africa Pearls’ जैसे मेगा प्रोजेक्ट्स पर काम रुक गया है क्योंकि ठेकेदार कंपनियों ने सुरक्षा कारणों से ‘फोर्स मेज्योर’ (Force Majeure) लागू कर दिया है।
भारत के लिए यह स्थिति बेहद चिंताजनक है क्योंकि हमारे देश का लगभग 33% वेस्टबाउंड इंटरनेट ट्रैफिक इन्हीं रास्तों से होकर यूरोप और अमेरिका पहुंचता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि हॉर्मुज में केबल कटती है, तो इसका असर केवल धीमी स्पीड तक सीमित नहीं रहेगा। SWIFT और CHIPS जैसे अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग मैसेजिंग सिस्टम प्रभावित होने से विदेशी मुद्रा लेनदेन और स्टॉक मार्केट में भारी गिरावट आ सकती है।
हॉर्मुज के सबसे संकरे हिस्से में समुद्र की गहराई महज 200 फीट है। इतनी कम गहराई पर केबलों को किसी पनडुब्बी की जरूरत नहीं है; उन्हें साधारण लंगर (Anchor) या जानबूझकर की गई तोड़फोड़ से आसानी से काटा जा सकता है। लाल सागर में पहले ही हूती विद्रोहियों के हमलों के कारण मरम्मत करने वाले जहाजों का पहुंचना बंद हो गया है। बीमा कंपनियों ने इस क्षेत्र में केबल रिपेयर जहाजों का कवर देने से साफ मना कर दिया है, जिससे एक बार केबल कटने पर महीनों तक इंटरनेट बहाल नहीं हो पाएगा।
गूगल, माइक्रोसॉफ्ट और अमेज़न ने खाड़ी देशों में जो विशाल डेटा सेंटर बनाए हैं, वे पूरी तरह इन्हीं केबलों पर टिके हैं। यदि युद्ध लंबा खिंचता है, तो क्लाउड आधारित सेवाएं और एआई टूल्स का इस्तेमाल करने वाली भारतीय आईटी कंपनियों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। फिलहाल, वैकल्पिक रास्तों (जैसे अफ्रीका के रास्ते) से डेटा भेजने की कोशिश की जा रही है, लेकिन इससे इंटरनेट की लेटेंसी (Latency) इतनी बढ़ जाएगी कि रियल-टाइम बैंकिंग और वीडियो कॉलिंग जैसे काम लगभग नामुमकिन हो जाएंगे।









