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सिर्फ तेल ही नहीं, अब आपके इंटरनेट और बैंकिंग ट्रांजैक्शन पर भी मंडरा रहा है संकट

मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच हॉर्मुज और लाल सागर के नीचे बिछी इंटरनेट केबलों पर हमले का खतरा बढ़ गया है। यदि ये केबलें क्षतिग्रस्त होती हैं, तो भारत सहित दुनियाभर में बैंकिंग, क्लाउड सेवाएं और एआई (AI) कामकाज पूरी तरह ठप हो सकते हैं।

सिर्फ तेल ही नहीं, अब आपके इंटरनेट और बैंकिंग ट्रांजैक्शन पर भी मंडरा रहा है संकट

HIGHLIGHTS

  • हॉर्मुज और लाल सागर से गुजरने वाली 20 से अधिक केबलें वैश्विक इंटरनेट डेटा का करीब 30% हिस्सा संभालती हैं।
  • भारत का एक-तिहाई वेस्टबाउंड इंटरनेट ट्रैफिक इन्ही समुद्री रास्तों पर निर्भर है, जो अब सीधे युद्ध क्षेत्र में हैं।
  • मरम्मत करने वाले जहाजों (Cable Repair Ships) के लिए बीमा और सुरक्षा न मिलने के कारण खराबी ठीक करना नामुमकिन हो गया है।

नई दिल्ली। ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच छिड़ी जंग ने अब दुनिया की डिजिटल धमनियों को निशाने पर ले लिया है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य और लाल सागर के नीचे बिछा फाइबर ऑप्टिक केबलों का विशाल जाल इस समय सबसे नाजुक स्थिति में है। सुरक्षा विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि समुद्र के नीचे होने वाली कोई भी छोटी सी तोड़फोड़ दुनिया को ‘डिजिटल पाषाण युग’ में धकेल सकती है।

ताजा खुफिया रिपोर्टों के मुताबिक, ईरान ने हॉर्मुज के संकरे रास्तों में समुद्री सुरंगें (Sea Mines) बिछा दी हैं। यह वही इलाका है जहां से भारत की महत्वपूर्ण Tata-TGN Gulf और AAE-1 जैसी केबलें गुजरती हैं। विशेष रूप से 2026 में लॉन्च होने वाले ‘2Africa Pearls’ जैसे मेगा प्रोजेक्ट्स पर काम रुक गया है क्योंकि ठेकेदार कंपनियों ने सुरक्षा कारणों से ‘फोर्स मेज्योर’ (Force Majeure) लागू कर दिया है।

भारत के लिए यह स्थिति बेहद चिंताजनक है क्योंकि हमारे देश का लगभग 33% वेस्टबाउंड इंटरनेट ट्रैफिक इन्हीं रास्तों से होकर यूरोप और अमेरिका पहुंचता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि हॉर्मुज में केबल कटती है, तो इसका असर केवल धीमी स्पीड तक सीमित नहीं रहेगा। SWIFT और CHIPS जैसे अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग मैसेजिंग सिस्टम प्रभावित होने से विदेशी मुद्रा लेनदेन और स्टॉक मार्केट में भारी गिरावट आ सकती है।

हॉर्मुज के सबसे संकरे हिस्से में समुद्र की गहराई महज 200 फीट है। इतनी कम गहराई पर केबलों को किसी पनडुब्बी की जरूरत नहीं है; उन्हें साधारण लंगर (Anchor) या जानबूझकर की गई तोड़फोड़ से आसानी से काटा जा सकता है। लाल सागर में पहले ही हूती विद्रोहियों के हमलों के कारण मरम्मत करने वाले जहाजों का पहुंचना बंद हो गया है। बीमा कंपनियों ने इस क्षेत्र में केबल रिपेयर जहाजों का कवर देने से साफ मना कर दिया है, जिससे एक बार केबल कटने पर महीनों तक इंटरनेट बहाल नहीं हो पाएगा।

गूगल, माइक्रोसॉफ्ट और अमेज़न ने खाड़ी देशों में जो विशाल डेटा सेंटर बनाए हैं, वे पूरी तरह इन्हीं केबलों पर टिके हैं। यदि युद्ध लंबा खिंचता है, तो क्लाउड आधारित सेवाएं और एआई टूल्स का इस्तेमाल करने वाली भारतीय आईटी कंपनियों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। फिलहाल, वैकल्पिक रास्तों (जैसे अफ्रीका के रास्ते) से डेटा भेजने की कोशिश की जा रही है, लेकिन इससे इंटरनेट की लेटेंसी (Latency) इतनी बढ़ जाएगी कि रियल-टाइम बैंकिंग और वीडियो कॉलिंग जैसे काम लगभग नामुमकिन हो जाएंगे।


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Shailendra Pokhriyal

शैलेन्द्र पोखरियाल 'दून हॉराइज़न' में वरिष्ठ राष्ट्रीय संवाददाता के तौर पर देश की सियासत और प्रमुख राष्ट्रीय घटनाओं को कवर करते हैं। केंद्र सरकार की नीतियों, संसद के सत्रों और बड़े राजनीतिक घटनाक्रमों पर उनकी गहरी पकड़ है। शैलेन्द्र का उद्देश्य राजनीतिक बयानों और सरकारी फैसलों के पीछे की असली सच्चाई को निष्पक्ष रूप से पाठकों के सामने रखना है। उनका लंबा पत्रकारीय अनुभव उन्हें जटिल राष्ट्रीय मुद्दों का आसान हिंदी में विश्लेषण करने में मदद करता है। वे पूरी तरह से शोध-आधारित (Fact-checked) और जनहित से जुड़ी बेबाक पत्रकारिता करने के लिए जाने जाते हैं।

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