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Supreme Court AI Petition : सुप्रीम कोर्ट में याचिका देखकर भड़के CJI सूर्यकांत, कही ये बड़ी बात

नई दिल्ली स्थित सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने एक अस्पष्ट याचिका को खारिज करते हुए कड़ी फटकार लगाई है। उन्होंने कहा कि ऐसे मसौदों को देखने के बाद याचिकाओं के कानून को अब भगवान ही बचा सकता है। इसके साथ ही, शीर्ष अदालत ने वकीलों द्वारा याचिकाएं तैयार करने में 'आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस' (AI) के बढ़ते इस्तेमाल और कोर्ट में फर्जी मुकदमों का हवाला देने की प्रवृत्ति पर भी गंभीर चिंता जाहिर की है।

Supreme Court AI Petition : सुप्रीम कोर्ट में याचिका देखकर भड़के CJI सूर्यकांत, कही ये बड़ी बात

HIGHLIGHTS

  1. मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने अस्पष्ट याचिका को सुनने से साफ इनकार कर दिया।
  2. सीजेआई ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा- "भगवान याचिकाओं के कानून को बचाए।"
  3. सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाएं तैयार करने में एआई (AI) के इस्तेमाल को पूरी तरह अनुचित बताया।
  4. कोर्ट में 'मर्सी बनाम मैनकाइंड' जैसे अस्तित्वहीन मुकदमों का फर्जी हवाला देने पर जजों ने सख्त नाराजगी जताई।

नई दिल्ली, 19 फरवरी 2026। (Supreme Court AI Petition) नई दिल्ली स्थित सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को एक सुनवाई के दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत एक अस्पष्ट याचिका को देखकर भड़क गए। उन्होंने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि याचिकाओं के कानून को अब भगवान ही बचाए। इसके साथ ही उन्होंने याचिकाकर्ता को जमकर फटकार लगाई और उस जनहित याचिका को सिरे से खारिज कर दिया। अदालत ने इस सख्त कदम के पीछे याचिका में स्पष्टता की भारी कमी को मुख्य वजह बताया है।

CJI ने जताई सख्त नाराजगी

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने इस जनहित याचिका (PIL) पर किसी भी तरह की सुनवाई करने से साफ इनकार कर दिया। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि याचिका का मसौदा पूरी तरह से अस्पष्ट और भ्रामक था। इस दौरान सीजेआई ने कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि अगर देश के सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष याचिकाओं का यह स्तर पहुंच गया है, तो फिर भगवान ही याचिका के कानून को बचाए।

AI के इस्तेमाल पर गंभीर चिंता

इससे पहले मंगलवार को भी सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाओं का मसौदा तैयार करने में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते इस्तेमाल पर गहरी चिंता जाहिर की थी। सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ शिक्षाविद रूप रेखा वर्मा की एक जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी। पीठ ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि कुछ वकीलों द्वारा एआई का उपयोग करना बेहद परेशान करने वाला और पूरी तरह से अनुचित कदम है।

फर्जी मुकदमों का चौंकाने वाला हवाला

सुनवाई के दौरान जस्टिस नागरत्ना ने चौंकाने वाला खुलासा करते हुए बताया कि उन्हें ‘मर्सी बनाम मैनकाइंड’ नाम का एक ऐसा मामला मिला, जिसका वास्तविकता में कोई अस्तित्व ही नहीं है। इसी तरह सीजेआई ने भी बताया कि जस्टिस दीपांकर दत्ता की अदालत में ऐसे कई फर्जी फैसलों का हवाला दिया गया था। जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि ऐसे फर्जी उद्धरणों से जजों पर सत्यापन का अतिरिक्त बोझ पड़ता है। जस्टिस बागची ने भी कानूनी मसौदे की गिरती गुणवत्ता पर दुख जताया।


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Shailendra Pokhriyal

शैलेन्द्र पोखरियाल 'दून हॉराइज़न' में वरिष्ठ राष्ट्रीय संवाददाता के तौर पर देश की सियासत और प्रमुख राष्ट्रीय घटनाओं को कवर करते हैं। केंद्र सरकार की नीतियों, संसद के सत्रों और बड़े राजनीतिक घटनाक्रमों पर उनकी गहरी पकड़ है। शैलेन्द्र का उद्देश्य राजनीतिक बयानों और सरकारी फैसलों के पीछे की असली सच्चाई को निष्पक्ष रूप से पाठकों के सामने रखना है। उनका लंबा पत्रकारीय अनुभव उन्हें जटिल राष्ट्रीय मुद्दों का आसान हिंदी में विश्लेषण करने में मदद करता है। वे पूरी तरह से शोध-आधारित (Fact-checked) और जनहित से जुड़ी बेबाक पत्रकारिता करने के लिए जाने जाते हैं।

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