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Weather Update : महाराष्ट्र के इन जिलों में अगले 48 घंटे भारी, ओलावृष्टि और 50km की रफ्तार से चलेंगी हवाएं

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने विदर्भ और मराठवाड़ा के कई जिलों में गरज-चमक के साथ बेमौसमी बारिश और ओलावृष्टि का अलर्ट जारी किया है। अगले 24 से 48 घंटों के दौरान 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली हवाएं फसलों और बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा सकती हैं।

Weather Update : महाराष्ट्र के इन जिलों में अगले 48 घंटे भारी, ओलावृष्टि और 50km की रफ्तार से चलेंगी हवाएं

HIGHLIGHTS

  • विदर्भ और मराठवाड़ा के 15 से अधिक जिलों में 21 मार्च तक यलो अलर्ट प्रभावी।
  • नागपुर, चंद्रपुर और गडचिरोली में ओलावृष्टि (Hailstorm) की प्रबल संभावना।
  • बेमौसमी बदलाव से रबी फसलों, खासकर गेहूं और आम के बागों पर संकट।

Weather Update : महाराष्ट्र के पूर्वी और मध्य हिस्सों में भीषण गर्मी के बीच मौसम ने अचानक करवट ली है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने विदर्भ और मराठवाड़ा के अधिकांश जिलों के लिए ‘यलो अलर्ट’ जारी करते हुए अगले 48 घंटों में भारी उथल-पुथल की चेतावनी दी है। अरब सागर से आ रही नमी और मध्य भारत के ऊपर बने ट्रफ लाइन के प्रभाव से इस क्षेत्र में 30 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने और बिजली गिरने की आशंका है।

नागपुर स्थित क्षेत्रीय मौसम केंद्र (RMC) के अनुसार, विशेष रूप से गडचिरोली, चंद्रपुर, गोंदिया, भंडारा और नागपुर में स्थिति गंभीर हो सकती है। इन क्षेत्रों में न केवल हल्की से मध्यम बारिश होगी, बल्कि छिटपुट स्थानों पर ओले गिरने की भी संभावना है। मराठवाड़ा के बीड, धाराशिव, लातूर और छत्रपति संभाजीनगर जैसे जिलों में भी धूल भरी आंधी और गरज के साथ बौछारें पड़ने का अनुमान है।

यह मौसमी बदलाव उत्तर-पश्चिमी भारत में सक्रिय हो रहे पश्चिमी विक्षोभ और दक्षिण-पूर्वी हवाओं के मिलन का परिणाम है। ऐतिहासिक आंकड़ों पर नजर डालें तो मार्च के महीने में विदर्भ में इस तरह की ‘थंडरस्टॉर्म एक्टिविटी’ (Thunderstorm Activity) सामान्य से अधिक दर्ज की जा रही है, जो जलवायु परिवर्तन के स्थानीय प्रभावों की ओर इशारा करती है। पिछले पांच वर्षों में मार्च के दौरान बेमौसमी बारिश की आवृत्ति में लगभग 15% की वृद्धि देखी गई है।

किसानों के लिए यह समय अत्यंत चुनौतीपूर्ण है क्योंकि रबी की फसलें कटाई के अंतिम चरण में हैं। गेहूं, ज्वार और दलहन के साथ-साथ संतरे और आम के बागों को ओलावृष्टि से भारी नुकसान हो सकता है। कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी है कि यदि फसल पक चुकी है, तो उसे तुरंत सुरक्षित स्थानों पर ले जाएं। खुले में रखे अनाज को तिरपाल से ढकने और बिजली कड़कने के दौरान पेड़ों के नीचे शरण न लेने की सख्त हिदायत दी गई है।

प्रशासन ने शहरी इलाकों में भी सतर्कता बरतने को कहा है। तेज हवाओं के कारण कमजोर हो चुके होर्डिंग्स, बिजली के खंभे और पुराने पेड़ों के गिरने का खतरा बना रहता है। मौसम विभाग का अनुमान है कि यह अस्थिरता 21 मार्च की शाम तक बनी रहेगी। इसके बाद, 22 मार्च से आसमान साफ होने और तापमान में दोबारा 3 से 5 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी होने की संभावना है, जिससे लू (Loo) जैसी स्थिति वापस लौट सकती है।


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Shailendra Pokhriyal

शैलेन्द्र पोखरियाल 'दून हॉराइज़न' में वरिष्ठ राष्ट्रीय संवाददाता के तौर पर देश की सियासत और प्रमुख राष्ट्रीय घटनाओं को कवर करते हैं। केंद्र सरकार की नीतियों, संसद के सत्रों और बड़े राजनीतिक घटनाक्रमों पर उनकी गहरी पकड़ है। शैलेन्द्र का उद्देश्य राजनीतिक बयानों और सरकारी फैसलों के पीछे की असली सच्चाई को निष्पक्ष रूप से पाठकों के सामने रखना है। उनका लंबा पत्रकारीय अनुभव उन्हें जटिल राष्ट्रीय मुद्दों का आसान हिंदी में विश्लेषण करने में मदद करता है। वे पूरी तरह से शोध-आधारित (Fact-checked) और जनहित से जुड़ी बेबाक पत्रकारिता करने के लिए जाने जाते हैं।

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