देहरादून, 23 जुलाई, 2026 (दून हॉराइज़न)।
Paper Leak Protest : दिल्ली की सड़कों पर पेपर लीक के मुद्दे को लेकर जारी विरोध प्रदर्शनों पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कड़ा रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री ने साफ शब्दों में कहा कि यह पूरा आंदोलन अब केवल परीक्षार्थियों की समस्याओं तक सीमित नहीं रहा। इसके पीछे बाकायदा एक सोची-समझी राजनीतिक रणनीति काम कर रही है।
कुछ विशिष्ट राजनीतिक समूह अपनी रोटियां सेकने के लिए अभ्यर्थियों के कंधों का इस्तेमाल कर रहे हैं। युवाओं को मोहरा बनाकर अपने छिपे हुए राजनीतिक मकसद साधे जा रहे हैं। अगर यह प्रदर्शन केवल अभ्यर्थियों की वास्तविक मांगों और चिंताओं को लेकर होता तो स्थिति बिल्कुल अलग होती। जिस तरीके से पूरे मामले को मोड़कर राजनीतिक रंग दिया जा रहा है, उसने इस आंदोलन के पीछे की नीयत और वास्तविक उद्देश्यों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार द्वारा उठाए गए हालिया कदम का पुरजोर समर्थन किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरफ से पेपर लीक जैसे संगीन मामलों की सुनवाई के लिए विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित करने की बात कही गई है। धामी ने इस घोषणा को देश के करोड़ों युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने वाला दूरदर्शी फैसला बताया।
केंद्र सरकार का यह कदम साबित करता है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता लाने के लिए प्रशासन पूरी तरह गंभीर है। फास्ट ट्रैक कोर्ट की स्थापना से मुकदमों का निपटारा महीनों और सालों में लटकने के बजाय तेजी से हो सकेगा। दोषियों को बिना किसी देरी के सख्त से सख्त सजा मिलेगी, जिससे भविष्य में ऐसी हरकतें करने वालों के मन में खौफ पैदा होगा।
उत्तराखंड के भीतर राज्य सरकार द्वारा भर्ती घोटालों पर चलाए गए बुलडोजर का जिक्र करते हुए सीएम ने कड़ा संदेश दिया। राज्य में अब तक धांधली और पेपर लीक में लिप्त 100 से ज्यादा रसूखदार आरोपियों को दबोचकर सलाखों के पीछे धकेला जा चुका है।
सख्त कानून और सख्त कार्रवाई के दम पर प्रदेश में पूरी तरह पारदर्शी परीक्षा प्रणाली लागू की गई है। इसी निष्पक्ष प्रक्रिया के बल पर हाल के दिनों में हजारों योग्य और मेहनती युवाओं को बिना किसी सिफारिश के सरकारी नौकरियां हासिल हुई हैं।
सरकार प्रदेश के युवाओं के अधिकारों की सुरक्षा और पारदर्शी भर्ती चक्र के लिए अंतिम सांस तक प्रतिबद्ध है। धांधली करने वाले गिरोहों और उनके आकाओं के खिलाफ आगे भी बिना किसी ढिलाई के कड़े कदम उठाए जाते रहेंगे। ईमानदारी से दिन-रात पढ़ाई करने वाले अभ्यर्थियों के हकों पर डाका डालने की इजाजत किसी को नहीं दी जाएगी।











