Phone Cooling Technology : अगर आप 40-50 हजार रुपये खर्च करके कोई हाई-एंड स्मार्टफोन खरीदते हैं और आधे घंटे की 4K वीडियो शूटिंग या बीजीएमआई (BGMI) गेमिंग के दौरान हैंडसेट हाथ जला देने वाली भट्टी की तरह तपने लगता है, तो यह अकेले आपकी समस्या नहीं है। फास्ट चार्जिंग के दौरान फोन का तापमान 45-50 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचना और उसके बाद स्क्रीन का अटकना या गेम का लैग होना हर यूजर की पुरानी शिकायत रही है। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) मद्रास के शोधकर्ताओं ने इस समस्या की मूल जड़ को पहचानकर इसका क्रांतिकारी तकनीकी समाधान खोज निकाला है।
आईआईटी मद्रास की ‘हीट ट्रांसफर एंड थर्मल पावर लेबोरेटरी’ के प्रोफेसर अरविंद पट्टमट्टा के नेतृत्व में एक विशेष रिसर्च टीम ने इस नई तकनीक को पेटेंट कराने की दिशा में सफलता हासिल की है। इस प्रोजेक्ट में चेन्नई के SSN कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग और देहरादून स्थित DRDO (रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन) की ‘इंस्ट्रूमेंट्स रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टेब्लिशमेंट’ (IRDE) इकाई के वैज्ञानिक भी प्रत्यक्ष रूप से शामिल थे। इस टीम ने दशक पुराने कन्वेंशनल थर्मल मैनेजमेंट रूल्स को पूरी तरह से ध्वस्त करते हुए एक बिल्कुल नया स्ट्रक्चर तैयार किया है, जिसे ‘एंटीपैरेलल फ्लैट प्लेट पल्सटिंग हीट पाइप’ नाम दिया गया है।
यह रिसर्च इंटरनेशनल जर्नल ‘एक्सपेरिमेंटल हीट ट्रांसफर’ में हाल ही में प्रकाशित हुई है। इसमें बताया गया है कि आधुनिक स्मार्टफोन्स में नाखून से भी छोटे आकार के माइक्रोप्रोसेसर एक ही सेकंड के भीतर अरबों कैलकुलेशन को अंजाम देते हैं। प्रत्येक कैलकुलेशन से मामूली ऊष्मा (हीट) निकलती है, लेकिन जब एक बंद और पतले ग्लास-मेटल बॉडी वाले हैंडसेट के भीतर लगातार अरबों कैलकुलेशन होती हैं, तो वह गर्मी फोन के अंदर ही कैद होकर रह जाती है।
ऊपर से जब यूजर फोन को 120 वाट या 200 वाट के सुपर-फास्ट चार्जर पर लगाता है, तो लिथियम-आयन बैटरी खुद अपनी रासायनिक गर्मी छोड़ती है। नतीजा यह होता है कि प्रोसेसर और बैटरी दोनों मिलकर अंदरूनी हिस्से को पूरी तरह से तपा देते हैं। जब अंदरूनी तापमान बर्दाश्त से बाहर हो जाता है, तो प्रोसेसर अपनी सुरक्षा के लिए खुद अपनी क्लॉक स्पीड को आधा घटा देता है। इलेक्ट्रॉनिक्स की भाषा में इसे ‘थर्मल थ्रॉटलिंग’ कहा जाता है। आम उपभोक्ता इसे फोन के स्लो होने, गेम में फ्रेम ड्रॉप आने या कैमरा ऐप के अचानक बंद होने के रूप में देखता है।
अब तक की पारंपरिक कूलिंग तकनीकों में हीट पाइप का गर्म सिरा (इवेपोरेटर) और ठंडा सिरा (कंडेनसर) एक ही सपाट सतह पर अगल-बगल रखे जाते थे। समस्या यह थी कि 2026 के दौर में आने वाले स्लिम-ट्रिम 7mm और 8mm मोटाई वाले प्रीमियम 5G स्मार्टफोन्स के मदरबोर्ड पर 1 मिलीमीटर की खाली जगह भी नहीं बची है। प्रोसेसर के आसपास कूलिंग फिन्स या अतिरिक्त मेटल प्लेट लगाने की जगह खत्म हो चुकी है।
इस बुनियादी सीमा को तोड़ने के लिए आईआईटी मद्रास और देहरादून DRDO की टीम ने सोचने का नजरिया बदला। उन्होंने पूछा कि अगर गर्मी को बाहर निकलने के लिए दाएं या बाएं फैलाने के बजाय डिवाइस की मोटाई (Thickness) का इस्तेमाल किया जाए तो क्या होगा?
इसी विचार से जन्म हुआ एंटीपैरेलल डिज़ाइन का। इस नए कूलिंग स्ट्रक्चर में कोई पंप, मोटर या घूमने वाला पार्ट नहीं होता। इसमें तांबे या विशेष धातु की दो बेहद पतली सपाट प्लेट ली जाती हैं, जिनके बीच चावल के दाने से भी बारीक माइक्रो-चैनल्स (नालियां) उकेरी जाती हैं। इन प्लेट्स को आपस में पूरी तरह एयर-टाइट सील करके वैक्यूम बनाया जाता है और उसमें एक विशेष केमिकल मिक्सचर की कुछ बूंदें डाली जाती हैं।
शोध टीम ने इस सिस्टम में साधारण पानी या केवल अल्कोहल के बजाय 3 भाग इथेनॉल और 1 भाग पानी (3:1 रेशियो) का लिक्विड मिक्सचर इस्तेमाल किया। इथेनॉल बेहद कम तापमान पर उबलता है और माइक्रो-चैनल्स में तेजी से बहता है, जो सिस्टम को तुरंत ट्रिगर या पल्स प्रदान करता है। वहीं, पानी की हीट-कैरिंग कैपेसिटी बहुत अधिक होती है, जो प्रोसेसर की भट्टी जैसी गर्मी के बड़े हिस्से को अपने भीतर सोख लेती है।
जब यह एंटीपैरेलल पल्सटिंग हीट पाइप गर्म प्रोसेसर के संपर्क में आता है, तो इवेपोरेटर साइड पर मौजूद लिक्विड तुरंत भाप (वेपर) में बदल जाता है। भाप के फैलते बुलबुले तरल के टुकड़ों को तेजी से ऊपर की ओर धकेलते हैं। नया एंटीपैरेलल मैकेनिज्म गर्मी को साइड में भेजने के बजाय हैंडसेट की मोटाई के आर-पार यानी दूसरी तरफ स्थित कंडेनसर प्लेट की तरफ ट्रांसफर कर देता है।
वहां पहुंचकर भाप अपनी गर्मी छोड़ती है और वापस ठंडे तरल में बदल जाती है। यह पूरी प्रक्रिया एक मानव हृदय की धड़कन (Pulsing Action) की तरह लगातार बिना रुके चलती रहती है। इसे चलाने के लिए बाहर से किसी पंखे या बिजली की जरूरत नहीं पड़ती, बल्कि प्रोसेसर से निकलने वाली गर्मी ही इस कूलिंग साइकिल का इंजन बनती है।
प्रोफेसर अरविंद पट्टमट्टा ने ग्राउंड रिपोर्ट में बताया कि मोबाइल, स्लिम गेमिंग लैपटॉप और छोटे कसकर पैक किए गए इलेक्ट्रॉनिक्स बोर्ड्स पर कंडेनसर लगाने की जगह बिल्कुल नहीं होती। एंटीपैरेलल अरेंजमेंट दुर्लभ और कीमती बोर्ड एरिया को नुकसान पहुंचाए बिना डिवाइस की मोटाई का उपयोग करके सीधे विपरीत चेहरे (Opposite Surface) से गर्मी को बाहर फेंक देता है।
वैज्ञानिकों का मानना है कि इस एंटीपैरेलल पल्सटिंग हीट पाइप के व्यावसायिक इस्तेमाल से आने वाले समय में 5G और 6G स्मार्टफोन्स के मदरबोर्ड डिजाइन में बहुत बड़ा बदलाव आएगा। हालांकि, प्रोफेसर पट्टमट्टा ने यह भी स्पष्ट किया कि इस कूलिंग कंपोनेंट को कमर्शियल स्मार्टफोन्स में पूरी तरह उतारने से पहले इसके लॉन्ग-टर्म कंपोजिशन स्टेबिलिटी, जंग (Corrosion) से बचाव और सील ड्युरेबिलिटी के कठोर थर्मल-साइक्लिंग टेस्ट किए जा रहे हैं।
यदि यह तकनीक टेस्टिंग के सभी मापदंडों पर खरी उतरती है, तो भविष्य में मोबाइल यूजर्स को बिना किसी बाहरी कूलिंग फैन या भारी-भरकम वेपर चैंबर के भी 50 डिग्री तापमान वाले भारतीय गर्मियों के मौसम में बिना किसी लैग के हैवी गेमिंग और 4K/8K वीडियो रिकॉर्डिंग का अनवरत अनुभव मिल सकेगा।















