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Sawan Putrada Ekadashi Muhurat : सावन पुत्रदा एकादशी की तारीख को लेकर उलझन? जानें किस दिन व्रत रखना होगा शुभ

दून हॉराइज़न ब्यूरो,
Published by: Ganga Updated Sun, 23 Aug 2026 11:48 PM IST

सावन पुत्रदा एकादशी की तारीख को लेकर पंचांग और हरिवासर के कारण इस बार 23 और 24 अगस्त को लेकर असमंजस है। गृहस्थ 23 अगस्त और वैष्णव 24 अगस्त को व्रत रखकर सही समय पर पारण कर सकते हैं।

Sawan Putrada Ekadashi Muhurat

Sawan Putrada Ekadashi Muhurat : सावन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को पुत्रदा एकादशी कहा जाता है। यह सावन महीने की आखिरी एकादशी होती है, जो संतान की लंबी उम्र, अच्छी सेहत और तरक्की की कामना के लिए रखी जाती है।

इस बार पंचांग की गणना और हरिवासर के समय के कारण एकादशी की तिथि दो दिन पड़ रही है, जिससे लोगों के मन में व्रत की सही तारीख को लेकर सवाल हैं।

तिथि का समय और क्यों बनी दो दिन की स्थिति

पंचांग के अनुसार श्रावण शुक्ल एकादशी तिथि 23 अगस्त को रात 02:00 बजे से शुरू होकर 24 अगस्त को सुबह 04:18 बजे तक रहेगी।

उदयातिथि और हरिवासर के समय को ध्यान में रखते हुए व्रत के दो अलग-अलग दिन तय किए गए हैं:

  • गृहस्थों के लिए व्रत: 23 अगस्त को उदयातिथि में एकादशी मिल रही है, इसलिए सामान्य गृहस्थ लोग इसी दिन व्रत रखेंगे।
  • वैष्णव संप्रदाय के लिए व्रत: वैष्णव मत को मानने वाले लोग 24 अगस्त को व्रत रखेंगे।

24 अगस्त को सुबह 10:49 बजे तक हरिवासर रहेगा। नियम के अनुसार हरिवासर खत्म होने से पहले पारण नहीं किया जाता, इसलिए गृहस्थ और वैष्णव दोनों के लिए पारण का समय भी अलग रहेगा।

सावन पुत्रदा एकादशी पूजा के शुभ मुहूर्त

पूजा के लिए दोनों दिन के शुभ समय इस प्रकार हैं:

  • 23 अगस्त: सुबह 07:32 बजे से दोपहर 12:24 बजे तक पूजा का उत्तम समय रहेगा। (अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:58 से दोपहर 12:49 तक)
  • 24 अगस्त: सुबह 05:55 बजे से 07:32 बजे तक और फिर सुबह 09:09 बजे से 10:46 बजे तक पूजा कर सकते हैं। (अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:57 से दोपहर 12:49 तक)

पारण का सही समय

एकादशी व्रत का पूरा फल तभी मिलता है जब पारण शुभ समय में किया जाए:

23 अगस्त को व्रत रखने वालों के लिए: 24 अगस्त को दोपहर 01:41 बजे से शाम 04:16 बजे के बीच पारण करें (हरिवासर समाप्त होने के बाद)।

24 अगस्त को व्रत रखने वालों के लिए: 25 अगस्त को सुबह 05:55 बजे से 06:20 बजे के बीच पारण करना होगा।

इस दिन पारण के लिए केवल 25 मिनट का समय मिलेगा, क्योंकि इसके बाद द्वादशी समाप्त होकर त्रयोदशी शुरू हो जाएगी।

इस व्रत का महत्व

धार्मिक मान्यता के अनुसार, सावन पुत्रदा एकादशी का व्रत करने से निसंतान दंपतियों को योग्य संतान की प्राप्ति होती है। वहीं, जिन लोगों की संतान पहले से है, वे उनके अच्छे स्वास्थ्य, उज्ज्वल भविष्य और बाधाओं से रक्षा के लिए यह व्रत रखते हैं।

इसके साथ ही भगवान विष्णु की आराधना से जीवन में शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

Ganga

गंगा 'दून हॉराइज़न' में धर्म और ज्योतिष संवाददाता के पद पर कार्यरत हैं। उन्हें वैदिक ज्योतिष, पंचांग, व्रत-त्योहार और वास्तु शास्त्र का गहरा ज्ञान और वर्षों का अनुभव है। गंगा का उद्देश्य सिर्फ दैनिक राशिफल बताना नहीं, बल्कि धर्म और अध्यात्म से जुड़ी सटीक, शोध-आधारित और प्रामाणिक जानकारी आम जनमानस तक पहुंचाना है। वह ज्योतिषीय गणनाओं और धार्मिक मान्यताओं का गहराई से विश्लेषण करती हैं। उनकी तथ्यपरक लेखनी पाठकों को अंधविश्वास से दूर रखकर एक सकारात्मक मार्गदर्शन प्रदान करती है, जिससे वे डिजिटल पाठकों के बीच एक बेहद भरोसेमंद नाम बन गई हैं।

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