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Shardiya Navratri 2026 : 11 अक्टूबर से शुरू हो रही नवरात्रि, जानें घटस्थापना का शुभ मुहूर्त

दून हॉराइज़न ब्यूरो,
Published by: Ganga Updated Sat, 10 Oct 2026 05:28 PM IST

शारदीय नवरात्रि 2026 पर जानिए दुर्गा प्रतिमा में चक्षुदान का रहस्य, 11 अक्टूबर को घटस्थापना का सबसे शुभ मुहूर्त, पूजन विधि और राशि अनुसार महादान के नियम।

Shardiya Navratri 2026

मुख्य बातें

  • 11 अक्टूबर को सुबह 6:20 से 10:25 बजे तक श्रेष्ठ घटस्थापना मुहूर्त।
  • महालया पर चक्षुदान और घटस्थापना के साथ शुरू होगा पावन देवी पूजन।
  • अभिजीत मुहूर्त और शुभ योग में साधना से मिलेगा सुख-समृद्धि का वरदान।

Shardiya Navratri 2026 : आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि के साथ शारदीय नवरात्रि और दुर्गा पूजा का महापर्व आरंभ हो रहा है। पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड, ओडिशा और दिल्ली सहित पूरे देश में शक्ति की अधिष्ठात्री मां भगवती के स्वागत के लिए भव्य पंडाल सज चुके हैं। 10 अक्टूबर को महालया पर पितृ विसर्जन के साथ ही देवी पक्ष की शुरुआत हो चुकी है।

उदया तिथि की गणना के अनुसार 11 अक्टूबर 2026 को नवरात्रि के पहले दिन घटस्थापना के साथ मां शैलपुत्री का विधिवत पूजन किया जाएगा। इस पावन अवसर पर दुर्गा प्रतिमा निर्माण की सदियों पुरानी ‘चक्षुदान’ परंपरा और घटस्थापना का शास्त्र सम्मत समय श्रद्धालुओं के लिए विशेष कौतूहल और श्रद्धा का केंद्र बना हुआ है।

शारदीय नवरात्रि 2026: घटस्थापना का सबसे शुभ मुहूर्त

पंचांग के अनुसार, आश्विन शुक्ल प्रतिपदा तिथि का शुभारंभ शनिवार, 10 अक्टूबर 2026 को रात 09 बजकर 19 मिनट पर हो रहा है, जो अगले दिन रविवार, 11 अक्टूबर 2026 को रात 09 बजकर 30 मिनट तक मान्य रहेगी। सनातन धर्म में सूर्योदयव्यापिनी उदया तिथि को मान्यता दी जाती है, इसलिए शारदीय नवरात्रि का प्रथम व्रत और कलश स्थापना 11 अक्टूबर को ही की जाएगी।

ज्योतिषीय गणना के अनुसार 11 अक्टूबर को घटस्थापना के दो अत्यंत श्रेष्ठ मुहूर्त उपलब्ध हैं:

  • प्रातःकालीन शुभ मुहूर्त: सुबह 06 बजकर 20 मिनट से 10 बजकर 25 मिनट तक (अवधि: लगभग 4 घंटे 05 मिनट)।
  • अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 11 बजकर 45 मिनट से 12 बजकर 31 मिनट तक (यह समय बिना किसी दोष के सर्वकार्य सिद्धिदायक माना गया है)।
  • राहुकाल समय (वर्जित काल): शाम 04 बजकर 30 मिनट से 06 बजकर 00 मिनट तक रहेगा; इस समयावधि में कलश स्थापना या कोई भी नया मांगलिक अनुष्ठान करने से बचें।

चक्षुदान का आध्यात्मिक रहस्य और संपूर्ण पूजा विधि

दुर्गा प्रतिमा निर्माण में देवी की आंखें सबसे अंत में उकेरने का विधान केवल एक कलात्मक प्रक्रिया नहीं, बल्कि गहन आस्था और शास्त्रीय दर्शन का प्रतीक है। पूर्वी भारत में, विशेषकर बंगाल की मूर्तिकला परंपरा में, इसे ‘चक्षुदान’ (Chokkhu Daan) कहा जाता है। यह अनुष्ठान पारंपरिक रूप से महालया की भोर में संपन्न होता है।

मूर्तिकार महीनों की साधना के बाद प्रतिमा के पूर्ण रूप से तैयार होने पर सबसे अंत में अत्यंत एकाग्रता और पवित्र मन से मां की आंखों में रंग भरते हैं। भारतीय दर्शन में आंखें चेतना, करुणा, शक्ति और संवेदनशीलता का केंद्र हैं। मान्यता है कि आंखें बनते ही प्रतिमा में वह सजीव भाव प्रस्फुटित होता है, जो भक्त और भगवान के बीच भावनात्मक सेतु का काम करता है।

हालांकि, शास्त्र सम्मत दृष्टि से केवल आंखें बन जाने से मूर्ति पूजनीय नहीं होती। इसके उपरांत नवरात्रि की षष्ठी या सप्तमी तिथि पर ‘बिल्व निमंत्रण’, ‘महास्रान’ और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ ‘प्राण-प्रतिष्ठा’ अनुष्ठान किया जाता है। प्राण-प्रतिष्ठा के उपरांत ही प्रतिमा में साक्षात पराशक्ति की दिव्य चेतना का वास माना जाता है।

प्रथम दिन कलश स्थापना और पूजा विधि:

  • वेदी निर्माण व सामग्री: ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) को गंगाजल से पवित्र कर मिट्टी की वेदी बनाएं और उसमें सप्तधान्य या जौ (जवारे) बोएं।
  • कलश स्थापना: तांबे या मिट्टी के कलश पर स्वास्तिक बनाकर उसमें गंगाजल, सुपारी, अक्षत, सिक्का और दूर्वा डालें। कलश के मुख पर आम या अशोक के पांच पत्ते रखें और ऊपर लाल चुनरी में लपेटा हुआ नारियल (श्रीफल) स्थापित करें।
  • मां शैलपुत्री पूजन: देवी को श्वेत वस्त्र, लाल पुष्प व चमेली अर्पित करें। गाय के शुद्ध घी का भोग लगाएं, जिससे आरोग्य और दीर्घायु की प्राप्ति होती है।
  • अभिवादन मंत्र: पूजा के समय इस स्तुति का कम से कम 11 बार जप करें:

“वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्। वृषारूढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्॥”

राशि अनुसार विशेष फल और महादान के नियम

शारदीय नवरात्रि में मां दुर्गा का आगमन सभी 12 राशियों के जातकों के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है। विशेष रूप से मेष, सिंह, वृश्चिक और धनु राशि के जातकों के लिए यह नवरात्रि कार्यक्षेत्र में नए अवसर, मान-सम्मान और मानसिक स्थिरता लेकर आएगी। वहीं वृषभ, मिथुन, तुला और मकर राशि वालों को अपने प्रयासों में निरंतरता बनाए रखने से आर्थिक उन्नति के स्पष्ट योग बनेंगे।

नवरात्रि के दौरान सात्विक दान के नियम:

  • अग्नि तत्व राशियां (मेष, सिंह, धनु): मां शैलपुत्री की पूजा के उपरांत लाल वस्त्र, गुड़, तांबे के पात्र या चने की दाल का दान करें।
  • पृथ्वी तत्व राशियां (वृषभ, कन्या, मकर): शुद्ध घी, मिश्री, सफेद चंदन या अन्न का दान जरूरतमंदों को करें।
  • वायु तत्व राशियां (मिथुन, तुला, कुंभ): हरे मौसमी फल, वस्त्र, धार्मिक पुस्तकें या गौशाला में हरी घास का दान करें।
  • जल तत्व राशियां (कर्क, वृश्चिक, मीन): दूध, चावल, चांदी का सिक्का अथवा सफेद मिष्ठान का दान कल्याणकारी रहेगा।

नवरात्रि व्रत का पालन करने वाले साधकों को इस दौरान सात्विक आहार, वाणी पर संयम और क्रोध से दूरी बनाए रखनी चाहिए। 19 अक्टूबर को महानवमी का पूजन और 20 अक्टूबर को विजयादशमी के पावन दिन कन्या पूजन के बाद विधिपूर्वक व्रत का पारण किया जाएगा।

Ganga

गंगा 'दून हॉराइज़न' में धर्म और ज्योतिष संवाददाता के पद पर कार्यरत हैं। उन्हें वैदिक ज्योतिष, पंचांग, व्रत-त्योहार और वास्तु शास्त्र का गहरा ज्ञान और वर्षों का अनुभव है। गंगा का उद्देश्य सिर्फ दैनिक राशिफल बताना नहीं, बल्कि धर्म और अध्यात्म से जुड़ी सटीक, शोध-आधारित और प्रामाणिक जानकारी आम जनमानस तक पहुंचाना है। वह ज्योतिषीय गणनाओं और धार्मिक मान्यताओं का गहराई से विश्लेषण करती हैं। उनकी तथ्यपरक लेखनी पाठकों को अंधविश्वास से दूर रखकर एक सकारात्मक मार्गदर्शन प्रदान करती है, जिससे वे डिजिटल पाठकों के बीच एक बेहद भरोसेमंद नाम बन गई हैं।

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