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Shardiya Navratri 2026 : 11 अक्टूबर से शुरू होंगे मां दुर्गा के नौ दिन, जानें घटस्थापना से दशहरा तक की पूरी डेट लिस्ट

शारदीय नवरात्रि 2026 की शुरुआत 11 अक्टूबर से हो रही है, जिसका समापन 20 अक्टूबर को विजयादशमी के साथ होगा। जानिए घटस्थापना की सरल विधि, 9 दिनों का संपूर्ण कैलेंडर और अष्टमी-नवमी की सही तारीखें।

Published On: October 2, 2026 10:57 AM
Shardiya Navratri

Shardiya Navratri 2026 : आश्विन मास के साथ ही त्योहारों का सबसे पावन दौर शुरू होने जा रहा है। मां दुर्गा की आराधना का पर्व शारदीय नवरात्रि इस बार 11 अक्टूबर से शुरू होगा। पूरे नौ दिनों तक चलने वाले इस उत्सव में देवी के नौ अलग-अलग स्वरूपों की पूजा होगी और भक्त व्रत-अनुष्ठान करेंगे।

तिथि को लेकर किसी तरह का संशय न रहे, इसके लिए पंचांग की गणना समझना जरूरी है। आश्विन शुक्ल प्रतिपदा तिथि 10 अक्टूबर की रात 9:19 बजे से लग रही है, जो 11 अक्टूबर की रात 9:30 बजे तक रहेगी। उदया तिथि के नियम के अनुसार, नवरात्रि का पहला दिन 11 अक्टूबर को ही मान्य होगा।

घर में कैसे करें घटस्थापना: आसान विधि

नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना का सबसे अधिक महत्व होता है। इसे सही विधि से करना बेहद आसान है:

  • स्थान का चयन: पूजा घर के उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) को साफ कर गंगाजल छिड़कें और लकड़ी की चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं।
  • जौ बोना: मिट्टी के एक चौड़े बर्तन में साफ मिट्टी डालकर उसमें सात बार या सामान्य तरीके से जौ के दाने बोएं और हल्का पानी छिड़कें।
  • कलश तैयार करना: तांबे, पीतल या मिट्टी के कलश में शुद्ध जल भरें। उसमें गंगाजल, सिक्का, सुपारी, अक्षत और दूर्वा डालें।
  • पल्लव और नारियल: कलश के मुख पर आम या अशोक के 5 या 7 पत्ते रखें। एक सूखे नारियल पर कलावा बांधकर, चुनरी लपेटकर पत्तों के बीच स्थापित करें।
  • संकल्प: हाथ में जल और अक्षत लेकर नौ दिनों के व्रत या पूजन का संकल्प लें।

अगर आप अखंड ज्योति जला रहे हैं, तो ध्यान रखें कि दीपक को कभी सीधे जमीन पर न रखें। उसके नीचे अक्षत की ढेरी बनाएं और ज्योति को हवा से सुरक्षित रखें।

नौ दिनों का संपूर्ण पूजा कैलेंडर

  • 11 अक्टूबर: मां शैलपुत्री पूजा (घटस्थापना, पहला दिन)
  • 12 अक्टूबर: मां ब्रह्मचारिणी पूजा
  • 13 अक्टूबर: मां चंद्रघंटा पूजा
  • 14 अक्टूबर: मां कूष्मांडा पूजा
  • 15 अक्टूबर: मां स्कंदमाता पूजा
  • 16 अक्टूबर: मां कात्यायनी पूजा
  • 17 अक्टूबर: मां कालरात्रि पूजा
  • 18 अक्टूबर: मां महागौरी पूजा (महाअष्टमी)
  • 19 अक्टूबर: मां सिद्धिदात्री पूजा (महानवमी)

महाअष्टमी, महानवमी और दशहरा की तारीखें

महाअष्टमी का व्रत 18 अक्टूबर को रखा जाएगा। इस दिन महागौरी की पूजा होती है। अधिकांश घरों में अष्टमी के दिन ही कुलदेवी पूजन, हवन और कन्या पूजन की परंपरा निभाई जाती है।

19 अक्टूबर को महानवमी होगी, जो मां सिद्धिदात्री की उपासना का दिन है। जो परिवार नवमी को कन्या खिलाते हैं, वे इस दिन 9 कन्याओं और एक बटुक (बालक) को आदरपूर्वक भोजन कराकर व्रत का पारण करेंगे।

इसके अगले दिन यानी 20 अक्टूबर को विजयादशमी (दशहरा) का पर्व मनाया जाएगा। अधर्म पर धर्म और बुराई पर अच्छाई की विजय के प्रतीक रूप में इस दिन रावण दहन और शस्त्र पूजा की जाती है।

व्रत और दैनिक साधना के लिए जरूरी सुझाव

खान-पान का संतुलन: उपवास के दौरान शरीर में पानी की कमी न होने दें। मौसमी फल, साबूदाना, मखाना और सेंधा नमक युक्त हल्का फलाहार लें।

साधना का समय: सुबह स्नान के बाद दुर्गा चालीसा, दुर्गा सप्तशती या देवी के बीज मंत्रों का पाठ मानसिक शांति और ध्यान के लिए उत्तम रहता है।

ताजगी और सात्विकता: नौ दिनों तक घर के वातावरण को शांत रखें और सात्विक आहार का ही पालन करें।

Ganga

गंगा 'दून हॉराइज़न' में धर्म और ज्योतिष संवाददाता के पद पर कार्यरत हैं। उन्हें वैदिक ज्योतिष, पंचांग, व्रत-त्योहार और वास्तु शास्त्र का गहरा ज्ञान और वर्षों का अनुभव है। गंगा का उद्देश्य सिर्फ दैनिक राशिफल बताना नहीं, बल्कि धर्म और अध्यात्म से जुड़ी सटीक, शोध-आधारित और प्रामाणिक जानकारी आम जनमानस तक पहुंचाना है। वह ज्योतिषीय गणनाओं और धार्मिक मान्यताओं का गहराई से विश्लेषण करती हैं। उनकी तथ्यपरक लेखनी पाठकों को अंधविश्वास से दूर रखकर एक सकारात्मक मार्गदर्शन प्रदान करती है, जिससे वे डिजिटल पाठकों के बीच एक बेहद भरोसेमंद नाम बन गई हैं।

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