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Putrada Ekadashi Deepdan : पुत्रदा एकादशी पर दीपक जलाने का है खास महत्व, जानें किन जगहों पर करना चाहिए प्रकाश

दून हॉराइज़न ब्यूरो,
Published by: Ganga Updated Sun, 23 Aug 2026 11:48 PM IST

सावन पुत्रदा एकादशी पर भगवान विष्णु की आराधना के साथ शाम के समय दीपदान करने की विशेष परंपरा है। घर के मंदिर, तुलसी, पीपल और नजदीकी देवस्थान पर सही नियमों के साथ दीपक जलाकर आप अपनी पूजा को फलदायी बना सकते हैं।

Putrada Ekadashi Deepdan

Putrada Ekadashi Deepdan : सावन माह के शुक्ल पक्ष की पुत्रदा एकादशी भगवान विष्णु की कृपा पाने का खास दिन माना जाता है।

इस दिन व्रत और विशेष पूजा-अर्चना के अलावा शाम के समय दीपदान करने की पुरानी परंपरा है। मान्यता है कि सच्चे मन से किया गया दीपदान घर-परिवार में शांति और सकारात्मक ऊर्जा लेकर आता है।

अगर आप भी एकादशी पर दीपदान करने की सोच रहे हैं, तो शाम के समय कुछ विशेष स्थानों पर दीपक जलाना फलदायी माना गया है।

1. घर के पूजा स्थल पर

अगर आप किसी कारण से बाहर मंदिर नहीं जा पा रहे हैं, तो सबसे पहले अपने घर के मंदिर में ही दीपदान करें। शाम की आरती के बाद भगवान विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर के सामने शुद्ध घी का दीपक जलाएं।

पूजा के दौरान मन ही मन ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जप करें। दीपदान में संख्या से अधिक आपका भाव मायने रखता है, इसलिए श्रद्धापूर्वक एक दीपक जलाना भी पूरा फल देता है।

2. तुलसी के पौधे के पास

एकादशी की शाम तुलसी के पौधे के पास दीपक जरूर रखना चाहिए। पहले तुलसी जी को प्रणाम करें और फिर शुद्ध घी का दीपक प्रज्वलित करें।

ध्यान रखें कि दीपक को पौधे से थोड़ी सुरक्षित दूरी पर रखें, ताकि लौ की गर्मी से तुलसी की पत्तियां झुलसें नहीं।

3. भगवान विष्णु के मंदिर में

नजदीकी विष्णु मंदिर या किसी भी देवस्थान में जाकर दीपदान करना बहुत उत्तम माना जाता है।

मंदिर परिसर में जहां दीपक रखने का तय स्थान बना हो, वहीं घी या तिल के तेल का दीया जलाएं। सार्वजनिक जगह पर दीपक रखते समय व्यवस्था का पूरा ध्यान रखें।

4. पीपल के पेड़ की छांव में

धार्मिक मान्यताओं में पीपल के पेड़ में श्रीहरि का वास माना गया है। एकादशी की शाम पीपल के तने के पास दीपक जलाकर परिक्रमा करना शुभ माना जाता है।

हालांकि, यहां दीपक रखते समय सतर्क रहें। पेड़ के नीचे सूखी पत्तियां या कचरा हो तो वहां दीपक न रखें, ताकि आग लगने की कोई आशंका न रहे।

दीपदान का सही समय और जरूरी सावधानियां

  • सही समय: दीपदान हमेशा गोधूलि वेला यानी सूर्यास्त के समय या उसके तुरंत बाद करना चाहिए। अपने शहर के पंचांग के अनुसार सूर्यास्त के समय की पुष्टि कर लें।
  • सुरक्षा का ध्यान: जलते हुए दीपक को बच्चों की पहुंच और पर्दे जैसी आग पकड़ने वाली चीजों से दूर रखें।
  • साफ-सफाई: दीया रखने की जगह पहले साफ कर लें और दीपक के नीचे थोड़े से अक्षत (चावल) या फूल का आसन देना बेहतर माना जाता है।

Ganga

गंगा 'दून हॉराइज़न' में धर्म और ज्योतिष संवाददाता के पद पर कार्यरत हैं। उन्हें वैदिक ज्योतिष, पंचांग, व्रत-त्योहार और वास्तु शास्त्र का गहरा ज्ञान और वर्षों का अनुभव है। गंगा का उद्देश्य सिर्फ दैनिक राशिफल बताना नहीं, बल्कि धर्म और अध्यात्म से जुड़ी सटीक, शोध-आधारित और प्रामाणिक जानकारी आम जनमानस तक पहुंचाना है। वह ज्योतिषीय गणनाओं और धार्मिक मान्यताओं का गहराई से विश्लेषण करती हैं। उनकी तथ्यपरक लेखनी पाठकों को अंधविश्वास से दूर रखकर एक सकारात्मक मार्गदर्शन प्रदान करती है, जिससे वे डिजिटल पाठकों के बीच एक बेहद भरोसेमंद नाम बन गई हैं।

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