Putrada Ekadashi Tulsi Upay : सावन महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी को पुत्रदा एकादशी के नाम से जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह व्रत केवल संतान प्राप्ति की इच्छा तक सीमित नहीं है, बल्कि बच्चों के अच्छे स्वास्थ्य, उज्ज्वल भविष्य और परिवार में सुख-शांति की कामना के लिए भी रखा जाता है।
इस पावन अवसर पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विधिवत आराधना की जाती है।
शुभ तिथि और मुहूर्त
पंचांग के अनुसार, सावन मास की एकादशी तिथि 23 अगस्त 2026 को रात लगभग 02:00 बजे से शुरू होगी और 24 अगस्त की सुबह 04:18 बजे तक रहेगी।
उदया तिथि की गणना के आधार पर पुत्रदा एकादशी का व्रत 23 अगस्त को ही रखा जाएगा।
पूजा में तुलसी का विशेष स्थान
भगवान विष्णु की उपासना में तुलसी दल का उपयोग अनिवार्य माना जाता है। एकादशी के दिन पूजा के दौरान श्रीहरि को ताजे तुलसी के पत्ते अर्पित करें और ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप करें।
संतान की भलाई और घर की सकारात्मक ऊर्जा के लिए तुलसी के सामने शाम के समय घी का दीपक जलाना भी शुभ माना गया है।
ध्यान रखें कि एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते न तोड़ें, पूजा के लिए पत्ते एक दिन पहले ही सुरक्षित रख लें।
सरल पूजा विधि
- सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और हल्के पीले या साफ कपड़े पहनें।
- मंदिर की सफाई कर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी के सामने घी का दीपक प्रज्वलित करें।
- प्रतिमा पर चंदन का तिलक लगाएं और पीले फूल, फल व तुलसी दल अर्पित करें।
- भगवान के सामने बैठकर विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें या एकादशी व्रत की कथा सुनें।
- पूजा के अंत में परिवार और बच्चों की मंगलकामना की प्रार्थना करें।
व्रत के जरूरी नियम और सावधानियां
एकादशी के दिन अन्न और विशेष रूप से चावल के सेवन से परहेज किया जाता है। अपनी शारीरिक क्षमता के अनुसार फलाहार या जलाहार व्रत रख सकते हैं।
यदि कोई स्वास्थ्य समस्या या बीमारी है, तो शरीर पर अतिरिक्त दबाव डालकर उपवास न करें, बल्कि सामान्य सात्विक भोजन के साथ केवल मानसिक साधना और प्रभु स्मरण करें।
इस दिन खान-पान के साथ-साथ अपने व्यवहार में भी संयम रखें। किसी के प्रति कटु वचन न बोलें, विवाद से बचें और दिन को शांत भाव से बिताएं।
द्वादशी को पारण का समय और तरीका
व्रत का संपूर्ण फल सही समय पर किए गए पारण से ही मिलता है। 23 अगस्त के व्रत का पारण 24 अगस्त को द्वादशी तिथि में किया जाएगा।
पंचांग के अनुसार, दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों के लिए पारण का शुभ समय दोपहर 01:41 बजे से शाम 04:16 बजे तक रहेगा। अलग-अलग शहरों में सूर्योदय के अनुसार यह समय थोड़ा भिन्न हो सकता है, इसलिए स्थानीय पंचांग का मिलान कर लें। पारण के दिन सुबह पुनः स्नान और विष्णु पूजन करें। इसके बाद किसी जरूरतमंद व्यक्ति को अन्न, फल या वस्त्र का दान देकर सात्विक भोजन ग्रहण करते हुए व्रत खोलें।















