Ganesh Puja Vastu : वास्तु शास्त्र में भगवान गणेश को विघ्नहर्ता और मंगलकारी माना गया है, जिनकी आराधना के बिना वास्तु देवता की पूर्ण कृपा प्राप्त नहीं होती।
घर की नकारात्मक ऊर्जा को सकारात्मकता में बदलने के लिए गणपति की बैठी हुई या शयन मुद्रा की प्रतिमा अत्यंत शुभ फलदायी होती है। यदि घर में लंबे समय से बीमारियां या मानसिक तनाव बना हुआ है, तो पीले रंग के गणपति की उपासना से विशेष लाभ मिलता है।
प्रतिमा के रंग और स्थान का चयन
विद्यार्थियों और बच्चों के कमरे में एकाग्रता बढ़ाने के लिए उनके स्टडी टेबल पर पीले रंग की छोटी गणेश प्रतिमा रखना लाभकारी है। वहीं, जो लोग आध्यात्मिक शांति और ऐश्वर्य की तलाश में हैं, उन्हें श्वेत (सफेद) रंग के गणपति की पूजा करनी चाहिए।
पूजा घर में हमेशा एक ही प्रतिमा रखें; यदि आप घर के अन्य हिस्सों में भी गणेश जी का प्रभाव चाहते हैं, तो मूर्ति के स्थान पर ‘ॐ’ का चिह्न अंकित करना कहीं अधिक प्रभावशाली और शास्त्रसम्मत है।
इन गलतियों से बचें
वास्तु नियमों के अनुसार, भगवान गणेश को कभी भी तुलसी दल (तुलसी के पत्ते) अर्पित नहीं करने चाहिए, क्योंकि पौराणिक मान्यताओं के अनुसार गणेश जी ने तुलसी को अपनी पूजा से वर्जित किया है।
इसके अलावा, भूलकर भी गणपति की प्रतिमा को बेडरूम में न लगाएं। यदि घर लंबे समय से बंद पड़ा है या प्रवेश करते ही भारीपन महसूस होता है, तो मुख्य द्वार के ठीक सामने गणेश जी का बंदनवार या प्रतिमा स्थापित करने से नकारात्मक शक्तियां घर में प्रवेश नहीं कर पातीं।
सफलता और सिद्धि के उपाय

रुके हुए कार्यों को गति देने और करियर में सफलता के लिए ‘सिद्धिनायक’ स्वरूप वाले गणपति को घर लाना चाहिए। स्थापना के लिए हमेशा शुभ मुहूर्त का पालन करें।
नित्य पूजन से न केवल घर का कलह शांत होता है, बल्कि व्यक्ति के भीतर आत्मविश्वास और निर्णय लेने की क्षमता का भी विकास होता है।










