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समुद्र मंथन से है नाता, दून के इस मंदिर की कहानी सुनकर रह जाएंगे हैरान

देहरादून के मालसी और राजपुर के बीच घने साल के जंगलों में स्थित सुरा देवी मंदिर अपनी पौराणिक मान्यताओं और शांत वातावरण के लिए जाना जाता है। समुद्र मंथन की कथाओं से जुड़ा यह मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि ट्रेकिंग और प्रकृति प्रेमियों के लिए एक 'हिडन ट्रेजर' भी है।

Published On: March 28, 2026 9:09 PM
Sura Devi Temple Dehradun

HIGHLIGHTS

  • समुद्र मंथन से निकली देवी वारुणी (सुरा देवी) को समर्पित है यह प्राचीन सिद्धपीठ।
  • मालसी और राजपुर से होकर गुजरने वाले 2-3 किलोमीटर के कच्चे रास्तों और साल के जंगलों के बीच है स्थित।
  • महंत नारायण दास द्वारा 19वीं सदी के मध्य में निर्माण के ऐतिहासिक साक्ष्य मिलते हैं।

Sura Devi Temple Dehradun : उत्तराखंड की राजधानी में वैसे तो कई नामी मंदिर हैं, लेकिन मालसी और राजपुर के शांत जंगलों के बीच बसा ‘सुरा देवी मंदिर’ आज भी कई लोगों की नजरों से ओझल है।

इसे दून का ‘हिडन रत्न’ कहना गलत नहीं होगा। यहाँ पहुँचने के लिए आपको घने साल के पेड़ों के बीच से करीब 2 किलोमीटर की चढ़ाई और कच्चे रास्तों को पार करना पड़ता है।

इस मंदिर का सीधा संबंध पौराणिक कथाओं के अनुसार ‘समुद्र मंथन’ से है। माना जाता है कि समुद्र मंथन के दौरान जब देवी वारुणी प्रकट हुई थीं, उन्हीं के स्वरूप में यहाँ सुरा देवी की पूजा की जाती है।

स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, यहाँ देवी ने दानव धांधसुर का वध किया था। यही वजह है कि भक्त उन्हें रक्षक और शक्ति के प्रतीक के रूप में पूजते हैं।

इतिहास की बात करें तो सुरा देवी मंदिर का निर्माण करीब 1854 से 1874 के बीच माना जाता है। इसे गुरु राम राय दरबार के तत्कालीन महंत नारायण दास ने बनवाया था।

गौर करने वाली बात यह है कि महंत नारायण दास ने ही सुकंडा देवी और मां अंबिका मंदिर के जीर्णोद्धार में भी बड़ी भूमिका निभाई थी। 1996 में इस मंदिर परिसर का आधुनिक विस्तार किया गया, लेकिन आज भी यहाँ का गर्भगृह प्राचीन ऊर्जा से ओत-प्रोत है।

यहाँ पहुँचने के दो मुख्य रास्ते हैं। पहला रास्ता राजपुर में शहंशाही आश्रम के पास से शुरू होता है, जो लगभग 2 किलोमीटर का सीधा और आसान ट्रैक है।

दूसरा रास्ता मालसी में फेयरफील्ड मैरियट होटल के पास की गली से शुरू होता है, जो थोड़ा चुनौतीपूर्ण और पथरीला है। इस रास्ते पर चलते हुए आपको दून घाटी और नई मसूरी रोड का विहंगम नजारा देखने को मिलता है।

मंदिर के चारों ओर साल (Shorea Robusta) के ऊंचे पेड़ हैं। ये पेड़ न केवल यहाँ की खूबसूरती बढ़ाते हैं, बल्कि इनका औषधीय महत्व भी है। प्रकृति प्रेमियों और साइक्लिस्टों के लिए यह जगह जन्नत से कम नहीं है।

हालांकि, एकांत होने के कारण सलाह दी जाती है कि यहाँ सुबह के समय और कम से कम 4-5 लोगों के समूह में ही जाएँ। नवरात्र के दौरान यहाँ विशेष भंडारे और मेले का आयोजन होता है, जिसमें दूर-दूर से श्रद्धालु पहुँचते हैं।


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Ganga

गंगा 'दून हॉराइज़न' में धर्म और ज्योतिष संवाददाता के पद पर कार्यरत हैं। उन्हें वैदिक ज्योतिष, पंचांग, व्रत-त्योहार और वास्तु शास्त्र का गहरा ज्ञान और वर्षों का अनुभव है। गंगा का उद्देश्य सिर्फ दैनिक राशिफल बताना नहीं, बल्कि धर्म और अध्यात्म से जुड़ी सटीक, शोध-आधारित और प्रामाणिक जानकारी आम जनमानस तक पहुंचाना है। वह ज्योतिषीय गणनाओं और धार्मिक मान्यताओं का गहराई से विश्लेषण करती हैं। उनकी तथ्यपरक लेखनी पाठकों को अंधविश्वास से दूर रखकर एक सकारात्मक मार्गदर्शन प्रदान करती है, जिससे वे डिजिटल पाठकों के बीच एक बेहद भरोसेमंद नाम बन गई हैं।

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