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एस जयशंकर की ‘साइलेंट डिप्लोमेसी’ ने बचाई आपकी रसोई, ईरान से यूं हुई सीक्रेट डील

दून हॉराइज़न ब्यूरो,
Published by: Amit Gawri Updated Fri, 20 Mar 2026 03:26 PM IST

मिडिल ईस्ट में जारी भीषण युद्ध और होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी के बीच भारत ने ईरान के साथ सफल कूटनीतिक बातचीत कर अपने फंसे हुए एलपीजी टैंकरों को सुरक्षित निकाल लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री एस जयशंकर के हस्तक्षेप के बाद ईरान ने भारतीय जहाजों को रास्ता देने पर सहमति जताई है।

एस जयशंकर की 'साइलेंट डिप्लोमेसी' ने बचाई आपकी रसोई, ईरान से यूं हुई सीक्रेट डील

मुख्य बातें

  • भारत ने होर्मुज जलडमरूमध्य से दो महत्वपूर्ण एलपीजी टैंकरों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित की।
  • भारतीय नौसेना ने 183 ईरानी चालक दल के सदस्यों को सुरक्षा देकर विश्वास बहाली की नींव रखी।
  • फारस की खाड़ी में फंसे अन्य 22 भारतीय तेल और गैस जहाजों को निकालने के लिए कूटनीतिक प्रयास जारी।

नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में इजरायल, अमेरिका और ईरान के बीच छिड़ी भीषण जंग के बीच भारत ने एक बड़ी कूटनीतिक कामयाबी हासिल की है। ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) की अघोषित नाकेबंदी के बावजूद भारत अपने दो एलपीजी (LPG) टैंकरों को युद्ध क्षेत्र से सुरक्षित बाहर निकालने में सफल रहा।

इस रणनीतिक सफलता के पीछे भारत की ‘साइलेंट डिप्लोमेसी’ और मानवीय दृष्टिकोण ने बड़ी भूमिका निभाई है। जब पूरी दुनिया की नजरें मिसाइल हमलों पर टिकी थीं, तब भारतीय विदेश मंत्रालय ने पर्दे के पीछे से देश को संभावित ऊर्जा संकट से उबारने के लिए ईरान के साथ सीधी बातचीत का रास्ता चुना।

भारत के लिए यह मिशन बेहद संवेदनशील था क्योंकि देश अपनी जरूरत का 90% एलपीजी आयात इसी समुद्री मार्ग से करता है। ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद पैदा हुए तनाव ने इस रूट को लगभग बंद कर दिया था, जिससे भारत में कुकिंग गैस की किल्लत का खतरा पैदा हो गया था।

इस कूटनीतिक सौदे की जमीन तब तैयार हुई जब भारत ने कोच्चि बंदरगाह पर फंसे 183 ईरानी नौसैनिकों को न केवल सुरक्षा दी, बल्कि उन्हें विशेष विमान से वापस ईरान भी भेजा। भारत के इस कदम को ईरान ने एक बड़े भरोसे के तौर पर देखा।

विदेश मंत्री एस जयशंकर इस पूरे मिशन की निगरानी कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया है कि ईरान के साथ कोई सामूहिक समझौता नहीं है, बल्कि हर टैंकर के लिए अलग-अलग स्तर पर बातचीत की जा रही है। इस प्रक्रिया में तेजी तब आई जब 12 मार्च को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन से फोन पर बात कर टैंकरों के सुगम आवागमन की अपील की।

सूत्रों के अनुसार, भारत बदले में ईरान को उन दवाओं और फार्मास्युटिकल उत्पादों की आपूर्ति बढ़ाने पर विचार कर सकता है जो अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के दायरे में नहीं आते। हालांकि, ईरान अब भी ब्रिक्स (BRICS) मंच के जरिए भारत पर अमेरिका और इजरायल की सैन्य कार्रवाई की निंदा करने का दबाव बना रहा है।

वर्तमान में ओमान की खाड़ी और अरब सागर में भारतीय युद्धपोतों की गश्त बढ़ा दी गई है। भारत का अगला लक्ष्य फारस की खाड़ी में फंसे शेष 22 भारतीय जहाजों को सुरक्षित निकालना है। चाबहार पोर्ट और अफगानिस्तान तक पहुंच के लिहाज से ईरान भारत का महत्वपूर्ण साझेदार बना हुआ है।

Amit Gawri

अमित गावरी 'दून हॉराइज़न' में राष्ट्रीय समाचार लेखक के रूप में देश भर की ब्रेकिंग न्यूज़ और महत्वपूर्ण घटनाओं को प्रमुखता से कवर करते हैं। चुनाव, सरकारी योजनाओं और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े विषयों पर उनकी खास विशेषज्ञता है। अमित हमेशा तथ्यों की गहराई में जाकर रिपोर्टिंग करते हैं, ताकि पाठकों को किसी भी खबर का हर पहलू स्पष्ट रूप से समझ आ सके। क्लिकबेट से दूर रहकर, वे अपनी खबरों में सटीकता और विश्वसनीयता (Trust) बनाए रखते हैं। उनका जर्नलिस्टिक अप्रोच हमेशा जनसरोकार और सटीक सूचना देने पर ही केंद्रित रहता है।

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