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उत्तरकाशी में 136 जिंदगियों पर छाया संकट, प्रशासन ने शुरू किया बड़ा रेस्क्यू ऑपरेशन

दून हॉराइज़न ब्यूरो,
Published by: Harpreet Singh Updated Sun, 27 Sep 2026 10:23 PM IST

उत्तरकाशी के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में भारी बर्फबारी के बीच 136 पर्वतारोही और पोर्टर फंस गए हैं। कालिंदी पास और ऑडन कोल बेस कैंप पर बचाव के लिए हेली रेकी की तैयारी है।

Uttarakhand Snowfall Rescue Operation

मुख्य बातें

  • कालिंदी पास और ऑडन कोल में 136 पर्वतारोही, ट्रेकर और स्थानीय पोर्टर फंसे।
  • राहत एवं बचाव कार्यों की जमीनी कमान संभालने एडीएम मुक्ता मिश्र हर्षिल रवाना।
  • सैटेलाइट फोन के जरिए बेस कैंपों और गाइडों से लगातार साधा जा रहा संपर्क।
  • दृश्यता सुधरते ही सोमवार सुबह उच्च हिमालयी क्षेत्रों में कराई जाएगी हवाई रेकी।
  • एसडीआरएफ, एनडीआरएफ और नेहरू पर्वतारोहण संस्थान की टीमें मुस्तैद।

दून हॉराइज़न, उत्तरकाशी (27 सितंबर) : उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले से सटे दुर्गम उच्च हिमालयी इलाकों में अचानक बदले मौसम और लगातार जारी भारी बर्फबारी के चलते विभिन्न अभियानों पर निकले 136 पर्वतारोही, ट्रेकर्स और सहयोगी पोर्टर बीच रास्ते में फंस गए हैं। रविवार को हालात की गंभीरता देखते हुए जिला प्रशासन हरकत में आया।

जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और सुरक्षा एजेंसियों के साथ आपात बैठक कर रेस्क्यू ऑपरेशन (Uttarkashi Trekkers Rescue) की रूपरेखा तय की।

कालिंदी पास और ऑडन कोल में फंसे दल, सैटेलाइट से संपर्क जारी

आपदा नियंत्रण कक्ष से मिले आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, विभिन्न अभियानों पर निकले कुल 136 लोगों में से 89 सदस्य हाई अल्टीट्यूड एक्सपीडिशन का हिस्सा हैं। इसके अलावा 14 हजार फीट से अधिक की ऊंचाई पर स्थित बेहद जोखिम भरे कालिंदी पास बेस कैंप में 18 ट्रेकर और ऑडन कोल पास बेस कैंप में 29 सदस्य मौजूद हैं।

इन दोनों ही ट्रेक रूटों को तकनीकी रूप से गढ़वाल हिमालय के सबसे कठिन और खतरनाक ट्रेक में गिना जाता है, जहां सितंबर के अंतिम सप्ताह में तापमान शून्य से काफी नीचे चला जाता है। फिलहाल इन सभी टीमों के गाइडों से सैटेलाइट फोन के जरिए संपर्क साधा गया है। राहत की बात यह है कि सभी दल तय बेस कैंपों के आसपास सुरक्षित स्थानों पर शरण लिए हुए हैं।

हर्षिल बना कंट्रोल सेंटर, मौसम खुलते ही हेलीकॉप्टर भरेंगे उड़ान

ग्राउंड जीरो पर हालात की निगरानी और सभी एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल बिठाने के लिए अपर जिलाधिकारी (एडीएम) मुक्ता मिश्र प्रशासनिक अमले के साथ हर्षिल पहुंच रही हैं। हर्षिल को ही मुख्य फॉरवर्ड बेस बनाया गया है, ताकि रेस्क्यू सामग्री और राहत दल बिना समय गंवाए आगे बढ़ सकें। सोमवार तड़के अगर आसमान साफ रहा तो सबसे पहले उच्च हिमालयी घाटियों में हेलीकॉप्टर से रेकी की जाएगी। उड़ान के लिए मौसम अनुकूल मिलते ही फंसे हुए लोगों को एयरलिफ्ट करने की प्रक्रिया शुरू होगी।

प्रशासन किसी भी चूक की गुंजाइश नहीं छोड़ना चाहता। इसी को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने हर्षिल और भटवाड़ी के नजदीकी स्वास्थ्य केंद्रों पर विशेषज्ञ डॉक्टरों की तैनाती के साथ जरूरी जीवनरक्षक दवाएं और एंबुलेंस स्टैंडबाय पर रख दी हैं।

एसडीआरएफ और निम के जांबाज तैनात

इस पूरे अभियान में स्टेट डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स (SDRF), एनडीआरएफ, उत्तराखंड पुलिस, वन विभाग और नेहरू पर्वतारोहण संस्थान (NIM) के प्रशिक्षित पर्वतारोहियों को अलर्ट मोड पर रखा गया है। जमीनी रास्ते से भी रेस्क्यू टीमें जरूरी राशन किट, पैक्ड फूड और थर्मल ब्लैंकेट लेकर आगे बढ़ने की तैयारी में हैं। राज्य के निचले हिस्से जहां मूसलाधार बारिश से जूझ रहे हैं, वहीं गंगोत्री, केदारनाथ, हेमकुंड साहिब और ओम पर्वत की चोटियों पर लगातार बर्फ की चादर मोटी हो रही है, जिससे रास्ते बंद होने का खतरा बढ़ गया है।

Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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