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देहरादून आए बिना सीधे मसूरी पहुंच जाएंगे दिल्ली वाले पर्यटक? जाने कैसे होगा ये चमत्कार

देहरादून शहर को भयंकर जाम से बचाने के लिए झाझरा से मसूरी तक 44 किलोमीटर लंबे नए वैकल्पिक टू-लेन मार्ग की डीपीआर बनाने का काम एनएचएआई ने शुरू कर दिया है। यह नया रूट झाझरा से ढूंगा चौक, बकराना और जॉर्ज एवरेस्ट पीक के पास से सीधे मुख्य मसूरी रोड को जोड़ेगा जिससे पर्यटकों को सिटी के अंदर नहीं आना पड़ेगा।

देहरादून आए बिना सीधे मसूरी पहुंच जाएंगे दिल्ली वाले पर्यटक? जाने कैसे होगा ये चमत्कार

HIGHLIGHTS

  • झाझरा से मसूरी तक 44 किलोमीटर लंबा वैकल्पिक मार्ग बनेगा।
  • यह नया रूट पूरी तरह से टू-लेन यानी डबल लेन होगा।
  • आशारोड़ी-झाझरा लिंक हाईवे का 70 फीसदी काम पूरा हो चुका है।
  • 12 किलोमीटर लंबे इस प्रोजेक्ट में 9 माइनर ब्रिज तैयार।

देहरादून की लाइफलाइन कही जाने वाली राजपुर रोड का दम पूरी तरह फूल चुका है। गाड़ियों का रेंगना यहां हर दिन की बात हो गई है। इस भयंकर ट्रैफिक जाम के परमानेंट इलाज के लिए शासन स्तर पर फाइलें तेजी से दौड़ने लगी हैं।

झाझरा से मसूरी तक 44 किलोमीटर का एक नया अल्टरनेटिव रूट तैयार करने की तैयारी है। इस नए एलाइनमेंट को हरी झंडी मिलने के बाद अब एनएचएआई (NHAI) ने इसकी डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट यानी डीपीआर तैयार करने का काम ग्राउंड पर शुरू कर दिया है।

प्रस्तावित नया रूट कुल 44 किलोमीटर लंबा होने वाला है। यह पूरा रास्ता टू-लेन यानी डबल लेन चौड़ा बनाया जाएगा। इसकी शुरुआत झाझरा से होगी, जिसके बाद यह रास्ता ढूंगा चौक, बकराना और फिर मशहूर टूरिस्ट स्पॉट जॉर्ज एवरेस्ट पीक के पास से होते हुए सीधे मेन मसूरी रोड में जाकर मिल जाएगा। दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस-वे और पांवटा साहिब हाईवे से आने वाली गाड़ियां अब सीधे शहर के बाहर-बाहर से मसूरी निकल जाएंगी।

भूस्खलन जोन और सुरक्षा दीवारों पर फोकस

इस 44 किलोमीटर के नए रूट में कई हिस्से ऐसे हैं जो बेहद संवेदनशील हैं और वहां लगातार लैंडस्लाइड का खतरा बना रहता है। इस मार्ग का एक बहुत बड़ा हिस्सा घने जंगलों से घिरा हुआ है।

एनएचएआई अपनी डीपीआर में इन भूस्खलन संभावित क्षेत्रों के ट्रीटमेंट और वहां मजबूत सुरक्षा दीवारें (रिटेनिंग वॉल) खड़ी करने के प्लान पर सबसे ज्यादा माथापच्ची कर रहा है। कंस्ट्रक्शन के दौरान पर्यावरण को कम से कम नुकसान पहुंचे, इसके लिए खास इको-फ्रेंडली तकनीकों को प्रोजेक्ट की डीपीआर के भीतर शामिल किया जा रहा है।

वीकेंड और छुट्टियों के दिनों में दिल्ली, हरियाणा, यूपी और पांवटा साहिब की तरफ से आने वाले हजारों सैलानियों को फिलहाल मसूरी जाने के लिए देहरादून के सबसे व्यस्त चौराहों से होकर जाना पड़ता है। आईएसबीटी, जाखन, मुख्य बाजार और राजपुर रोड पर गाड़ियों का भारी सैलाब आ जाता है।

राजपुर रोड पर बने लाइन से कैफे, रेस्टोरेंट और शॉपिंग मॉल्स की वजह से लोकल गाड़ियां पहले से ही बहुत ज्यादा हैं, ऊपर से बाहरी गाड़ियों के दबाव से पूरा सिस्टम चोक हो जाता है। इस बाईपास के बनते ही गाड़ियों को देहरादून के इन भीड़भाड़ वाले अंदरूनी रास्तों में एंट्री करने की जरूरत ही नहीं बचेगी।

वन भूमि हस्तांतरण की बड़ी चुनौती

प्रोजेक्ट को जमीन पर उतारना एनएचएआई के लिए आसान नहीं होने वाला है क्योंकि इस रूट के सामने पर्यावरण और कड़े वन कानून सबसे बड़ी दीवार बनकर खड़े हैं। यह नई डबल लेन सड़क सीधे घने जंगलों और बेहद संवेदनशील पहाड़ी जोन से होकर गुजरेगी।

काम शुरू करने से पहले एनएचएआई को बड़े पैमाने पर फॉरेस्ट लैंड ट्रांसफर (वन भूमि हस्तांतरण) की बेहद पेचीदा और लंबी कानूनी प्रक्रिया से निपटना होगा। इसके साथ ही इस पूरे एलाइनमेंट में आने वाले पेड़ों के कटान की अलग से मंजूरी लेनी होगी।

आशारोड़ी-झाझरा लिंक का काम 70% पूरा

इस पूरे ग्रिड को जोड़ने वाले आशारोड़ी-झाझरा लिंक हाईवे पर काम काफी आगे बढ़ चुका है। इस 12 किलोमीटर लंबे लिंक प्रोजेक्ट का करीब 70 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा कर लिया गया है। इस पूरे पैच में अब तक सात किलोमीटर लंबी रिटेनिंग रोड पूरी तरह से तैयार की जा चुकी है।

इसके अलावा इस रूट पर बनने वाले कुल 11 माइनर ब्रिज (छोटे पुलों) में से 9 माइनर ब्रिज का काम पूरी तरह से कंपलीट किया जा चुका है।

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Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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