देहरादून (07 अक्टूबर) : विषम आपदाओं, अप्रत्याशित हादसों या मानवीय संकट के क्षणों में अपनी जान जोखिम में डालकर दूसरों की मदद करने वाले बच्चों को उत्तराखंड सरकार सम्मानित करने जा रही है। मुख्यमंत्री राज्य बाल वीरता योजना (Chief Minister State Child Bravery Award) के तहत वर्ष 2026 के लिए औपचारिक नामांकन प्रक्रिया तेज कर दी गई है। राजधानी देहरादून समेत प्रदेश के सभी तेरह जनपदों में पात्र छात्र-छात्राओं की पहचान कर उनके दस्तावेज जुटाने का काम शुरू हो चुका है।
हर जिले से एक जांबाज का चयन, 10 अक्टूबर तक का मौका
प्रशासनिक रूपरेखा के तहत राज्य के प्रत्येक जनपद से अनिवार्य रूप से एक साहसी बालक या बालिका को इस प्रतिष्ठित सम्मान के लिए शॉर्टलिस्ट किया जाएगा। जिला कार्यक्रम अधिकारी जितेंद्र कुमार के मुताबिक, योजना केवल शारीरिक पराक्रम तक सीमित नहीं है। अगर किसी बच्चे ने किसी डूबते हुए को बचाया हो, आगजनी जैसी आपात स्थिति में धैर्य दिखाया हो या फिर गंभीर मानवीय संवेदना का परिचय देते हुए किसी की रक्षा की हो, तो वह इस पुरस्कार का सीधा हकदार बनता है।
समय सीमा बेहद सीमित है। इच्छुक अभिभावक और संबंधित संस्थान 10 अक्टूबर, 2026 तक ही अपना आवेदन पत्र डिजिटल माध्यम से जमा कर सकते हैं।
स्कूलों के प्रिंसिपलों को निर्देश, इस पोर्टल पर होंगे आवेदन
महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास विभाग (WECD) ने पूरी आवेदन प्रक्रिया को पारदर्शी और पेपरलेस रखा है। सभी सरकारी, सहायता प्राप्त व निजी विद्यालयों के प्रधानाचार्यों और प्रधानाध्यापकों से अपील की गई है कि वे अपने संस्थानों में ऐसे साहसी बच्चों के वाकयों की पड़ताल करें। पात्र बच्चों का पूरा विवरण आधिकारिक विभागीय पोर्टल wecd.uk.gov.in पर समय रहते अपलोड कराना स्कूल प्रबंधन की जिम्मेदारी होगी।
ऑनलाइन फॉर्म भरते समय घटना का संक्षिप्त विवरण, संबंधित स्थानीय पुलिस या प्रत्यक्षदर्शी का सत्यापन और आयु प्रमाण पत्र जैसे दस्तावेज संलग्न करने अनिवार्य होंगे। इसके बाद जिला स्तरीय समिति प्राप्त आवेदनों की स्क्रूटनी कर अंतिम नाम शासन को प्रेषित करेगी।









