वाराणसी, 04 अप्रैल 2026 (दून हॉराइज़न)। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को धर्मनगरी वाराणसी से ‘स्कूल चलो अभियान’ के नवीन चरण का विधिवत आगाज किया। शिक्षा को केवल डिग्री हासिल करने का जरिया मानने की सोच को खारिज करते हुए मुख्यमंत्री ने दो-टूक कहा कि यह मनुष्य को संस्कारित करने और सशक्त राष्ट्र के निर्माण का सबसे बड़ा माध्यम है।
वाराणसी के सर्किट हाउस और संबंधित कार्यक्रम स्थलों पर सीएम ने खुद बच्चों को बैग और किताबें वितरित कीं, साथ ही बच्चों को अपने हाथों से खाना परोसकर उनके साथ संवाद किया।
मुख्यमंत्री ने शिक्षा विभाग के बजट पर प्रकाश डालते हुए बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार स्कूली शिक्षा पर सालाना 80 हजार करोड़ रुपये से अधिक की भारी-भरकम राशि खर्च कर रही है। उन्होंने साफ किया कि यह पैसा जनता का है और इसका परिणाम ‘क्वालिटी एजुकेशन’ के रूप में आना चाहिए।
सीएम ने पिछली सरकारों पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि 2017 से पहले शिक्षा सरकार के एजेंडे में थी ही नहीं, क्योंकि तत्कालीन व्यवस्था केवल नकल माफियाओं को संरक्षण देने और कामचलाऊ तंत्र चलाने में व्यस्त थी।
शिक्षकों और शिक्षा क्षेत्र से जुड़े कर्मचारियों के लिए मुख्यमंत्री ने बड़े तोहफों का पिटारा खोला। उन्होंने घोषणा की कि अनुदेशकों को अब 17,000 रुपये और शिक्षामित्रों को 18,000 रुपये का मानदेय इसी महीने से मिलना शुरू हो जाएगा। इसके अलावा, शिक्षक, शिक्षामित्र, रसोइया और अनुदेशकों के लिए 5 लाख रुपये तक की कैशलेस स्वास्थ्य बीमा सुविधा भी अनिवार्य रूप से लागू की जा रही है।
सीएम ने शिक्षकों से अपील की कि वे 1 से 15 अप्रैल तक चलने वाले इस अभियान में खुद को झोंक दें ताकि प्रदेश का कोई भी बच्चा स्कूल की दहलीज से बाहर न रहे।
इन्फ्रास्ट्रक्चर के मोर्चे पर बोलते हुए योगी आदित्यनाथ ने ‘ऑपरेशन कायाकल्प’ की सफलता गिनाई, जिसके माध्यम से प्रदेश के 1,36,000 से अधिक विद्यालयों को स्मार्ट और बुनियादी सुविधाओं से लैस किया जा चुका है। उन्होंने बताया कि ‘ऑपरेशन निपुण’ के जरिए बच्चों में अंकों और अक्षरों का ज्ञान बढ़ा है।
मुख्यमंत्री ने आगामी योजनाओं का खाका खींचते हुए कहा कि अब हर जनपद में दो-दो सीएम कंपोजिट विद्यालय बनाए जाएंगे, जहाँ प्री-प्राइमरी से लेकर 12वीं तक की अत्याधुनिक शिक्षा एक ही कैंपस में मिलेगी।
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री भावुक भी हुए। उन्होंने गुरु-शिष्य परंपरा का जिक्र करते हुए कहा कि वे आज भी अपने उन शिक्षकों का पैर छूते हैं जिन्होंने उन्हें अक्षर ज्ञान सिखाया था। उन्होंने शिक्षकों को याद दिलाया कि उन्हें देश के भविष्य को तराशने की जिम्मेदारी ईश्वर ने दी है। इस जिम्मेदारी का निर्वहन ईमानदारी से करने पर ही समाज उन्हें सदैव सम्मान देगा।

कार्यक्रम से पूर्व मुख्यमंत्री ने काशी की आध्यात्मिक ऊर्जा के साथ दिन की शुरुआत की। शनिवार सुबह उन्होंने ‘काशी कोतवाल’ काल भैरव मंदिर में माथा टेका और आरती में शामिल हुए।
इसके बाद वे श्रीकाशी विश्वनाथ धाम पहुंचे, जहाँ उन्होंने लोक मंगल की कामना के साथ बाबा विश्वनाथ का षोडशोपचार पूजन और अभिषेक किया। मंदिर परिसर में ‘हर-हर महादेव’ के जयकारों के बीच मुख्यमंत्री ने श्रद्धालुओं और स्थानीय दुकानदारों से भी मुलाकात की, जहाँ उन्होंने छोटे बच्चों को उज्ज्वल भविष्य का आशीर्वाद दिया।










