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Uttarakhand Election Commission : उत्तराखंड चुनाव आयोग का सख्त एक्शन, 1452 नेताओं के चुनाव लड़ने पर लगी 3 साल की रोक

उत्तराखंड राज्य निर्वाचन आयोग ने चुनाव खर्च का हिसाब न देने पर चमोली और बागेश्वर के 1452 नेताओं पर तीन साल का प्रतिबंध लगा दिया है। आज देहरादून सचिवालय में उपनल कर्मचारियों के नियमितीकरण को लेकर भी अहम कैबिनेट बैठक होने जा रही है।

Uttarakhand Election Commission Bans 1452 Leaders From Contesting Elections For 3 Years

HIGHLIGHTS

  • 1452 नेताओं पर तीन साल का बैन
  • चमोली के 826 और बागेश्वर के 630 नेता
  • उपनल कर्मियों पर आज कैबिनेट बैठक
  • सीएम धामी की दिल्ली में अहम मुलाकातें

देहरादून, 7 अगस्त 2026 (दून हॉराइज़न)।

Uttarakhand Election Commission : उत्तराखंड राज्य निर्वाचन आयोग ने 1452 नेताओं के खिलाफ सख्त कदम उठाया है। इन सभी पर अगले तीन साल तक किसी भी प्रकार का चुनाव लड़ने पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है। पंचायत चुनाव में खर्च का ब्योरा जमा न करना इनके लिए भारी पड़ा है।

राज्य निर्वाचन आयुक्त सुशील कुमार ने इस कार्रवाई के स्पष्ट निर्देश जारी किए। इन नेताओं ने त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के संपन्न होने के बाद अपने चुनावी खर्च का कोई हिसाब आयोग को नहीं सौंपा था। कई बार नोटिस भेजे जाने के बाद भी इनकी तरफ से कोई जवाब आयोग तक नहीं पहुंचा।

प्रतिबंधित किए गए ये सभी नेता मुख्य रूप से चमोली और बागेश्वर जिले से ताल्लुक रखते हैं। आयोग द्वारा जारी सूची में चमोली जिले के 826 प्रत्याशियों के नाम शामिल हैं। बागेश्वर के 630 नेताओं को भी चुनाव लड़ने के अयोग्य घोषित कर दिया गया है।

साल 2025 में हुए इन पंचायती चुनावों में बड़े पैमाने पर लोगों ने हिस्सा लिया था। विभिन्न पदों के लिए 60 हजार से अधिक उम्मीदवारों ने अपना नामांकन पत्र दाखिल किया था। कई सीटों पर प्रत्याशियों का निर्वाचन पूरी तरह से निर्विरोध संपन्न हो गया था।

निर्विरोध चुनाव के बाद मुख्य चुनावी मुकाबला केवल 32 हजार 580 प्रत्याशियों के बीच सिमट गया था। इन सभी उम्मीदवारों के लिए चुनाव प्रक्रिया खत्म होने के बाद एक तय सीमा के भीतर अपने खर्च की जानकारी देना अनिवार्य था। नियमों की अनदेखी करने पर अब यह कड़ा एक्शन लिया गया है।

राज्य सचिवालय में शुक्रवार 7 अगस्त को कैबिनेट की महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई है। इस बैठक पर राज्य के हजारों कर्मचारियों की निगाहें टिकी हुई हैं। उपनल और संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण का मुद्दा आज के एजेंडे में सबसे अहम है।

कैबिनेट की सब कमेटी ने नियमितीकरण से जुड़ी अपनी विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर ली है। यह रिपोर्ट आज की बैठक में मंत्रिमंडल के सामने रखी जाएगी। सरकार इस रिपोर्ट के आधार पर कर्मचारियों के भविष्य को लेकर अंतिम फैसला ले सकती है।

कार्मिक, शिक्षा, कृषि, पर्यटन और आवास विभाग के कई प्रस्तावों पर भी आज चर्चा होनी है। आगामी विधानसभा सत्र को देखते हुए कई विभागों के प्रत्यावेदनों को सदन के पटल पर रखने की तैयारी है। कैबिनेट इन प्रत्यावेदनों को अपनी औपचारिक मंजूरी देगी।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का दिल्ली दौरा राजनीतिक और प्रशासनिक लिहाज से काफी अहम रहा। गुरुवार को उन्होंने राष्ट्रीय राजधानी में भारतीय जनता पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं से लगातार मुलाकातें कीं। इन बैठकों में राज्य के विकास से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर मंथन हुआ।

केंद्रीय सड़क परिवहन राज्य मंत्री अजय टम्टा से मुख्यमंत्री की विशेष भेंट हुई। दोनों नेताओं ने उत्तराखंड में चल रही अलग-अलग सड़क परियोजनाओं की प्रगति की गहन समीक्षा की। पर्वतीय क्षेत्रों में ढांचागत विकास को तेज करने पर लंबी बातचीत हुई।

मुख्यमंत्री धामी ने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट और पूर्व सीएम रमेश पोखरियाल निशंक से भी राजनीतिक हालात पर विमर्श किया। सांसद अजय भट्ट, माला राज्यलक्ष्मी शाह और कल्पना सैनी के साथ भी उनकी अहम बैठक हुई। राज्य से जुड़े नीतिगत विषयों पर सांसदों से ग्राउंड फीडबैक लिया गया।

पूर्व सैनिक कल्याण सलाहकार परिषद के अध्यक्ष कर्नल अजय कोठियाल (सेवानिवृत्त) ने कांग्रेस पार्टी पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कांग्रेस नेताओं पर राज्य के पूर्व सैनिकों के खुले अपमान का गंभीर आरोप लगाया। उनका गुस्सा अग्निवीर योजना को लेकर कांग्रेस द्वारा आयोजित एक पत्रकार वार्ता को लेकर था।

कर्नल कोठियाल ने गुरुवार को अपना कड़ा बयान जारी किया। उन्होंने कहा कि अग्निवीर के नाम पर बुलाई गई प्रेस कॉन्फ्रेंस में किसी भी आम पूर्व सैनिक को सम्मानजनक जगह नहीं दी गई। मंच पर केवल चुनिंदा नेताओं का कब्जा था।

मंच की सभी कुर्सियों पर केवल कांग्रेस के पूर्व सैनिक विभाग के राष्ट्रीय और प्रदेश अध्यक्ष बैठे नजर आए। बाकी जगहों पर पार्टी के आम नेताओं ने कब्जा जमा रखा था। असली पूर्व सैनिकों को इस पूरे कार्यक्रम से पूरी तरह दरकिनार कर दिया गया था।

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Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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