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यूपी में खेती के लिए बनेगा UPI जैसा नेटवर्क, गूगल संग हुआ बड़ा MoU

सीएम योगी ने विश्व बैंक समर्थित ₹4000 करोड़ के यूपी-एग्रीज प्रोजेक्ट के तहत गूगल, ITC व एक्वाब्रिज संग MoU किए। 28 जिलों के 10 लाख किसानों को सीधा फायदा मिलेगा।

Published On: August 26, 2026 7:28 PM
यूपी में खेती के लिए बनेगा UPI जैसा नेटवर्क, गूगल संग हुआ बड़ा MoU

HIGHLIGHTS

  • ₹4000 करोड़ की लागत से 28 जनपदों के 123 ब्लॉक में यूपी-एग्रीज लागू।
  • गूगल के साथ कृषि के लिए यूपीआई जैसा ओपन डिजिटल प्लेटफॉर्म बनेगा।
  • बहराइच क्लस्टर से धान की प्रति एकड़ आय 20-30% बढ़ाने का लक्ष्य।
  • नोएडा एयरपोर्ट के पास एक्सपोर्ट सेंटर व उन्नाव में एक्वाकल्चर हब बनेगा।
  • योजना से 10 लाख किसान, 35 हजार मत्स्य पालक व 3 लाख महिलाएं जुड़ेंगी।

लखनऊ : पूर्वांचल और बुंदेलखंड के 28 जिलों में खेती की तस्वीर बदलने के लिए राज्य सरकार ने बड़ी छलांग लगाई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में बुधवार को विश्व बैंक (World Bank) समर्थित लगभग ₹4,000 करोड़ की ‘उत्तर प्रदेश एग्रीकल्चर ग्रोथ एंड रूरल एंटरप्राइज इकोसिस्टम स्ट्रेंथनिंग’ यानी यूपी-एग्रीज (UP-AGRIES) परियोजना के अंतर्गत दिग्गज टेक कंपनी गूगल, आईटीसी (ITC) और एक्वाब्रिज के साथ अहम समझौते (MoU) हस्ताक्षरित किए गए।

यूपीडीएएसपी (UPDASP) के साथ हुए इन समझौतों का सीधा मकसद किसानों की पैदावार बढ़ाने के साथ-साथ लागत घटाना और उनकी आय में ठोस बढ़ोतरी दर्ज कराना है।

गूगल बनाएगा यूपीआई जैसा ओपन नेटवर्क, मौसम से मंडी भाव तक सब मिलेगा अब एक जगह

खेती-किसानी को अब डेटा साइंस और डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर (Digital Public Infrastructure) से लैस किया जा रहा है। सीएम ने बताया कि गूगल और नेटवर्क फॉर ह्यूमैनिटी के साथ साझेदारी में ‘ओपन नेटवर्क फॉर एग्रीकल्चर’ विकसित किया जाएगा। यह मॉडल देश के सफल यूपीआई और ओएनडीसी (ONDC) ढांचे की तर्ज पर काम करेगा।

दरअसल, इससे किसानों को अलग-अलग एग्रीटेक सेवाओं के लिए दर्जनों ऐप डाउनलोड करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। एक ही सिंगल इंटरफेस पर मिट्टी की जांच रिपोर्ट, सटीक मौसम पूर्वानुमान, उपग्रह आधारित सलाह और रियल-टाइम मंडी भाव उपलब्ध होंगे। इस ओपन नेटवर्क से जुड़कर स्टार्टअप्स भी दूरदराज के गांवों तक अपनी सेवाएं सीधे पहुंचा सकेंगे।

बुंदेलखंड व पूर्वांचल के 123 ब्लॉकों पर फोकस, 10 लाख किसानों को मिलेगा इसका लाभ

परियोजना के तहत पूर्वी उत्तर प्रदेश के 21 और बुंदेलखंड के 7 जिलों के 123 विकास खंडों को चुना गया है। दशकों तक उपेक्षित रहे इन क्षेत्रों में करीब 6 लाख हेक्टेयर भूमि को कवर करने की योजना है। कार्यक्रम से 10 लाख अन्नदाता, 35 हजार मत्स्य पालक और 3 लाख महिला किसान सीधे लाभान्वित होंगी। सीएम के अनुसार, खरीफ 2026 में 1.75 लाख हेक्टेयर और रबी (2026-27) में भी 1.75 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में दलहन-तिलहन और मोटे अनाजों की उत्पादकता बढ़ाने पर काम शुरू हो चुका है। अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान (IRRI) की मदद से 3,000 हेक्टेयर में कम पानी और कम लागत वाली डायरेक्ट सीडेड राइस यानी सीधी धान बुवाई (Direct Seeded Rice) तकनीक उतारी गई है।

ITC के साथ बहराइच में धान क्लस्टर, उन्नाव में बनेगा 60 एकड़ का एक्वा हब

फसलों को वैश्विक निर्यात मानकों के अनुकूल बनाने के लिए आईटीसी के साथ 2 लाख एकड़ से अधिक में क्लाइमेट स्मार्ट फार्मिंग का विस्तार किया जा रहा है। बहराइच में 1,500 एकड़ का विशेष धान क्लस्टर विकसित होगा, जहां यूरिया की खपत 25% कम करने और किसानों की प्रति एकड़ आय 20 से 30 फीसदी बढ़ाने का लक्ष्य है। वहीं नीली क्रांति को गति देने के लिए एक्वाब्रिज के साथ मिलकर उन्नाव के आईएमसी इंडस्ट्रियल कॉरिडोर में 60 एकड़ पर इंटीग्रेटेड एक्वाकल्चर परियोजना बनेगी। इसमें आधुनिक हैचरी, एआई-आधारित ऑटोमैटिक फीडिंग और ट्रेनिंग सेंटर शामिल होंगे।

नोएडा एयरपोर्ट के पास बनेगा मेगा फूड पार्क, खेत से ग्लोबल मार्केट तक मिलेगी कनेक्टिविटी

किसानों की उपज को अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ने के लिए नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के समीप एक मेगा फूड पार्क और एग्री एक्सपोर्ट सेंटर स्थापित करने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। इसका सीधा फायदा यह होगा कि पेरिशेबल यानी जल्दी खराब होने वाली सब्जियां जैसे टमाटर, हरी मटर, मिर्च और फल बिना देरी के प्रोसेस्ड होकर विदेशों में निर्यात किए जा सकेंगे। कृषि विभाग और संबंधित एजेंसियां अब इन सभी एमओयू को ग्राउंड लेवल पर तेजी से लागू करने की समयसीमा तय कर रही हैं।

Rajat Sharma

रजत शर्मा 'दून हॉराइज़न' में लीड बिज़नेस एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड्स, क्रिप्टोकरेंसी और सरकारी आर्थिक नीतियों को कवर करने में उनका लंबा और जमीनी अनुभव है। रजत की सबसे बड़ी खासियत जटिल आर्थिक आंकड़ों और मार्केट ट्रेंड्स को सरल, आम बोलचाल की हिंदी में डिकोड करना है। वे तथ्य-आधारित (Fact-based) और गहराई से रिसर्च की गई स्टोरीज लिखते हैं, ताकि आम निवेशक और व्यापारी सही वित्तीय फैसले ले सकें। रजत की पत्रकारिता हमेशा सत्य, निष्पक्षता और पाठकों के आर्थिक हितों को प्राथमिकता देते हुए आगे बढ़ती है।

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