Vishwakarma Puja Swastik Niyam : विश्वकर्मा पूजा का दिन शिल्पकारों, कामगारों, इंजीनियरों और छोटे-बड़े उद्योगों के लिए बेहद खास होता है।
इस दिन निर्माण के देवता भगवान विश्वकर्मा की पूजा के साथ-साथ उन सभी औजारों, उपकरणों और मशीनों की पूजा की जाती है, जो हमारी आजीविका का जरिया हैं।
पूजन के दौरान आपने देखा होगा कि लेथ मशीन से लेकर कंप्यूटर और वाहनों तक, हर जगह रोली या सिंदूर से स्वस्तिक बनाया जाता है। साथ ही कई जगह ॐ और ‘शुभ-लाभ’ भी लिखा जाता है। इस परंपरा के पीछे गहरी धार्मिक आस्था के साथ सुरक्षा का भाव भी जुड़ा हुआ है।
मशीनों पर स्वस्तिक बनाने का धार्मिक कारण
सनातन परंपरा में स्वस्तिक को मंगल और कल्याण का प्रतीक माना जाता है। यह शब्द ‘सु’ और ‘अस्ति’ के मेल से बना है, जिसका सीधा अर्थ है—सबका कल्याण होना।
बाधाओं से मुक्ति: स्वस्तिक को प्रथम पूज्य भगवान गणेश का स्वरूप माना जाता है। काम की मशीनों पर इसे बनाने की भावना यह होती है कि काम बिना किसी तकनीकी रुकावट या खराबी के चलता रहे।
सकारात्मक ऊर्जा और बरकत: स्वस्तिक को समृद्धि का कारक माना जाता है। मान्यता है कि इससे कार्यस्थल पर सकारात्मक माहौल बनता है और व्यापार में आर्थिक स्थिरता आती है।
कामगारों की सुरक्षा: फैक्ट्रियों और वर्कशॉप में भारी मशीनों पर काम करते समय हमेशा सावधानी की जरूरत होती है। कारीगर स्वस्तिक बनाकर यह प्रार्थना करते हैं कि पूरे साल मशीन सुरक्षित ढंग से चले और कोई अप्रिय हादसा न हो।
मशीनों पर ‘ॐ’ और ‘शुभ-लाभ’ लिखने की मान्यता

स्वस्तिक के साथ-साथ औजारों पर दो अन्य पवित्र शब्द भी प्रमुखता से लिखे जाते हैं:
ॐ का महत्व: ‘ॐ’ को सृष्टि की ऊर्जा और ब्रह्मांड की मूल ध्वनि माना गया है। मशीनों पर इसे अंकित करने का उद्देश्य यह भाव रखना है कि काम में एकाग्रता बनी रहे और उत्पादन शांतिपूर्ण ढंग से आगे बढ़े।
शुभ-लाभ: अधिकतर वर्कशॉप्स के मुख्य प्रवेश द्वार, तिजोरी और भारी मशीनों पर ‘शुभ-लाभ’ लिखा जाता है। इसका अर्थ सीधा है—जो भी काम यहां हो, वह समाज और संस्थान दोनों के लिए ‘शुभ’ यानी हितकारी हो और उससे सबको सही ‘लाभ’ यानी आजीविका मिले।

कलावा बांधने और तिलक लगाने की परंपरा
विश्वकर्मा पूजा की शुरुआत मशीनों की अच्छी तरह सफाई और मेंटेनेंस से होती है। इसके बाद रोली, हल्दी और चंदन का तिलक लगाया जाता है।
रक्षा सूत्र या मौली: मशीनों के मुख्य हैंडल, स्विच या मुख्य पुर्जों पर लाल कलावा बांधा जाता है। इसे कार्यस्थल पर सुरक्षा कवच के प्रतीक के रूप में देखा जाता है।
फूल-माला और रोली के छापे: मशीनों को गेंदे के फूलों से सजाया जाता है। कई जगहों पर रोली और चावल के घोल से हथेलियों के छापे लगाए जाते हैं, जो लक्ष्मी के आगमन और श्रम के प्रति सम्मान का प्रतीक हैं।
पूजन के दौरान ध्यान रखने योग्य व्यावहारिक बातें
- पूजा शुरू करने से पहले सभी मशीनों की बिजली आपूर्ति बंद कर लें, ताकि सफाई करते समय कोई जोखिम न रहे।
- केवल औजारों की औपचारिकता न निभाएं, बल्कि उनके नियमित रख-रखाव और सुरक्षा नियमों का पालन करने का संकल्प भी लें।










