Pooja Room Vastu : अक्सर किसी तीर्थ यात्रा से लौटते समय या त्योहारों के मौके पर हम नई प्रतिमाएं घर ले आते हैं। धीरे-धीरे घर के छोटे से मंदिर में मूर्तियों की संख्या काफी बढ़ जाती है।
भावना भले ही सच्ची हो, लेकिन बहुत अधिक मूर्तियां होने से उनकी नियमित सेवा, साफ-सफाई और ध्यान लगाना कठिन हो जाता है।
धार्मिक परंपराओं और वास्तु के अनुसार, घर के मंदिर को हमेशा व्यवस्थित, शांत और हल्का रखना चाहिए ताकि पूजा का भाव केंद्रित रहे।
गणेश जी की प्रतिमा से जुड़े नियम
भगवान गणेश हर शुभ कार्य के अग्रदूत हैं। घर के मंदिर में गणेश जी की एक ही प्रतिमा रखना सबसे उत्तम माना जाता है।
यदि एक से अधिक प्रतिमाएं हैं, तो मान्यता के अनुसार उन्हें 3, 5 या 7 जैसी विषम संख्या में रखा जा सकता है। कोशिश करें कि प्रतिमाएं बहुत बड़ी न हों और पूजा स्थल पर अनावश्यक भीड़ न बने।
शिवलिंग स्थापित करते समय रखें यह सावधानी
घर के पूजा स्थल पर शिवलिंग रखने के लिए विशेष नियम बताए गए हैं:
- शिवलिंग का आकार अंगूठे के पोर से बड़ा नहीं होना चाहिए।
- घर में केवल एक ही शिवलिंग रखना उचित माना जाता है।
- शिवलिंग को हमेशा जल की व्यवस्था वाले स्थान या जलपात्र में रखना चाहिए।
- बड़े शिवलिंग की विस्तृत पूजा विधि होती है, जिसे रोजमर्रा की घरेलू दिनचर्या में निभाना आसान नहीं होता।
मां दुर्गा और देवी प्रतिमाओं की संख्या

मां दुर्गा या अन्य देवियों की पूजा करते समय ध्यान रखें कि एक ही देवी की तीन तस्वीरें या मूर्तियां एक साथ रखने से बचना चाहिए। आप एक, दो या तीन से अधिक संख्या रख सकते हैं।
कई बार नवरात्रि पर नई फोटो लगाने के बाद पुरानी तस्वीरें मंदिर में ही रखी रह जाती हैं, समय-समय पर मंदिर को व्यवस्थित करते रहें।
हनुमान जी का कौन सा स्वरूप घर के लिए उत्तम?

घर के मंदिर में हनुमान जी की बैठी हुई और शांत मुद्रा वाली तस्वीर या मूर्ति लगाना सबसे अच्छा माना जाता है।
यह स्वरूप सुख और स्थिरता का प्रतीक है। युद्ध मुद्रा या उग्र स्वरूप वाले चित्र सार्वजनिक मंदिरों के लिए अधिक उपयुक्त होते हैं।
परिवार में सामंजस्य के लिए राम दरबार और शिव परिवार
घर के वातावरण में अपनापन और शांति बनाए रखने के लिए राम दरबार या संपूर्ण शिव परिवार का चित्र बेहद शुभ माना जाता है।
यह स्वरूप परिवार में आपसी प्रेम, तालमेल और सम्मान की भावना को बढ़ावा देता है।
मंदिर की सही दिशा और जरूरी सावधानियां
मूर्तियों के चयन के साथ-साथ मंदिर के स्थान का ध्यान रखना भी आवश्यक है:
घर का मंदिर हमेशा उत्तर-पूर्व दिशा (ईशान कोण) में होना चाहिए।
पूजा करते समय आपका मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर रहे तो बेहतर होता है।
मंदिर को बेडरूम, बाथरूम के पास या सीढ़ियों के नीचे बनाने से बचें।
पूजा स्थल जितना साफ, हल्का और व्यवस्थित रहेगा, घर में उतनी ही सकारात्मक ऊर्जा बनी रहेगी।












