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हल्द्वानी-सितारगंज मार्ग बनेगा फोरलेन, 7 हजार पेड़ों की कटाई के बीच फोरलेन हाईवे का सर्वे पूरा

हल्द्वानी-चोरगलिया से सितारगंज सिडकुल तक 30 किमी मार्ग को फोरलेन बनाने की तैयारी तेज हो गई है। 16 मीटर चौड़ी होने वाली इस सड़क से कुमाऊं से बरेली और लखनऊ का सफर सुगम होगा।

Published On: September 17, 2026 4:01 PM
Haldwani Sitarganj four lane highway

HIGHLIGHTS

  • हल्द्वानी-सितारगंज मार्ग का 30 किमी प्राथमिक सर्वे पूरा, शासन को जाएगी रिपोर्ट।
  • सड़क की मौजूदा चौड़ाई 5.5 मीटर से बढ़ाकर 16 मीटर की जाएगी।
  • रिजर्व फॉरेस्ट और तराई पूर्वी डिवीजन के करीब 7,000 पेड़ जद में आए।
  • सिडकुल सितारगंज होते हुए रूट सीधे निर्माणाधीन बरेली हाईवे से जुड़ेगा।
  • पहाड़ से उतरने वाले भारी मालवाहक वाहनों को मिलेगा नया बाईपास कॉरिडोर।

दून हॉराइज़न, हल्द्वानी (17 सितंबर): कुमाऊं के प्रवेश द्वार से उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ और औद्योगिक शहरों तक की आवाजाही को रफ्तार देने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। लोक निर्माण विभाग ने हल्द्वानी से चोरगलिया होते हुए सितारगंज सिडकुल तक प्रस्तावित फोरलेन (Four-Lane Highway) के शुरुआती 30 किलोमीटर हिस्से का प्राथमिक सर्वे मुकम्मल कर लिया है।

यह नया कॉरिडोर बन जाने के बाद नैनीताल और अल्मोड़ा जैसे पर्वतीय जिलों से आने वाले ट्रैफिक को लालकुआं और किच्छा के पुराने जाम से जूझे बिना सीधे बरेली और लखनऊ की सीधी राह मिल जाएगी।

संकरी डामर पट्टी से 16 मीटर का ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे जैसा लुक

वर्तमान में हल्द्वानी से चोरगलिया होकर सितारगंज जाने वाला मार्ग महज साढ़े पांच मीटर चौड़ा है। पीक ऑवर्स में इस सिंगल-इंटरमीडिएट लेन पर ट्रकों और रोडवेज बसों के चलते वाहनों की रफ्तार 30 से 40 किमी प्रति घंटा से ऊपर नहीं जा पाती। लोक निर्माण विभाग (PWD) की तकनीकी टीम के मुताबिक, नए प्रस्ताव में इस मार्ग को 16 मीटर तक चौड़ा कर डिवाइडर युक्त फोरलेन में बदला जाना है।

अड़चनें भी कम नहीं हैं। यह रूट गौलापार के मैदानी इलाके से निकलकर सघन वन क्षेत्र में प्रवेश करता है। लोनिवि हल्द्वानी खंड के अधिशासी अभियंता प्रत्यूष कुमार ने बताया कि प्रारंभिक तकनीकी खाका तैयार हो चुका है। अब गेंद शासन के पाले में है; वहां से हरी झंडी मिलते ही डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट और जमीन के सीमांकन की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

7 हजार पेड़ और वन भूमि हस्तांतरण की पेचीदा प्रक्रिया

सड़क चौड़ी करने का काम कागजों पर जितना आसान दिखता है, जमीन पर उतना ही संवेदनशील है। प्रस्तावित अलाइनमेंट का बड़ा हिस्सा रिजर्व फॉरेस्ट और तराई पूर्वी वन प्रभाग (Tarai East Forest Division) की सीमा से होकर गुजर रहा है। सर्वे रिपोर्ट में सामने आया है कि सड़क को 16 मीटर विस्तार देने के लिए करीब 7 हजार छोटे-बड़े पेड़ों को काटना पड़ेगा।

पर्यावरण नियमों के तहत वन भूमि के गैर-वानिकी उपयोग के लिए केंद्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्रालय (MoEFCC) के परिवेश पोर्टल पर प्रस्ताव दर्ज कराना होगा। राज्य स्तर पर मुख्य वन संरक्षक और वाइल्डलाइफ विंग की मंजूरी मिलने के बाद ही काम जमीन पर उतरेगा। इसमें कैंपा फंड और दोगुनी गैर-वन भूमि पर क्षतिपूरक पौधरोपण (Compensatory Afforestation) का प्रावधान भी शामिल रहेगा।

सिडकुल के उद्योगों और यूपी-ब्रज क्षेत्र को सीधा फायदा

यह सड़क केवल आम यात्रियों के लिए ही नहीं, बल्कि ऊधमसिंह नगर के सबसे बड़े औद्योगिक हब सितारगंज सिडकुल के लिए लाइफलाइन साबित होगी। सितारगंज से बरेली के बीच पहले से ही हाईवे पर काम चल रहा है।

हल्द्वानी से यह लिंक जुड़ते ही कुमाऊं का सीधा संपर्क पीलीभीत, बरेली, कासगंज, मथुरा और आगरा के रास्ते ब्रज क्षेत्र से हो जाएगा। इससे काठगोदाम और हल्द्वानी मंडी से फल, सब्जी और लकड़ी की ढुलाई करने वाले भारी वाहनों को घनी आबादी वाले कस्बों से गुजरे बिना सुगम रास्ता मिल सकेगा।

Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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